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सच्चे संत दिखावा नहीं, सेवा और सिमरन करते हैं : संत बीरेंद्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Aug 2025 11:33 PM IST
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True saints do not show off, they do service and Simran: Sant Birendra
डेरा जगमालवाली में आयोजित सत्संग में पहुंची संगत। 
सिरसा। डेरा जगमालवाली में शनिवार और रविवार को मैनेजर साहिब एवं वकील साहिब की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में सत्संग व भंडारे का आयोजन किया गया था। संत बिरेंद्र सिंह ने सत्संग में मैनेजर साहिब और वकील साहिब के जीवन के उदाहरण देकर संगत को बताया कि सच्चे संत किस तरह बिना दिखावे के सेवा और सिमरन करते हैं, लेकिन आज के युग में दिखावे से हटकर नाम के साथ जुड़ना ही सच्चा धर्म है।
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सतगुरु का नाम ही सच्चा सहारा है। दुनिया के मोह से हटकर आत्मा को जानना और भगवान से जुड़ना ही सच्चा जीवन है। उन्होंने कहा कि इंसान के जीवन का अंतिम उद्देश्य आत्मा का उद्धार है, और इसके लिए नाम सुमिरन ही सबसे बड़ा साधन है। नाम ही जीवन का सच्चा सहारा है, बाकी यहां की सब चीजें तो नश्वर हैं।
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संत बिरेंद्र सिंह ने बताया कि जब इंसान दूसरों से तुलना करता है, तो वह भीतर से खोखला हो जाता है। जो अपने हिस्से में संतोष करता है, वह सुखी रहता है। जो दूसरों की अच्छाई देखकर खुश होता है, वही भीतर से विशाल होता है। संत ने कहा कि शिकायतें छोड़कर स्वीकार करना सीखें। यह आत्मिक भक्ति है और यह बाहर के भजन से कहीं बड़ी होती है।
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संत ने कहा कि तेरे घर के अंदर अमृत बरस रहा है पर हमारा मन इस बात को हमें मानने नहीं देता। इस बात को भी मानने नहीं देता कि सतगुरु हमारे अंग-संग है। उन्होंने बताया कि इंसान अक्सर किस्मत को दोष देता है, पर असल में हमारे कर्म ही हमारे भाग्य का निर्माण करते हैं। अगर सोच, बोलचाल, और आचरण सुधरे तो जीवन अपने आप बदलता चला जाता है।


संत विरेंद्र ने कहा कि जब तक इंसान खुद को कुछ समझता रहेगा, वह ईश्वर को नहीं समझ पाएगा। दीनता ही सच्चा पूंजी है। जीवन छोटा है, समय बहुत कीमती है। महाराज जी ने कहा कि पुराने झगड़े, ताने ये सब आत्मा पर धूल की तरह जम जाती हैं। जब हम माफ करके भूल जाते हैं, तो हमारी आत्मा फिर से उजली और हल्की हो जाती है। इसे दुनिया के झमेलों में मत गवाओ। रोज थोड़ा वक्त नाम के लिए निकालो। यही असली अमानत है, बाकी सब मिट्टी है।
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