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गांवों के ट्यूबवैलों का नगर निगम को 7 लाख का बिल भेजा, बिजली व नगर निगम के अधिकारी आमने-सामने
Updated Tue, 20 Feb 2018 01:13 AM IST
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गांवों के ट्यूबवेलों का नगर निगम को 7 लाख का बिल भेजा, बिजली व नगर निगम के अधिकारी आमने-सामने
जुलाई 2015 में नगर निगम में शामिल किए गए थे 26 गांव, इससे पहले का बिल भरने से निगम कर रहा इंकार, गांवों में पेयजल की सप्लाई को लगे हैं ट्यूबवैल
बिजली निगम के एसई ने कहा कि जिसके पास होगी प्रॉपर्टी, उसको जमा कराना होगा पुराना व नया दोनों बिल
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। नगर निगम में शामिल किए गए 26 गांव अधिकारियों के लिए परेशानी बने हुए हैं। जहां इन गांवों को निगम से बाहर करने के लिए अधिकारियों के खिलाफ रोजाना हंगामा हो रहा है। वहीं अब इन गांवों में पानी की सप्लाई के लिए लगे ट्यूबवेलों ने निगम अधिकारियों को परेशान कर दिया है। गांवों में लगे ट्यूबवेलों का लगभग 7 लाख रुपये का बिजली बिल नगर निगम को भेजा गया है, जिसमें गांवों के नगर निगम में शामिल होने से पहले का बिल भी बकाया है। इस कारण ही निगम अधिकारियों ने जुलाई 2015 से पहले का बकाया बिल भरने से इंकार कर दिया है और इसको लेकर नगर निगम व बिजली निगम के अधिकारी आमने-सामने आ गए है।
सोनीपत नगर परिषद को जुलाई 2015 में नगर निगम का दर्जा दिया गया था। जिसके बाद गांवों के खाते में जमा 150 करोड़ से ज्यादा रुपया व पंचायत की काफी जमीन नगर निगम के पास आ गई थी। जिन गांवों को नगर निगम में शामिल किया गया है, उनमें पानी की सप्लाई करने के लिए पंचायती ट्यूबवेल लगवाए गए थे। उन ट्यूबवैलों को पंचायत ऑपरेट करती थी और उनका बिल भी पंचायत की ओर से जमा किया जाता था। जबकि ऐसे भी गांव शामिल है, जिनमें लगे ट्यूबवेलों का जुलाई 2015 से पहले का काफी बिल बकाया था। उस बकाया बिल के साथ ही गांव नगर निगम में आने के बाद का बिजली बिल भी जोड़कर लगभग सात लाख रुपये का बिल नगर निगम को भेज दिया। यह बिल देखकर नगर निगम अधिकारियों के होश उड़ गए और उन्होंने जुलाई 15 से पहले का बकाया बिल देने से इंकार कर दिया। नगर निगम के अधिकारियों ने बिजली निगम से कह दिया कि उनके पास गांव जुलाई 15 से आए हैं और उससे पहले का बिल वह नहीं दे सकते हैं। इस तरह दो विभागों के बीच मामला खिंचता दिख रहा है।
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पंचायत हो चुकी भंग, वहां भी जमा करने वाला कोई नहीं
जिन 26 गांवों को नगर निगम में शामिल किया गया था, उनकी पंचायत जुलाई 15 में भंग हो चुकी है। इस कारण वहां कोई जन प्रतिनिधि नहीं है और पंचायतों के खाते का रुपया भी नगर निगम के पास चला गया है। इस कारण वहां भी जुलाई 15 से पहले का बकाया बिल जमा करने वाला कोई नहीं है। इस तरह बिजली निगम ने नगर निगम से वह बकाया बिल वसूलने की तैयारी कर रखी है।
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नगर निगम को ट्यूबवेलों की बिजली के बिल भेजे गए हैं। निगम के अधिकारियों ने यह कहा है कि हम इसकी जांच करा रहे हैं। उनकी ओर से कहा गया है कि वह जुलाई 15 से पहले का बिल नहीं देंगे, क्योंकि नगर निगम में गांव जुलाई 15 से आए हैं। उसके बाद अभी तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया है।
-संदीप सिकरी, एसडीओ मुरथल
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ट्यूबवेलों का जितना भी बिल बकाया है, वह पूरा बिल नगर निगम को देना होगा। हमें उससे कोई मतलब नहीं है कि उनके पास गांव कब से आए हैं। इस समय उस प्रॉपर्टी का मालिक नगर निगम है तो उसको पूरा बिल जमा कराना होगा।
-वीएस मान, एसई
