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निगम के अफसरों का सफेद झूठ, गोशाला 70 प्रतिशत बनने की बात कह रहे, वहां चारदीवारी तक नहीं
Updated Sat, 19 Aug 2017 12:52 AM IST
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फाइलों में बना 70 फीसदी गो शाला, जमीन पर चारदीवारी तक नहीं
सोनीपत। सरकार से लेकर शहरी स्थानीय निकाय मंत्री और डीसी तक जिले को स्ट्रे कैटल फ्री बनाने के लिए खूब जोर लगा रहे हैं, लेकिन नगर निगम के अधिकारी उनके आदेशों को हवा में उड़ा रहे हैं। क्योंकि जिस गो शाला के बनने के बाद जिले को स्ट्रे कैटल फ्री बनाया जा सकता है, उस गो शाला में चार महीने में केवल नींव भरी गई है और चारा डालने के लिए जगह पक्की बनाई गई है। वहीं अपनी कमी छिपाने के लिए निगम के अफसर सफेद झूठ बोलने से नहीं चूक रहे हैं और गो शाला का निर्माण 70 प्रतिशत तक होने का दावा कर रहे हैं। लेकिन कुमासपुर में जहां गो शाला को बनाया जा रहा है, वहां जमीनी स्तर पर अभी तक हुआ काम ही निगम अफसरों की पोल खोल रहा है।
सरकार ने स्टेर कैटल फ्री प्रदेश करने के लिए अभियान शुरू किया और उसके तहत ही सभी जिलों के अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी किए गए। जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में गो शालाएं होने के कारण लावारिस पशुओं को उनमें छोड़ा जाने लगा तो गांवों में पशुबाड़े भी बनवाए जा रहे हैं। लेकिन अधिकारियों के सामने शहर के लावारिस पशुओं को रखने की समस्या खड़ी हो गई। इसको देखते हुए ही मंत्री कविता जैन व डीसी केएम पांडुरंग ने खुद रुचि लेते हुए कुमासपुर में गो शाला का निर्माण कराने का फैसला लिया और नगर निगम को वहां गो शाला बनाने के लिए कहा गया। उस गो शाला को जल्द से जल्द बनाने के लिए कहा गया। इसके लिए ही नगर निगम ने चार महीने पहले 18 एकड़ में गो शाला बनाने के लिए टेंडर छोड़ दिया। यह गो शाला ढाई करोड़ रुपये की लागत से बनाई जानी है, जिसमें दो शेड बनाई जाएगी और उसमें 2 हजार से ज्यादा पशु रखे जा सकते है। मंत्री और डीसी लगातार नगर निगम अधिकारियों को जल्द गो शाला निर्माण के आदेश जारी करते रहे, लेकिन कुमासपुर में गो शाला निर्माण जमीनी स्तर पर अभी 20 प्रतिशत ही हुआ है। वहां की चारदीवारी तक नहीं हुई है, बल्कि उसके लिए केवल नींव भरी गई है और पशुओं को चारा खिलाने के लिए जगह तैयार की गई है। ऐसे हालात में खुद अंदाजा लगाया जा सकता है कि निर्माण कार्य किस तरह से किया जा रहा है।
निगम के लिए पड़ गया था मजदूरों का अकाल
कुमासपुर में बनाई जा रही गो शाला का पहले निर्माण कार्य धीमा होने का तर्क भी निगम के अधिकारी बड़ा अजीब देते है। निगम अधिकारी कहते है कि जब गो शाला का काम शुरू कराया गया तो वहां से काम शुरू होते ही मजदूर चले गए। उसके बाद निर्माण कार्य के लिए मजदूर नहीं मिल रहे थे। अब वहां लगभग 80 मजदूर निर्माण कार्य में लगे हुए हैं और वहां काम तेजी से चल रहा है। इस कारण जल्द ही गो शाला का काम पूरा हो जाएगा।
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निगम अफसरों का 70 प्रतिशत काम होने का दावा
गो शाला का निर्माण कार्य अभी भले ही न के बराबर हुआ हो, लेकिन नगर निगम के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि वहां 70 प्रतिशत निर्माण कार्य हो चुका है। यहां तक कहा जा रहा है कि सितंबर में यह गो शाला बनकर तैयार हो जाएगी। इस तरह निगम अधिकारी अपनी लापरवाही को छुपाने के लिए सफेद झूठ बोल रहे हैं, क्योंकि उनकी इस लापरवाही के कारण ही जिले को कैटल फ्री नहीं बनाया जा रहा है। यह हालात उस समय है जब मंत्री कविता जैन और डीसी केएम पांडुरंग खुद रुचि लेकर गो शाला जल्द बनाने की बात कह चुके हैं।
वर्जन
गो शाला का निर्माण कार्य शुरू होने पर मजदूर भाग जाने पर कुछ परेशानी आई थी। लेकिन अब वहां 80 से ज्यादा मजदूर काम कर रहे हैं और 70 प्रतिशत तक काम हो चुका है। गो शाला का निर्माण जल्द पूरा हो जाएगा और उसको इस्तेमाल करना शुरू कर दिया जाएगा।
