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तेरा बेटा ठीक नहीं होगा, ताने ने बना दिया ज्ञान को भाला फेंक खिलाड़ी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jan 2022 12:03 AM IST
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Your son will not be well, the taunt made the player throw the spear to knowledge
धनराज भाला फेंकते हुए। - फोटो : Sirsa
ऐलनाबाद। विकलांगता को पीछे छोड़ भुर्टवाला गांव के ज्ञान सिंह ने जब सफलता की इबारत लिखी तो युवाओं के सामने एक मिसाल पेश कर दी। एक पैर में पोलियो होने के बाद भी ज्ञान सिंह ने हार नहीं मानी। विकलांगता को हरा ज्ञान सिंह ने अपनी मेहनत के बूते भाला फेंक में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 8 पदक जीते हैं। ज्ञान सिंह फिलहाल शिक्षा विभाग में लिपिक पद पर कार्यरत है।
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एक फिल्मी सी कहानी की तरह ज्ञान सिंह की इस सफलता के पीछे उनकी परिवार का त्याग और मेहनत भी कम नहीं है। ज्ञान सिंह की इस सफलता के पीछे उनके पिता धनराज का भी कम त्याग नहीं रहा। 8 माह की उम्र में जब ज्ञान को पोलियो हुआ तो मां-बाप उसके भविष्य को लेकर चिंतित हो गए। लेकिन उनके पिता नहीं हार नहीं मानी। उसी समय धनराज ने ठाना की वो अपने बेटे को मन से विकलांग नहीं होने देंगे। आर्थिक तंगी से जूझने के बाद भी धनराज ने अपने तीन बेटों में सबसे छोटे बेटे ज्ञान को हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। संवाद
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तेरा बेटा अब ठीक नहीं होगा, ताने ने बना दिया भाला फेंक खिलाड़ी
धनराज ने बताया कि पैसे की कमी के कारण वह बेटे का सही से उपचार नहीं करवा पाया। समय बीतता गया। ऐसे ही एक दिन सरकार की तरफ से चिकित्सा शिविर लगा। शिविर में बेटे का ऑपरेशन करवाया लेकिन पैर ठीक होने की जगह और ज्यादा खराब हो गया। उसके बाद किसी ने धनराज को ताना दिया कि तेरा बेटा पोलियो से बहुत कमजोर हो गया। यह कभी ठीक नहीं होगा और अब यह बोझ बन गया। बस यही बात धनराज के दिल पर चोट कर गई और उसने यह ठान लिया कि उसका बेटा कभी कमजोर नहीं कहलाएगा। जीवन के उतार चढ़ाव के साथ धनराज बेटे को हिम्मत देते रहे और उसे आगे बढ़ाने में लगे रहे। ज्ञान सिंह का फिलहाल देश के लिए अधिक से अधिक पदक जीतने का लक्ष्य है।
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कोचिंग नहीं मिल पाने का मलाल
कहते हैं गुरु के बिना ज्ञान नहीं। लेकिन इस ज्ञान सिंह कोई गुरु मिली ही नहीं जो उन्हें भाला फेंक कोचिंग का ज्ञान देता। लड़कपन में पहली बार जब फरीदाबाद में सीडब्ल्यूएसएन के खेलों में भाग लिया तो उन पर जेबीटी गिरीराज यादव की नजर पड़ी। उन्होंने ज्ञान को मोटिवेट करते हुए खेलों में पूरी शिद्दत से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। गिरीराज फिलहाल खेल विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। गिरीराज के दिखाए रास्ते पर चलने के बाद ज्ञान स्टेट, नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर गांव और प्रदेश का नाम रोशन कर चुके हैं। ज्ञान को मलाल है कि अगर उन्हें सही से कोचिंग मिल जाए तो वे देश के लिए अधिक से अधिक से मेडल जीत सकते हैं।
(जैसा की ज्ञान सिंह ने संवाददाता को बातचीत में बताया)
ज्ञान सिंह की उपलब्धियों का ब्योरा
स्टेट लेवल गेम्स में जीते पदक
2014 में फरीदाबाद में स्वर्ण पदक जीता
2015 में अंबाला में रजत पदक जीता
2016 में फरीदाबाद में स्वर्ण पदक जीता
राष्ट्रीय स्तरीय खेलों में जीते पदक
2016 में जयपुर में कांस्य पदक जीता
2017 में पंचकूला में कांस्य पदक जीता
2019 में तमिलनाडु में स्वर्ण पदक जीता
2021 में बंगलुरु में कांस्य पदक जीता
2019 में थाईलैंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ओपन चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।
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