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दो हजार रुपये का पानी का टैंकर राजस्थान से मंगवा बुझा रहे प्यास
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ऐलनाबाद के ग्रामीण पानी की मांग को लेकर धरने पर बैठे हुए।
- फोटो : Sirsa
ऐलनाबाद। प्रदेश सरकार की ओर से लोगों की सुविधाओं के लिए लंबे-चौड़े दावे किए जाते हैं। चुनावों के समय सरकार इनका प्रचार प्रसार भी करती है कि उसने किस क्षेत्र में लोगों की भलाई के लिए क्या-क्या कार्य किए। ऐसे ही दावे सिरसा क्षेत्र में काम करवाने को लेकर सरकार की तरफ से शायद अबकी बार भी किए जा सकते हैं। लेकिन दावों से इतर राजस्थान की सीमा से सटे ऐलनाबाद के कई गांवों और ढाणियों में आज तक न तो पीने लायक पानी पहुंच पाया है और न ही खेतों में फसलों की सिंचाई के लिए।
दोनों प्रदेश के बार्डर पर बसे कई गांवों के लोग दो हजार रुपये में पानी का टैंकर मंगवा प्यास बुझाने को मजबूर हैं। यह टैंकर भी दो हजार रुपये का तब है जब इसे राजस्थान से मंगवाया जाता है। अगर इसे प्रदेश के ही किसी अन्य हिस्से से मंगवाया जाए तो शायद इससे भी महंगा ही मिले। ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों ने अपनी इस मांग को लेकर कुछ किया नहीं। पानी की मांग को लेकर करीब 135 दिनों से उनका शेरांवाली भाखड़ा नहर व घग्गर नदी की फ्लड़ी नहर के किनारों पर गांव मिठनपुरा से आगे अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है। अपनी इस समस्या को लेकर ग्रामीणों के लिए उपचुनाव एक उम्मीद बनकर नजर आए हैं। मतदान से पहले ही क्षेत्र के लोगों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने शीघ्र ही धरनास्थल पर बैठक कर चुनाव के लिए अपनी रणनीति तय करने का निर्णय लिया है। राजस्थान की सीमा के साथ सटे गांव मिठनपुरा, किशनपुरा, ढाणी शेरां, कर्मशाना, खारी सुरेरां व 300 से अधिक ढाणियों की बात करें तो ग्रामीण पानी के लिए पिछले कई वर्षों से संघर्षरत हैं। परंतु उनकी यह समस्या आज तक किसी भी सरकार ने नहीं सुलझाई।
135 दिनों से धरना जारी
गांव मिठनपुरा, कर्मशाना, किशनपुरा व ढाणी शेरां व आसपास के ढाणी वासियों को टैंकरों से राजस्थान के गांव केहरवाला, ढंढेला व ढाणी लाल खां से पानी मंगवाते हैं। गांव कर्मशाना के कुलदीप साहू, मिठनपुरा के रामकुमार गोदारा, किशनपुरा के संजय भादू, ढाणी शेरां के रमेश सहारण, शहीद भगत सिंह ट्रस्ट मिठनपुरा के निदेशक कुलदीप मुंदलिया, अनिल जाखड़ व सुरजीत सिहाग ने बताया कि पिछले 135 दिनों से पानी की मांग को लेकर वे शेरांवाली भाखड़ा नहर व घग्गर नदी की फ्लड़ी नहर के किनारों पर गांव मिठनपुरा से आगे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनका यह धरना अभी भी जारी है, परंतु अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
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बैठक कर उपचुनाव के उम्मीदवारों संबंधित लेंगे फैसला