- राधेश्याम शर्मा, एक्सईएन नगर निगम
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सोनीपत। सरकार से लेकर शहरी स्थानीय निकाय मंत्री और डीसी तक जिले को स्ट्रे कैटल फ्री बनाने के लिए खूब जोर लगा रहे हैं, लेकिन नगर निगम के अधिकारी उनके आदेशों को हवा में उड़ा रहे हैं। क्योंकि जिस गो शाला के बनने के बाद जिले को स्ट्रे कैटल फ्री बनाया जा सकता है, उस गो शाला में चार महीने में केवल नींव भरी गई है और चारा डालने के लिए जगह पक्की बनाई गई है। वहीं अपनी कमी छिपाने के लिए निगम के अफसर सफेद झूठ बोलने से नहीं चूक रहे हैं और गो शाला का निर्माण 70 प्रतिशत तक होने का दावा कर रहे हैं। लेकिन कुमासपुर में जहां गो शाला को बनाया जा रहा है, वहां जमीनी स्तर पर अभी तक हुआ काम ही निगम अफसरों की पोल खोल रहा है।
सरकार ने स्टेर कैटल फ्री प्रदेश करने के लिए अभियान शुरू किया और उसके तहत ही सभी जिलों के अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी किए गए। जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में गो शालाएं होने के कारण लावारिस पशुओं को उनमें छोड़ा जाने लगा तो गांवों में पशुबाड़े भी बनवाए जा रहे हैं। लेकिन अधिकारियों के सामने शहर के लावारिस पशुओं को रखने की समस्या खड़ी हो गई। इसको देखते हुए ही मंत्री कविता जैन व डीसी केएम पांडुरंग ने खुद रुचि लेते हुए कुमासपुर में गो शाला का निर्माण कराने का फैसला लिया और नगर निगम को वहां गो शाला बनाने के लिए कहा गया। उस गो शाला को जल्द से जल्द बनाने के लिए कहा गया। इसके लिए ही नगर निगम ने चार महीने पहले 18 एकड़ में गो शाला बनाने के लिए टेंडर छोड़ दिया। यह गो शाला ढाई करोड़ रुपये की लागत से बनाई जानी है, जिसमें दो शेड बनाई जाएगी और उसमें 2 हजार से ज्यादा पशु रखे जा सकते है। मंत्री और डीसी लगातार नगर निगम अधिकारियों को जल्द गो शाला निर्माण के आदेश जारी करते रहे, लेकिन कुमासपुर में गो शाला निर्माण जमीनी स्तर पर अभी 20 प्रतिशत ही हुआ है। वहां की चारदीवारी तक नहीं हुई है, बल्कि उसके लिए केवल नींव भरी गई है और पशुओं को चारा खिलाने के लिए जगह तैयार की गई है। ऐसे हालात में खुद अंदाजा लगाया जा सकता है कि निर्माण कार्य किस तरह से किया जा रहा है।
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निगम के लिए पड़ गया था मजदूरों का अकाल
कुमासपुर में बनाई जा रही गो शाला का पहले निर्माण कार्य धीमा होने का तर्क भी निगम के अधिकारी बड़ा अजीब देते है। निगम अधिकारी कहते है कि जब गो शाला का काम शुरू कराया गया तो वहां से काम शुरू होते ही मजदूर चले गए। उसके बाद निर्माण कार्य के लिए मजदूर नहीं मिल रहे थे। अब वहां लगभग 80 मजदूर निर्माण कार्य में लगे हुए हैं और वहां काम तेजी से चल रहा है। इस कारण जल्द ही गो शाला का काम पूरा हो जाएगा।
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निगम अफसरों का 70 प्रतिशत काम होने का दावा
गो शाला का निर्माण कार्य अभी भले ही न के बराबर हुआ हो, लेकिन नगर निगम के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि वहां 70 प्रतिशत निर्माण कार्य हो चुका है। यहां तक कहा जा रहा है कि सितंबर में यह गो शाला बनकर तैयार हो जाएगी। इस तरह निगम अधिकारी अपनी लापरवाही को छुपाने के लिए सफेद झूठ बोल रहे हैं, क्योंकि उनकी इस लापरवाही के कारण ही जिले को कैटल फ्री नहीं बनाया जा रहा है। यह हालात उस समय है जब मंत्री कविता जैन और डीसी केएम पांडुरंग खुद रुचि लेकर गो शाला जल्द बनाने की बात कह चुके हैं।
वर्जन
गो शाला का निर्माण कार्य शुरू होने पर मजदूर भाग जाने पर कुछ परेशानी आई थी। लेकिन अब वहां 80 से ज्यादा मजदूर काम कर रहे हैं और 70 प्रतिशत तक काम हो चुका है। गो शाला का निर्माण जल्द पूरा हो जाएगा और उसको इस्तेमाल करना शुरू कर दिया जाएगा।
- राधेश्याम शर्मा, एक्सईएन नगर निगम