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जिसे कोख में मरवाना था, उसी ने बढ़ाया मान
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
Updated Wed, 12 Nov 2014 12:53 PM IST
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कोख में पल रही जिस बेटी को मां दुनिया में आने से पहले ही मार देना चाहती थी, आज उस बेटी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपने परिवार वालों के साथ-साथ हरियाणा का नाम रोशन किया है।
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गांव पन्नीवाला मोरिकां की किरणजीत कौर ने चोटिल होने के बावजूद पलवल में आयोजित नेशनल योगा चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। घर पहुंची इस होनहार बेटी को मां ने भी गले लगा लिया।
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किरणजीत कौर ने सात से नौ नवंबर को पलवल में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में योग में धमाल मचाया। योगाभ्यास करते समय लगी चोट से प्रतियोगिता के दौरान खून बहता रहा,
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लेकिन किरण के मन में समाज के सामने खुद को साबित करने का जज्बा उमड़ रहा था। किरण ने चोटों की परवाह किए बिना प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीता।
किरणजीत कौर गांव के सरकारी स्कूल में नौवीं कक्षा की छात्रा है। छठी कक्षा से उसने पीटीआई नीलम कुमारी के मार्गदर्शन में योगाभ्यास करना शुरू किया था।
धीरे-धीरे उसकी रुचि बढ़ती गई। योग के साथ-साथ उसने 27 अक्टूबर को एनसीईआरटी द्वारा गुड़गांव में आयोजित ड्रामा प्रतियोगिता में नंबर वन का खिताब भी पाया था।
पीटीआई नीलम ने बताया कि किरणजीत हर रोज दो से तीन घंटे योगाभ्यास करती है। उसने प्रतियोगिता में चोट की परवाह किए बिना मेडल जीता, यह काबिलेतारीफ है।
दो बेटियों के बाद नहीं चाहती थी तीसरी
किरणजीत की मौसी जसवीर कौर ने बताया कि किरण की मां लकवाग्रस्त है, जबकि पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। दो बेटियों के बाद उसकी बहन अपनी इस बेटी को जन्म नहीं देना चाहती थी।
उसके दबाव डालने के बाद जन्म दिया। किरणजीत कौर की परवरिश उसने ही की है। इस बेटी ने पूरे परिवार का नाम रोशन किया है।
आईपीएस बनने की तमन्ना
मैनूं जदो पता लगा कि मेरी मां मैनूं कोख विच मार देना चाहुंदी सी, तां बड़ा गुस्सा आया। नेशनल लेबल ते खेड के तमगा जितन मगरों घर आई, तां मां नूं तमगा विखा के केहा तुसी मैनूं मारना चाहुंदे सी, देखो मैं किस मुकाम ते पहुंच गई हां। बेटियां नूं कमजोर नहीं समजीदा। मैं आईपीएस बनना चाहुंदी आ।
- किरणजीत कौर, योगा खिलाड़ी