{"_id":"593ff0484f1c1b26098b4581","slug":"141497362504-sonipat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोडवेज का चक्का जाम, 22 लाख का नुकसान, 251 कर्मियों का वेतन काटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रोडवेज का चक्का जाम, 22 लाख का नुकसान, 251 कर्मियों का वेतन काटा
Updated Tue, 13 Jun 2017 08:03 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रोडवेज का चक्का जाम, 22 लाख का नुकसान, 251 कर्मियों का वेतन काटा
बसें नहीं चलने से बस अड्डे पर भटकते रहे यात्री, पूछताछ खिड़की पर लगी रही लाइन
सरकार की ओर से प्राइवेट बसों को परमिट देने का कर्मचारियों ने किया विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
रोडवेज बचाओ तालमेल कमेटी के आह्वान पर मंगलवार को जिले में रोडवेज बसों का पूरी तरह से चक्का जाम रहा। इससे सोनीपत से बाहर जाने के लिए यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हड़ताल के चलते यात्रियों को निजी वाहनों में सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं, सरकार द्वारा निजी बसों को परमिट जारी करने के विरोध में कर्मचारियों ने बस अड्डे पर एकत्रित होकर नारेबाजी की और प्राइवेट बसों के परमिट निरस्त करने के साथ ही अन्य मांगों को लेकर धरना दिया। चक्का जाम से करीब 22 लाख रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से रोडवेज अधिकारियों ने 251 कर्मियों की गैर हाजिरी लगाई। इसमें 131 ड्राइवर व 120 कंडक्टर शामिल हैं, जिनका एक दिन का वेतन काटा गया है।
कर्मचारियों ने मांगों को लेकर की नारेबाजी
रोडवेज के कर्मचारी मंगलवार सुबह ही हड़ताल पर चले गए। कर्मचारी बस अड्डे पर धरना देकर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे। कर्मचारियों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह रोडवेज को खत्म करने के लिए प्राइवेट बसों को परमिट दे रही है, जबकि प्राइवेट बसों के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है, जिनमें सरकार के नियमों की खूब धज्जियां भी उड़ाई जाती हैं। कर्मचारियों ने कहा कि प्राइवेट बसों का परमिट रद करने के अलावा उनकी अन्य मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं, उस समय तक वह इस तरह दिन निर्धारित करके आंदोलन करते रहेंगे। वहीं, रोडवेज की हड़ताल के कारण सबसे ज्यादा परेशानी बसों में बाहर जाने वालों को उठानी पड़ी। यात्री बस अड्डे पर जरूर पहुंचे और पूछताछ खिड़की पर जानकारी करके उनको वापस लौटना पड़ा।
ट्रेनों में रही भीड़
रोडवेज कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से बसों का परिचालन नहीं हो पाया। दैनिक यात्रियों को इससे सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ी। दिल्ली, पानीपत व गोहाना की ओर जाने वाले दैनिक यात्रियों को ट्रेन या फिर निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। बसों की हड़ताल के कारण ट्रेनों में अचानक भीड़ बढ़ गई।
विज्ञापन
विरोध के बावजूद चलती रही निजी बसें
रोडवेज कर्मचारी एक तरफ निजी बसों को परमिट दिए जाने का विरोध करते रहे, वहीं दूसरी ओर जिले के कई मार्गों पर निजी बसों में लोग यात्रा करने को मजबूर हुए। उन बसों में बस अड्डे के बाहर से सवारियां बैठाई गईं, लेकिन उनमें भी सभी रूट पर लोग नहीं जा सके। वहीं, लंबे रूटों के लिए अन्य राज्यों की बसें यात्रियों का सहारा बन रही थी। इसका फायदा छोटे वाहन चालकों ने उठाया और यात्रियों ने मनमानी करते हुए ज्यादा किराया वसूला गया।
निजी परमिट रद्द करें, नई बसें बेड़े में शामिल की जाएं
सरकार अभी तक कर्मचारियों के साथ धोखा कर रही है। सरकार से यही मांग है कि निजी बसों के परमिट रद्द किए जाने चाहिए और करीब आठ हजार नई बसें बेड़े में शामिल की जाएं। वर्कशाप में खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरा जाए। वहीं, नॉर्म के अनुसार ही कर्मचारियों की भर्ती की जाए।
