{"_id":"5a4e869f4f1c1b0a788b6a60","slug":"191515095711-sonipat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांव के हर घर में खिलाड़ी, ठेका खुला तो भटके युवा, अब पंचायत की शराब से तौबा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांव के हर घर में खिलाड़ी, ठेका खुला तो भटके युवा, अब पंचायत की शराब से तौबा
Updated Fri, 05 Jan 2018 01:25 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंकित चौहान
सोनीपत। पुरखास एक ऐसा गांव, जिसे खिलाड़ियों के गांव के नाम से जाना जाता है। वहां ओलंपियन से लेकर जिला स्तर के 1300 से ज्यादा खिलाड़ियों की फौज है। लाभ के लिए सरकार की ओर से खोले गए ठेके ने युवाओं को नशे की जद में लेना शुरू कर दिया। गांव के लोगों को युवाओं का भविष्य खराब होता देख ग्रामीणों ने एकजुट होकर शराब बंदी का बीड़ा उठाया। महिला सरपंच की अगुवाई में शराब का ठेका बंद कराने के लिए आवेदन किया गया, जिसे मान लिया गया है। अब गांव से ठेका हटना अभी बाकी है। वहीं पंचायत ने कसम खाई है कि युवाओं को नशे के चंगुल में नहीं फंसने दिया जाएगा।
गन्नौर तहसील में पड़ने वाले पुरखास गांव की दुनिया में एक अलग पहचान है और यह पहचान वहां के खिलाड़ियों के कारण है। पुरखास गांव की आबादी लगभग 18 हजार है और वहां लगभग 1350 घर है। इन सभी घरों में कोई न कोई खिलाड़ी है और जहां पहले केवल कुश्ती में सबसे ज्यादा गांव के युवा आते थे। वहीं अब कबड्डी व एथलेटिक्स के खेल में भी युवा आगे बढ़ रहे है। गांव में खेलों को किस तरह बढ़ावा दिया जाता है, उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां लगभग 200 खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेर चुके है तो अन्य खिलाड़ी नेशनल, प्रदेश व जिला स्तर तक खेल रहे हैं। इस गांव के खिलाड़ी रमेश गुलिया ओलंपिक तक देश के लिए कुश्ती लड़ चुका है। जिस गांव में इतनी युवा उपलब्धि है, वहां सरकार ने एक साल पहले ठेका खोल दिया। गांव के मुख्य चौराहे पर ठेका होने के कारण नशा धीरे-धीरे बढ़ता गया और उससे युवाओं का भविष्य प्रभावित होता दिखने लगा तो गांव में शराब बंदी की योजना बनाई गई। महिला सरपंच शकुंतला राठी की अगुवाई में शराब बंदी के लिए पूरा गांव खड़ा हुआ और ठेका बंद कराने के लिए आवेदन कर दिया गया। वहीं पंचायत ने कसम खाई कि युवाओं को नशे की लत से बचाया जाएगा। गांव में भले ही शराब का ठेका अभी बंद नहीं हुआ हो, लेकिन पंचायत के फैसले का असर पहले ही दिखने लगा है। वहां ठेके पर किसी को देख लिया जाता है तो उसे गांव की शांति व अपने भविष्य को बेहतर करने की बात कहकर समझाया जाता है। गांव के लोगों को इंतजार है कि शराब ठेका बंद हो जाएगा तो उसके बाद हालात ओर बेहतर होंगे।
--
गांव में युवाओं को नशे से दूर रखना है तो यहां से ठेका बंद कराना होगा। क्योंकि हमारा गांव खिलाड़ियों के नाम से जाना जाता है और जब युवाओं को नशे की लत लग जाती है तो वह खेल नही पाता है। इसलिए युवा रास्ता नहीं भटके और वह खेलों में अपना भविष्य बनाए। इसके अलावा ठेका गांव के मेन चौराहे पर खुला है, जहां से महिलाएं व लड़कियां निकलती है। उस ठेके पर शराब पीकर खड़े रहने वाले टिप्पणी करते है तो उससे लड़ाई-झगड़े बढ़ते है। इस कारण गांव में ठेका बंद कराने की मांग सरकार से की गई है और इस ठेके को गांव में नहीं रखने दिया जाएगा।