गांव मिठनपुरा के पूर्व सरपंच रामकुमार गोदारा का कहना है शीघ्र ही धरनास्थल पर पानी के लिए संघर्ष कर रही कमेटी की एक बैठक बुलाई जाएगी। उस बैठक में आगे के संघर्ष की रणनीति तैयार की जाएगी। क्षेत्र की इस बड़ी समस्या के समाधान के लिए विधानसभा उपचुनाव में यहां के मतदाताओं का क्या निर्णय होना चाहिए। गांव मिठनपुरा के शहीद भगत सिंह ट्रस्ट के निदेशक कुलदीप मुंदलिया का कहना है लंबे समय से ग्रामीण धरने पर बैठे है लेकिन आज तक सरकार का कोई भी प्रतिनिधि उनकी समस्या का समाधान करने के लिए आगे नहीं आया।
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दोनों प्रदेश के बार्डर पर बसे कई गांवों के लोग दो हजार रुपये में पानी का टैंकर मंगवा प्यास बुझाने को मजबूर हैं। यह टैंकर भी दो हजार रुपये का तब है जब इसे राजस्थान से मंगवाया जाता है। अगर इसे प्रदेश के ही किसी अन्य हिस्से से मंगवाया जाए तो शायद इससे भी महंगा ही मिले। ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों ने अपनी इस मांग को लेकर कुछ किया नहीं। पानी की मांग को लेकर करीब 135 दिनों से उनका शेरांवाली भाखड़ा नहर व घग्गर नदी की फ्लड़ी नहर के किनारों पर गांव मिठनपुरा से आगे अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है। अपनी इस समस्या को लेकर ग्रामीणों के लिए उपचुनाव एक उम्मीद बनकर नजर आए हैं। मतदान से पहले ही क्षेत्र के लोगों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने शीघ्र ही धरनास्थल पर बैठक कर चुनाव के लिए अपनी रणनीति तय करने का निर्णय लिया है। राजस्थान की सीमा के साथ सटे गांव मिठनपुरा, किशनपुरा, ढाणी शेरां, कर्मशाना, खारी सुरेरां व 300 से अधिक ढाणियों की बात करें तो ग्रामीण पानी के लिए पिछले कई वर्षों से संघर्षरत हैं। परंतु उनकी यह समस्या आज तक किसी भी सरकार ने नहीं सुलझाई।
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135 दिनों से धरना जारी
गांव मिठनपुरा, कर्मशाना, किशनपुरा व ढाणी शेरां व आसपास के ढाणी वासियों को टैंकरों से राजस्थान के गांव केहरवाला, ढंढेला व ढाणी लाल खां से पानी मंगवाते हैं। गांव कर्मशाना के कुलदीप साहू, मिठनपुरा के रामकुमार गोदारा, किशनपुरा के संजय भादू, ढाणी शेरां के रमेश सहारण, शहीद भगत सिंह ट्रस्ट मिठनपुरा के निदेशक कुलदीप मुंदलिया, अनिल जाखड़ व सुरजीत सिहाग ने बताया कि पिछले 135 दिनों से पानी की मांग को लेकर वे शेरांवाली भाखड़ा नहर व घग्गर नदी की फ्लड़ी नहर के किनारों पर गांव मिठनपुरा से आगे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनका यह धरना अभी भी जारी है, परंतु अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
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बैठक कर उपचुनाव के उम्मीदवारों संबंधित लेंगे फैसला
गांव मिठनपुरा के पूर्व सरपंच रामकुमार गोदारा का कहना है शीघ्र ही धरनास्थल पर पानी के लिए संघर्ष कर रही कमेटी की एक बैठक बुलाई जाएगी। उस बैठक में आगे के संघर्ष की रणनीति तैयार की जाएगी। क्षेत्र की इस बड़ी समस्या के समाधान के लिए विधानसभा उपचुनाव में यहां के मतदाताओं का क्या निर्णय होना चाहिए। गांव मिठनपुरा के शहीद भगत सिंह ट्रस्ट के निदेशक कुलदीप मुंदलिया का कहना है लंबे समय से ग्रामीण धरने पर बैठे है लेकिन आज तक सरकार का कोई भी प्रतिनिधि उनकी समस्या का समाधान करने के लिए आगे नहीं आया।

ऐलनाबाद में टेंकर से डिग्गी में पानी भरने के लिए लगाई हुई।- फोटो : Sirsa