-विक्रम सिंह यादव, डिपो प्रधान, रोडवेज कर्मचारी यूनियन (कर्मचारी महासंघ)
प्राइवेट बसों को परमिट न दे सरकार
सरकार से मांग है कि कर्मचारियों के वेतन से भले ही एक हजार रुपये काट ले, लेकिन निजी बसों के परमिट न दे। सरकार की ओर से रोडवेज विभाग को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं कर्मचारियों की स्थायी भर्ती की जानी चाहिए।
-रणबीर सिंह मलिक, डिपो प्रधान, रोडवेज वर्कर यूनियन (सर्व कर्मचारी संघ)
यात्रियों ने बताई परेशानी
पिपली तक जाने को नहीं मिली बस
बस अड्डे पर पिपली जाने के लिए आया, लेकिन बसें न मिलने से परेशानी हुई है। अब निजी वाहनों व ट्रेनों का सहारा लेकर पिपली स्थित वन विभाग के कार्यालय में जाना पड़ेगा।
-रणधीर सिंह, यात्री
बस के बिना कैसे जाएं ससुराल
फाजिलपुर में अपने मायके में परिजनों से मिलने आई थी। अब पानीपत अपनी ससुराल में वापस जा रही हूं, लेकिन बसों की हड़ताल होने से जाने में परेशानी हो रही है।
-ओमपति, यात्री
बस के चक्कर में दिल्ली जाना छूटा
दिल्ली में किसी जरूरी काम से जाना है। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते बसें नहीं चल रही। बस चलने का इंतजार कर रहा हूं, क्योंकि काम बहुत जरूरी है।
-मनोज कुमार, यात्री
बीमार पत्नी को देखने जाना था घर
मुरथल में काम करता हूं। बुलंदशहर में घर है, जहां पत्नी बीमार है। उसको देखने घर जाना था, जिससे उसे डॉक्टर को दिखा सकूं। बस नहीं मिल रही।
-विजय कुमार, यात्री
फोटो 07- बस अड्डे पर धरने पर बैठे कर्मचारी नारेबाजी करते हुए
फोटो 08- सोनीपत बस अड्डे पर चक्का जाम के दौरान खड़ी बसें
फोटो 09- चक्का जाम के कारण परेशान यात्री बस अड्डे से बाहर जाते हुए
फोटो 10- बस अड्डे पर बड़ौत जाने वाली बस के बारे में युवती से जानकारी लेती गीता भवन निवासी रूखसाना
फोटो 11- विक्रम सिंह यादव, डिपो प्रधान, रोडवेज कर्मचारी यूनियन (कर्मचारी महासंघ)
फोटो 12- रणबीर सिंह मलिक, डिपो प्रधान, रोडवेज वर्कर यूनियन (सर्व कर्मचारी संघ)
फोटो 13- रणधीर सिंह, यात्री
फोटो 14- ओमपति, यात्री
फोटो 15- मनोज कुमार, यात्री
फोटो 16- विजय कुमार, यात्री
फोटो 17- रोडवेज कर्मियों की हड़ताल के चलते सोनीपत रेलवे स्टेशन पर लगी यात्रियों की भीड़
विज्ञापन
बसें नहीं चलने से बस अड्डे पर भटकते रहे यात्री, पूछताछ खिड़की पर लगी रही लाइन
सरकार की ओर से प्राइवेट बसों को परमिट देने का कर्मचारियों ने किया विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत।
रोडवेज बचाओ तालमेल कमेटी के आह्वान पर मंगलवार को जिले में रोडवेज बसों का पूरी तरह से चक्का जाम रहा। इससे सोनीपत से बाहर जाने के लिए यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हड़ताल के चलते यात्रियों को निजी वाहनों में सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं, सरकार द्वारा निजी बसों को परमिट जारी करने के विरोध में कर्मचारियों ने बस अड्डे पर एकत्रित होकर नारेबाजी की और प्राइवेट बसों के परमिट निरस्त करने के साथ ही अन्य मांगों को लेकर धरना दिया। चक्का जाम से करीब 22 लाख रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से रोडवेज अधिकारियों ने 251 कर्मियों की गैर हाजिरी लगाई। इसमें 131 ड्राइवर व 120 कंडक्टर शामिल हैं, जिनका एक दिन का वेतन काटा गया है।
कर्मचारियों ने मांगों को लेकर की नारेबाजी
रोडवेज के कर्मचारी मंगलवार सुबह ही हड़ताल पर चले गए। कर्मचारी बस अड्डे पर धरना देकर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे। कर्मचारियों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह रोडवेज को खत्म करने के लिए प्राइवेट बसों को परमिट दे रही है, जबकि प्राइवेट बसों के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है, जिनमें सरकार के नियमों की खूब धज्जियां भी उड़ाई जाती हैं। कर्मचारियों ने कहा कि प्राइवेट बसों का परमिट रद करने के अलावा उनकी अन्य मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं, उस समय तक वह इस तरह दिन निर्धारित करके आंदोलन करते रहेंगे। वहीं, रोडवेज की हड़ताल के कारण सबसे ज्यादा परेशानी बसों में बाहर जाने वालों को उठानी पड़ी। यात्री बस अड्डे पर जरूर पहुंचे और पूछताछ खिड़की पर जानकारी करके उनको वापस लौटना पड़ा।
