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निगम से 13 गांव बाहर करने के खिलाफ 12 लोग हाईकोर्ट गए तो शहर की सरकार का चुनाव अटका

Wed, 20 Feb 2019 01:11 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 20 Feb 2019 01:11 AM IST
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निगम से 13 गांव बाहर करने के खिलाफ 12 लोग हाईकोर्ट गए तो शहर की सरकार का चुनाव अटका
निगम से 13 गांव बाहर करने के खिलाफ 12 लोग हाईकोर्ट गए तो शहर की सरकार का चुनाव अटका
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अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। नगर निगम से 13 गांवों को बाहर निकालने के बाद कानूनी लड़ाई शुरू हुई तो शहर की सरकार का चुनाव भी लटक गया। क्योंकि निगम से गांवों को बाहर निकालने के बाद जिन 12 लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका डाली है, उस याचिका पर जब तक फैसला नहीं आता है उस समय तक निगम के चुनाव होना नामुमकिन हो गया है। जबकि अब नगर निगम की दोबारा से वार्डबंदी पूरी हो चुकी है और अब चुनाव कराने के लिए हाईकोर्ट में डाले गए केस ने पेंच फंसा दिया है। जिसका असर शहर के विकास पर पड़ रहा है।
नगर निगम जुलाई 2015 में बनने के साथ ही 26 गांवों को इसमें शामिल किया गया था। उसके बाद गांवों के कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि निगम ने गांवों का 157 करोड़ रुपया व 3700 एकड़ पंचायती जमीन को ट्रांसफर कराकर अपने पास रख लिया है। उसके बावजूद गांवों में विकास कार्य नहीं कराए गए तो गांवों में प्रापर्टी टैक्स, बिलों में एमसी टैक्स आदि लगाने शुरू कर दिए। इस कारण गांवों को निगम से बाहर निकालने की मांग की गई थी और इसके लिए आंदोलन शुरू करते हुए नगर निगम विरोध समिति बनाई गई थी। इस नगर निगम विरोध समिति में कुछ गांवों के चंद लोग शामिल थे, जिन्होंने आंदोलन करते हुए सभी जन प्रतिनिधियों व नेताओं से मिलकर ज्ञापन दिया था। वहीं समिति के लोग हरियाणा भवन में सीएम मनोहर लाल से मिले थे और उसके बाद 52 दिन तक शहर के अग्रसेन चौक पर धरना दिया गया था। इस मामले में सांसद रमेश कौशिक के मध्यस्थता करने पर 13 गांवों को निगम से बाहर करने की 2 जून को घोषणा कर दी गई थी, जिसमें अधिसूचना जारी होते ही निगम से 13 गांव बाहर हो गए।
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नगर निगम से बाहर होकर बीच में लटक गए गांव
नगर निगम से मुकीमपुर, दिपालपुर, खेवड़ा, हरसाना, नसीरपुर बांगर को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है। वहीं मुरथल, नांगल खुर्द, कुमासपुर, किशोरा, चौहान जोशी, बहालगढ़, असावरपुर, बैंयापुर गांव की आबादी वाला क्षेत्र बाहर किया गया है, लेकिन इनकी खेती व अन्य कुछ जमीन नगर निगम में रहेगी। इन गांवों को नगर निगम से जरूर बाहर कर दिया गया है, लेकिन इनमें अभी तक पंचायती राज लागू नहीं किया गया है। इस कारण यह गांव भी बीच में लटक गए हैं और इनमें भी विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। इन गांवों में सफाई तक कराने के लिए लोग परेशान हैं और गांवों में गंदगी का अंबार लगा रहता है। गांवों में पंचायती राज जल्दी लागू होता भी नहीं दिख रहा है।
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निगम की वार्डबंदी होने के बावजूद अभी नहीं होंगे चुनाव
नगर निगम से गांव बाहर निकालने के बाद सरकार ने दोबारा से वार्डबंदी शुरू कराई थी, जिससे वार्डबंदी होने पर चुनाव कराए जा सके। अब वार्डबंदी पूरी हो चुकी है और उसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। लेकिन अब वार्डबंदी होने के बाद भी शहर में सरकार के लिए चुनाव नहीं कराए जा सकते हैं, जिसमें हाईकोर्ट में डाले गए केस रोड़ा बन गए हैं। नगर निगम से गांवों को बाहर निकालने के विरोध में कुमासपुर गांव के प्रेम, अजय, जयसिंह, किशोरा के महिपाल, राजेश, कुमासपुर के सतपाल, जगबीर, ओमप्रकाश, प्रेम, चरण सिंह, राजू आदि ने हाईकोर्ट में याचिका डाली है। उसमें कहा गया है कि मुरथल, कुमासपुर, किशोरा, नांगल खुर्द समेत अन्य गांवों को नगर निगम क्षेत्र से गलत बाहर किया गया है। निगम में रहते हुए हर तरह से बेहतर सुविधा मिल रही थी। गांवों को फिर से निगम में शामिल करने की मांग की गई है। इस तरह मामला हाईकोर्ट में जाने के कारण फैसला आने तक चुनाव नहीं कराए जाने की बात अधिकारी कह रहे हैं।

नगर निगम से गांवों को बाहर निकालने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका डाली गई है। यह मामला अब कोर्ट में जाने के कारण चुनाव कराया जाना मुश्किल है, लेकिन इसमें सरकार के स्तर से फैसला लिया जाना है।
-शंभू राठी, ज्वाइंट कमिश्रर नगर निगम
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