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इसके बारे में अभी दिखवाया जा रहा है, इसलिए अभी ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता है। इसकी पूरी जानकारी करने के बाद ही स्थिति स्पष्ट कर सकेंगे।
-विनोद नेहरा, ईओ नगर निगम
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जुलाई 2015 में नगर निगम में शामिल किए गए थे 26 गांव, इससे पहले का बिल भरने से निगम कर रहा इंकार, गांवों में पेयजल की सप्लाई को लगे हैं ट्यूबवैल
बिजली निगम के एसई ने कहा कि जिसके पास होगी प्रॉपर्टी, उसको जमा कराना होगा पुराना व नया दोनों बिल
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। नगर निगम में शामिल किए गए 26 गांव अधिकारियों के लिए परेशानी बने हुए हैं। जहां इन गांवों को निगम से बाहर करने के लिए अधिकारियों के खिलाफ रोजाना हंगामा हो रहा है। वहीं अब इन गांवों में पानी की सप्लाई के लिए लगे ट्यूबवेलों ने निगम अधिकारियों को परेशान कर दिया है। गांवों में लगे ट्यूबवेलों का लगभग 7 लाख रुपये का बिजली बिल नगर निगम को भेजा गया है, जिसमें गांवों के नगर निगम में शामिल होने से पहले का बिल भी बकाया है। इस कारण ही निगम अधिकारियों ने जुलाई 2015 से पहले का बकाया बिल भरने से इंकार कर दिया है और इसको लेकर नगर निगम व बिजली निगम के अधिकारी आमने-सामने आ गए है।
सोनीपत नगर परिषद को जुलाई 2015 में नगर निगम का दर्जा दिया गया था। जिसके बाद गांवों के खाते में जमा 150 करोड़ से ज्यादा रुपया व पंचायत की काफी जमीन नगर निगम के पास आ गई थी। जिन गांवों को नगर निगम में शामिल किया गया है, उनमें पानी की सप्लाई करने के लिए पंचायती ट्यूबवेल लगवाए गए थे। उन ट्यूबवैलों को पंचायत ऑपरेट करती थी और उनका बिल भी पंचायत की ओर से जमा किया जाता था। जबकि ऐसे भी गांव शामिल है, जिनमें लगे ट्यूबवेलों का जुलाई 2015 से पहले का काफी बिल बकाया था। उस बकाया बिल के साथ ही गांव नगर निगम में आने के बाद का बिजली बिल भी जोड़कर लगभग सात लाख रुपये का बिल नगर निगम को भेज दिया। यह बिल देखकर नगर निगम अधिकारियों के होश उड़ गए और उन्होंने जुलाई 15 से पहले का बकाया बिल देने से इंकार कर दिया। नगर निगम के अधिकारियों ने बिजली निगम से कह दिया कि उनके पास गांव जुलाई 15 से आए हैं और उससे पहले का बिल वह नहीं दे सकते हैं। इस तरह दो विभागों के बीच मामला खिंचता दिख रहा है।
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पंचायत हो चुकी भंग, वहां भी जमा करने वाला कोई नहीं
जिन 26 गांवों को नगर निगम में शामिल किया गया था, उनकी पंचायत जुलाई 15 में भंग हो चुकी है। इस कारण वहां कोई जन प्रतिनिधि नहीं है और पंचायतों के खाते का रुपया भी नगर निगम के पास चला गया है। इस कारण वहां भी जुलाई 15 से पहले का बकाया बिल जमा करने वाला कोई नहीं है। इस तरह बिजली निगम ने नगर निगम से वह बकाया बिल वसूलने की तैयारी कर रखी है।
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नगर निगम को ट्यूबवेलों की बिजली के बिल भेजे गए हैं। निगम के अधिकारियों ने यह कहा है कि हम इसकी जांच करा रहे हैं। उनकी ओर से कहा गया है कि वह जुलाई 15 से पहले का बिल नहीं देंगे, क्योंकि नगर निगम में गांव जुलाई 15 से आए हैं। उसके बाद अभी तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया है।
-संदीप सिकरी, एसडीओ मुरथल
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ट्यूबवेलों का जितना भी बिल बकाया है, वह पूरा बिल नगर निगम को देना होगा। हमें उससे कोई मतलब नहीं है कि उनके पास गांव कब से आए हैं। इस समय उस प्रॉपर्टी का मालिक नगर निगम है तो उसको पूरा बिल जमा कराना होगा।
-वीएस मान, एसई
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इसके बारे में अभी दिखवाया जा रहा है, इसलिए अभी ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता है। इसकी पूरी जानकारी करने के बाद ही स्थिति स्पष्ट कर सकेंगे।
-विनोद नेहरा, ईओ नगर निगम