विज्ञापन
ट्रेनों में रही भीड़
रोडवेज कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से बसों का परिचालन नहीं हो पाया। दैनिक यात्रियों को इससे सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ी। दिल्ली, पानीपत व गोहाना की ओर जाने वाले दैनिक यात्रियों को ट्रेन या फिर निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। बसों की हड़ताल के कारण ट्रेनों में अचानक भीड़ बढ़ गई।
विज्ञापन
विरोध के बावजूद चलती रही निजी बसें
रोडवेज कर्मचारी एक तरफ निजी बसों को परमिट दिए जाने का विरोध करते रहे, वहीं दूसरी ओर जिले के कई मार्गों पर निजी बसों में लोग यात्रा करने को मजबूर हुए। उन बसों में बस अड्डे के बाहर से सवारियां बैठाई गईं, लेकिन उनमें भी सभी रूट पर लोग नहीं जा सके। वहीं, लंबे रूटों के लिए अन्य राज्यों की बसें यात्रियों का सहारा बन रही थी। इसका फायदा छोटे वाहन चालकों ने उठाया और यात्रियों ने मनमानी करते हुए ज्यादा किराया वसूला गया।
निजी परमिट रद्द करें, नई बसें बेड़े में शामिल की जाएं
सरकार अभी तक कर्मचारियों के साथ धोखा कर रही है। सरकार से यही मांग है कि निजी बसों के परमिट रद्द किए जाने चाहिए और करीब आठ हजार नई बसें बेड़े में शामिल की जाएं। वर्कशाप में खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरा जाए। वहीं, नॉर्म के अनुसार ही कर्मचारियों की भर्ती की जाए।
-विक्रम सिंह यादव, डिपो प्रधान, रोडवेज कर्मचारी यूनियन (कर्मचारी महासंघ)
प्राइवेट बसों को परमिट न दे सरकार
सरकार से मांग है कि कर्मचारियों के वेतन से भले ही एक हजार रुपये काट ले, लेकिन निजी बसों के परमिट न दे। सरकार की ओर से रोडवेज विभाग को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं कर्मचारियों की स्थायी भर्ती की जानी चाहिए।
-रणबीर सिंह मलिक, डिपो प्रधान, रोडवेज वर्कर यूनियन (सर्व कर्मचारी संघ)
यात्रियों ने बताई परेशानी
पिपली तक जाने को नहीं मिली बस
बस अड्डे पर पिपली जाने के लिए आया, लेकिन बसें न मिलने से परेशानी हुई है। अब निजी वाहनों व ट्रेनों का सहारा लेकर पिपली स्थित वन विभाग के कार्यालय में जाना पड़ेगा।
-रणधीर सिंह, यात्री
बस के बिना कैसे जाएं ससुराल
फाजिलपुर में अपने मायके में परिजनों से मिलने आई थी। अब पानीपत अपनी ससुराल में वापस जा रही हूं, लेकिन बसों की हड़ताल होने से जाने में परेशानी हो रही है।
-ओमपति, यात्री
बस के चक्कर में दिल्ली जाना छूटा
दिल्ली में किसी जरूरी काम से जाना है। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते बसें नहीं चल रही। बस चलने का इंतजार कर रहा हूं, क्योंकि काम बहुत जरूरी है।
-मनोज कुमार, यात्री
बीमार पत्नी को देखने जाना था घर
मुरथल में काम करता हूं। बुलंदशहर में घर है, जहां पत्नी बीमार है। उसको देखने घर जाना था, जिससे उसे डॉक्टर को दिखा सकूं। बस नहीं मिल रही।
-विजय कुमार, यात्री
फोटो 07- बस अड्डे पर धरने पर बैठे कर्मचारी नारेबाजी करते हुए
फोटो 08- सोनीपत बस अड्डे पर चक्का जाम के दौरान खड़ी बसें
फोटो 09- चक्का जाम के कारण परेशान यात्री बस अड्डे से बाहर जाते हुए
फोटो 10- बस अड्डे पर बड़ौत जाने वाली बस के बारे में युवती से जानकारी लेती गीता भवन निवासी रूखसाना
फोटो 11- विक्रम सिंह यादव, डिपो प्रधान, रोडवेज कर्मचारी यूनियन (कर्मचारी महासंघ)
फोटो 12- रणबीर सिंह मलिक, डिपो प्रधान, रोडवेज वर्कर यूनियन (सर्व कर्मचारी संघ)
फोटो 13- रणधीर सिंह, यात्री
फोटो 14- ओमपति, यात्री
फोटो 15- मनोज कुमार, यात्री
फोटो 16- विजय कुमार, यात्री
फोटो 17- रोडवेज कर्मियों की हड़ताल के चलते सोनीपत रेलवे स्टेशन पर लगी यात्रियों की भीड़