{"_id":"5ab2b5eb4f1c1baa758b6acd","slug":"11521661419-sonipat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पाक सेना को धूल चटाने वाले वीर चक्र शहीद मेजर के स्मारक को एनएचएआई ने धूल में मिलाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पाक सेना को धूल चटाने वाले वीर चक्र शहीद मेजर के स्मारक को एनएचएआई ने धूल में मिलाया
Updated Thu, 22 Mar 2018 01:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। विकास के लिए शहीदों और उनके स्मारकोंको अब दरकिनार किया जाने लगा है। साल 1965 पाक सेना को धूल चटाने वाले वीर चक्र शहीद मेजर के स्मारक को एनएचएआई ने धूल में मिला दिया। एनएचएआई ने दिल्ली से चंडीगढ़ नेशनल हाइवे नंबर वन को चौड़ा करने के लिए बीसवां मील में बने शहीद के स्मारक को ही ढहा दिया। यही नहीं, इसकी जानकारी न ही सैनिक बोर्ड को दी और न जिला प्रशासन को। स्मारक गिराए जाने की सूचना मिलते ही शहीद के परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश है।
सरकार और प्रशासन की ओर से बीसवां मील में साल 1966 में वीर चक्र शहीद मेजर सतपाल का स्मारक बनवाया गया था। साथ ही परिजनों को भी सम्मानित किया गया था। इसके बाद से इसका जीर्णोद्धार होता रहता था। हर साल शहीद स्मारक पर ग्रामीण और परिजन शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए आते थे। अब विकास की राह के बीच में शहीद को रोड़ा मानकर नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने स्मारक दूसरी जगह शिफ्ट या बनवाने की बजाय तोड़ डाला। अधिकारियों ने स्मारक की जगह मिट्टी तक डाल दी। शहीद स्मारक गिराए जाने की सूचना मिलते ही परिजनों व ग्रामीणों में रोष है। उनके भाई श्रीओम वर्मा, ग्रामीण प्रधान सुरेंद्र सिंह, मास्टर अतर सिंह, राज प्रधान, जयकंवार, सरदार सिंह, राजबीर, पंडित रामचंद्र, रणबीर सिंह, नारायण सिंह, सूरजभान, रामबीर, धनबीर व राज सिंह ने बताया कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर शहीद के स्मारक को तोड़ दिया गया है। उससे पहले दूसरा स्मारक बनाना तो दूर ग्रामीणों से पूछा भी नहीं गया। श्रीओम ने बताया कि जब उन्होंने सैनिक बोर्ड और प्रशासन से पता किया तो उन्होंने जानकारी होने से मना कर दिया। परिजनों ने बताया कि सरकार के इस रवैये से वह आहत हैं। एक बेटा देश के लिए जान देता है और प्रशासन उस बेटे के स्मारक को ही तोड़ दे रहा। अब वह इसे लेकर राष्ट्रपति, पीएम, सीएम, रक्षा व परिवहन मंत्री से शिकायत करेंगे।
साथियों की जान बचाकर खुद मौत को लगाया था गले
गांव जठेड़ी निवासी वीर चक्र विजेता मेजर सतप्रकाश वर्मा पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में शहीद हो गए थे। मेजर सतप्रकाश वर्मा ने वर्ष 1965 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए थे। मेजर सतप्रकाश वर्मा 3 और 4 सितंबर 1965 की रात को भारतीय सेना की एक कंपनी के कमांडर थे। कंपनी को जम्मू और कश्मीर में संजोई चौकी पर आक्रमण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस चौकी तक पहुंचने के लिए एक पत्थर से बनी ऊंची दीवार को पार करना था। जब भारतीय कंपनी का आक्रमण अस्थायी तौर पर शत्रु द्वारा रोक दिया गया तो उन्होंने अपने रॉकेट लांचर का रुख पत्थर की दीवार व शत्रु के बंकर की ओर मोड़ दिया था। उन्होंने पत्थर की दीवार में दरार कर रास्ता बना दिया था। इसके बाद उन्होंने दुश्मन को उनकी चौकियों से खदेड़ दिया। भारी गोलाबारी के बीच वह बहादुरी से आपने सैनिको के साथ आगे बढ़ते रहे। एक-एक कर दुश्मनों के सभी बंकरों को उन्होंने आगे रहते हुए ध्वस्त कर दिया था। इतने में पाकिस्तान के दो सिपाहियों ने अचानक उन पर हमला बोल दिया था। उन्होंने दोनों को अपनी खुखरी से मौत के घाट उतार दिया था। हालांकि दुश्मनों के हमले में उनके पेट में दो एमएमजी के बुलेट लग गई थी। फिर भी वे अपने जवानों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते रहे। युद्ध के दौरान जब उन्हें यह आभास हुआ था कि सामने मौजूद पाकिस्तानी बंकर को नेस्तानाबूद न किया गया तो कई और साथी जवान घुसपैठियों के चंगुल में फंस सकते हैं, तब उन्होंने अकेले ही उस बंकर को तबाह कर देने का अनूठा साहस दिखाया था। इस युद्ध में वह शहीद हो गए थे। आज उनकी यह वीर गाथा हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह के मौके पर बताई व सुनाई जाती है। यह अलग बात है कि अब बीसवां मील चौक पर बनाए गए उनके स्मारक को तोड़ दिया गया है।
विज्ञापन