विज्ञापन
-शकुंतला राठी, सरपंच
विज्ञापन
सोनीपत। पुरखास एक ऐसा गांव, जिसे खिलाड़ियों के गांव के नाम से जाना जाता है। वहां ओलंपियन से लेकर जिला स्तर के 1300 से ज्यादा खिलाड़ियों की फौज है। लाभ के लिए सरकार की ओर से खोले गए ठेके ने युवाओं को नशे की जद में लेना शुरू कर दिया। गांव के लोगों को युवाओं का भविष्य खराब होता देख ग्रामीणों ने एकजुट होकर शराब बंदी का बीड़ा उठाया। महिला सरपंच की अगुवाई में शराब का ठेका बंद कराने के लिए आवेदन किया गया, जिसे मान लिया गया है। अब गांव से ठेका हटना अभी बाकी है। वहीं पंचायत ने कसम खाई है कि युवाओं को नशे के चंगुल में नहीं फंसने दिया जाएगा।
गन्नौर तहसील में पड़ने वाले पुरखास गांव की दुनिया में एक अलग पहचान है और यह पहचान वहां के खिलाड़ियों के कारण है। पुरखास गांव की आबादी लगभग 18 हजार है और वहां लगभग 1350 घर है। इन सभी घरों में कोई न कोई खिलाड़ी है और जहां पहले केवल कुश्ती में सबसे ज्यादा गांव के युवा आते थे। वहीं अब कबड्डी व एथलेटिक्स के खेल में भी युवा आगे बढ़ रहे है। गांव में खेलों को किस तरह बढ़ावा दिया जाता है, उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां लगभग 200 खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेर चुके है तो अन्य खिलाड़ी नेशनल, प्रदेश व जिला स्तर तक खेल रहे हैं। इस गांव के खिलाड़ी रमेश गुलिया ओलंपिक तक देश के लिए कुश्ती लड़ चुका है। जिस गांव में इतनी युवा उपलब्धि है, वहां सरकार ने एक साल पहले ठेका खोल दिया। गांव के मुख्य चौराहे पर ठेका होने के कारण नशा धीरे-धीरे बढ़ता गया और उससे युवाओं का भविष्य प्रभावित होता दिखने लगा तो गांव में शराब बंदी की योजना बनाई गई। महिला सरपंच शकुंतला राठी की अगुवाई में शराब बंदी के लिए पूरा गांव खड़ा हुआ और ठेका बंद कराने के लिए आवेदन कर दिया गया। वहीं पंचायत ने कसम खाई कि युवाओं को नशे की लत से बचाया जाएगा। गांव में भले ही शराब का ठेका अभी बंद नहीं हुआ हो, लेकिन पंचायत के फैसले का असर पहले ही दिखने लगा है। वहां ठेके पर किसी को देख लिया जाता है तो उसे गांव की शांति व अपने भविष्य को बेहतर करने की बात कहकर समझाया जाता है। गांव के लोगों को इंतजार है कि शराब ठेका बंद हो जाएगा तो उसके बाद हालात ओर बेहतर होंगे।
विज्ञापन
--
गांव में युवाओं को नशे से दूर रखना है तो यहां से ठेका बंद कराना होगा। क्योंकि हमारा गांव खिलाड़ियों के नाम से जाना जाता है और जब युवाओं को नशे की लत लग जाती है तो वह खेल नही पाता है। इसलिए युवा रास्ता नहीं भटके और वह खेलों में अपना भविष्य बनाए। इसके अलावा ठेका गांव के मेन चौराहे पर खुला है, जहां से महिलाएं व लड़कियां निकलती है। उस ठेके पर शराब पीकर खड़े रहने वाले टिप्पणी करते है तो उससे लड़ाई-झगड़े बढ़ते है। इस कारण गांव में ठेका बंद कराने की मांग सरकार से की गई है और इस ठेके को गांव में नहीं रखने दिया जाएगा।
विज्ञापन
-शकुंतला राठी, सरपंच