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अब प्रमाण पत्र खोने की नो टेंशन, घर बैठे कर सकेंगे डाउनलोड
Updated Sun, 03 Dec 2017 01:18 AM IST
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अब प्रमाण पत्र खोने की नो टेंशन, घर बैठे कर सकेंगे डाउनलोड
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि, मुरथल के विद्यार्थियों के प्रमाण पत्रों को फिर से सत्यापन कराने के लिए अब विश्वविद्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। विद्यार्थी खोए हुए प्रमाण पत्र को घर बैठे डाउनलोड कर सकेंगे। विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय अकादमिक डिपॉजिटरी (एनएडी) प्रकोष्ठ स्थापित करने के लिए सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। विश्वविद्यालय ने डिजिटल इंडिया की तरफ एक कदम और बढ़ाया है।
कुलपति प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत ने कहा कि अकादमिक प्रमाण पत्रों की डिजिटल डिपॉजिटरी बनाना तथा इसका रख-रखाव एक महत्वपूर्ण तथा जिम्मेवारी का कार्य है। दस्तावेजों के डिजिटल होने से भावी नियोक्ताओं तथा शैक्षणिक संस्थानों को विद्यार्थियों के अकादमिक प्रमाण पत्रों की सत्यापन प्रक्रिया आसानी होगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी की अंक तालिका गुम हो जाने पर उसे विवि के चक्कर लगाने पड़ते थे। इस एमओयू के बाद विद्यार्थी अपनी आईडी से स्वयं की अंक तालिका विश्व के किसी भी क्षेत्र से बैठकर डाउनलोड कर सकेंगे। इसके लिए विद्यार्थियों को कोई शुल्क भी नहीं देना पड़ेगा। इससे विद्यार्थी के समय और पैसों दोनों की बचत होगी।
कुलपति ने कहा कि एनएडी शैक्षणिक दस्तावेजों का एक ऑनलाइन स्टोर है, जहां शैक्षणिक संस्थान द्वारा डिग्री, डिप्लोमा, प्रमाण पत्र तथा मार्क-शीट्स को डिजिटल प्रारूप में रखा जाता है। सहमति पत्र पर विवि की तरफ से कुलपति प्रो. अनायत ने तथा डिजिटल सेंट्रल डिपाजिटरी सर्विसेज लिमिटेड की तरफ से मुकेश चौहान ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. एसके गर्ग, परीक्षा नियत्रंक डॉ. एमएस धनखड़, कुलपति के सचिव डॉ. अनिल खुराना, ईडीपी हैड डॉ. योगेंद्र शर्मा, प्रोग्रामर अमित दहिया और एएलओ विनीत कुमार मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि, मुरथल के विद्यार्थियों के प्रमाण पत्रों को फिर से सत्यापन कराने के लिए अब विश्वविद्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। विद्यार्थी खोए हुए प्रमाण पत्र को घर बैठे डाउनलोड कर सकेंगे। विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय अकादमिक डिपॉजिटरी (एनएडी) प्रकोष्ठ स्थापित करने के लिए सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। विश्वविद्यालय ने डिजिटल इंडिया की तरफ एक कदम और बढ़ाया है।
कुलपति प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत ने कहा कि अकादमिक प्रमाण पत्रों की डिजिटल डिपॉजिटरी बनाना तथा इसका रख-रखाव एक महत्वपूर्ण तथा जिम्मेवारी का कार्य है। दस्तावेजों के डिजिटल होने से भावी नियोक्ताओं तथा शैक्षणिक संस्थानों को विद्यार्थियों के अकादमिक प्रमाण पत्रों की सत्यापन प्रक्रिया आसानी होगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी की अंक तालिका गुम हो जाने पर उसे विवि के चक्कर लगाने पड़ते थे। इस एमओयू के बाद विद्यार्थी अपनी आईडी से स्वयं की अंक तालिका विश्व के किसी भी क्षेत्र से बैठकर डाउनलोड कर सकेंगे। इसके लिए विद्यार्थियों को कोई शुल्क भी नहीं देना पड़ेगा। इससे विद्यार्थी के समय और पैसों दोनों की बचत होगी।
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कुलपति ने कहा कि एनएडी शैक्षणिक दस्तावेजों का एक ऑनलाइन स्टोर है, जहां शैक्षणिक संस्थान द्वारा डिग्री, डिप्लोमा, प्रमाण पत्र तथा मार्क-शीट्स को डिजिटल प्रारूप में रखा जाता है। सहमति पत्र पर विवि की तरफ से कुलपति प्रो. अनायत ने तथा डिजिटल सेंट्रल डिपाजिटरी सर्विसेज लिमिटेड की तरफ से मुकेश चौहान ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. एसके गर्ग, परीक्षा नियत्रंक डॉ. एमएस धनखड़, कुलपति के सचिव डॉ. अनिल खुराना, ईडीपी हैड डॉ. योगेंद्र शर्मा, प्रोग्रामर अमित दहिया और एएलओ विनीत कुमार मौजूद रहे।
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