हाइवे को चौड़ा करने के लिए स्मारक को तोड़ना गलत है। ऐसा मामला मेरी जानकारी में नहीं है। परिजन प्रशासन से आकर मिले, इस मामले में कार्रवाई की जाएगी। अगर ऐसा हुआ है तो जल्द से जल्द दूसरी जगह स्मारक बनवाया जाएगा और समारोह करके सम्मान दिया जाएगा।
जितेंद्र कुमार, एसडीएम, सोनीपत
विज्ञापन
सोनीपत। विकास के लिए शहीदों और उनके स्मारकोंको अब दरकिनार किया जाने लगा है। साल 1965 पाक सेना को धूल चटाने वाले वीर चक्र शहीद मेजर के स्मारक को एनएचएआई ने धूल में मिला दिया। एनएचएआई ने दिल्ली से चंडीगढ़ नेशनल हाइवे नंबर वन को चौड़ा करने के लिए बीसवां मील में बने शहीद के स्मारक को ही ढहा दिया। यही नहीं, इसकी जानकारी न ही सैनिक बोर्ड को दी और न जिला प्रशासन को। स्मारक गिराए जाने की सूचना मिलते ही शहीद के परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश है।
सरकार और प्रशासन की ओर से बीसवां मील में साल 1966 में वीर चक्र शहीद मेजर सतपाल का स्मारक बनवाया गया था। साथ ही परिजनों को भी सम्मानित किया गया था। इसके बाद से इसका जीर्णोद्धार होता रहता था। हर साल शहीद स्मारक पर ग्रामीण और परिजन शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए आते थे। अब विकास की राह के बीच में शहीद को रोड़ा मानकर नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने स्मारक दूसरी जगह शिफ्ट या बनवाने की बजाय तोड़ डाला। अधिकारियों ने स्मारक की जगह मिट्टी तक डाल दी। शहीद स्मारक गिराए जाने की सूचना मिलते ही परिजनों व ग्रामीणों में रोष है। उनके भाई श्रीओम वर्मा, ग्रामीण प्रधान सुरेंद्र सिंह, मास्टर अतर सिंह, राज प्रधान, जयकंवार, सरदार सिंह, राजबीर, पंडित रामचंद्र, रणबीर सिंह, नारायण सिंह, सूरजभान, रामबीर, धनबीर व राज सिंह ने बताया कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर शहीद के स्मारक को तोड़ दिया गया है। उससे पहले दूसरा स्मारक बनाना तो दूर ग्रामीणों से पूछा भी नहीं गया। श्रीओम ने बताया कि जब उन्होंने सैनिक बोर्ड और प्रशासन से पता किया तो उन्होंने जानकारी होने से मना कर दिया। परिजनों ने बताया कि सरकार के इस रवैये से वह आहत हैं। एक बेटा देश के लिए जान देता है और प्रशासन उस बेटे के स्मारक को ही तोड़ दे रहा। अब वह इसे लेकर राष्ट्रपति, पीएम, सीएम, रक्षा व परिवहन मंत्री से शिकायत करेंगे।
विज्ञापन
साथियों की जान बचाकर खुद मौत को लगाया था गले
गांव जठेड़ी निवासी वीर चक्र विजेता मेजर सतप्रकाश वर्मा पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में शहीद हो गए थे। मेजर सतप्रकाश वर्मा ने वर्ष 1965 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए थे। मेजर सतप्रकाश वर्मा 3 और 4 सितंबर 1965 की रात को भारतीय सेना की एक कंपनी के कमांडर थे। कंपनी को जम्मू और कश्मीर में संजोई चौकी पर आक्रमण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस चौकी तक पहुंचने के लिए एक पत्थर से बनी ऊंची दीवार को पार करना था। जब भारतीय कंपनी का आक्रमण अस्थायी तौर पर शत्रु द्वारा रोक दिया गया तो उन्होंने अपने रॉकेट लांचर का रुख पत्थर की दीवार व शत्रु के बंकर की ओर मोड़ दिया था। उन्होंने पत्थर की दीवार में दरार कर रास्ता बना दिया था। इसके बाद उन्होंने दुश्मन को उनकी चौकियों से खदेड़ दिया। भारी गोलाबारी के बीच वह बहादुरी से आपने सैनिको के साथ आगे बढ़ते रहे। एक-एक कर दुश्मनों के सभी बंकरों को उन्होंने आगे रहते हुए ध्वस्त कर दिया था। इतने में पाकिस्तान के दो सिपाहियों ने अचानक उन पर हमला बोल दिया था। उन्होंने दोनों को अपनी खुखरी से मौत के घाट उतार दिया था। हालांकि दुश्मनों के हमले में उनके पेट में दो एमएमजी के बुलेट लग गई थी। फिर भी वे अपने जवानों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते रहे। युद्ध के दौरान जब उन्हें यह आभास हुआ था कि सामने मौजूद पाकिस्तानी बंकर को नेस्तानाबूद न किया गया तो कई और साथी जवान घुसपैठियों के चंगुल में फंस सकते हैं, तब उन्होंने अकेले ही उस बंकर को तबाह कर देने का अनूठा साहस दिखाया था। इस युद्ध में वह शहीद हो गए थे। आज उनकी यह वीर गाथा हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह के मौके पर बताई व सुनाई जाती है। यह अलग बात है कि अब बीसवां मील चौक पर बनाए गए उनके स्मारक को तोड़ दिया गया है।
विज्ञापन
हाइवे को चौड़ा करने के लिए स्मारक को तोड़ना गलत है। ऐसा मामला मेरी जानकारी में नहीं है। परिजन प्रशासन से आकर मिले, इस मामले में कार्रवाई की जाएगी। अगर ऐसा हुआ है तो जल्द से जल्द दूसरी जगह स्मारक बनवाया जाएगा और समारोह करके सम्मान दिया जाएगा।
जितेंद्र कुमार, एसडीएम, सोनीपत