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Sirsa News: आंगनबाड़ी केंद्राें में नहीं है बिजली और पानी की सुविधा, क ख ग सीखने आए नौनिहाल कैसे सीखे जीवन का ककहरा

Sat, 27 Apr 2024 12:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Sat, 27 Apr 2024 12:16 AM IST
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There is no electricity and water facility in Anganwadi centers, the children came to learn ABC, how to learn the lessons of life.
सिरसा। जिले में इस समय तापमान 39 पार हो चुका है। ऐसे में अगर इस मौसम में दो मिनट भी लाइट चली जाए तो किसी की भी हालत खराब हो जाती है। लेकिन जिले में कुछ आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं जहां न तो सही से पेयजल की सुविधा है और अगर लाइट चली जाए तो इनवर्टर आदि की भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में जिंदगी का पहला पाठ सीखने आए बच्चों के मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है।
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सरकार की ओर से जिले में आंगनबाड़ी केंद्र तो बना दिए लेकिन उनमें मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह से उपलब्ध नहीं करवा पाई हैं। जिले में करीब 1326 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इन केंद्रों में से 1226 पर तो बिजली व्यवस्था तक ही नहीं है। जिसके चलते नौनिहाल गर्मी और पसीने में कखग सीख रहे हैं। इसी के कारण ही केंद्रों में बच्चों की संख्या कम हो रही है। वहीं सबसे बड़ी बात यह है कि उसी कमरे में हेल्परो द्वारा नौनिहालों द्वारा खाना भी बनाया जाता है। जिसके चलते वहां पर गर्मी और भी अधिक बढ़ जाती है।
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किसी भी केंद्र पर पानी की सुविधा ही नहीं
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिले में 1326 आंगनबाड़ी केंद्र बनाए गए हैं। जिसमें से 198 में प्ले स्कूल बनाए गए हैं। इन आंगनबाड़ी केंद्राें में से करीब 1326 में पीने के पानी व अन्य काम करने के लिए भी पानी की सुविधा नहीं है। जिसके चलते बच्चों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व हेल्पर्स को अपने घरों से पानी की बोतलें लेकर आना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर सरकार की ओर से बच्चों को हर घंटे पानी पिलाने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में किसी भी आंगनबाड़ी केंद्र में पीने के पानी तक की सुविधा नहीं है।
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खुले में शौच जाने को मजबूर हैं नौनिहाल
इन आंगनबाड़ी केंद्रों में से अधिकतर किराये के इमारतों में चल रहे हैं। जिनका किराया पिछले 3 साल से विभाग की ओर से नहीं दिया गया है। इन केंद्रों में से आधे से ज्यादा केंद्रों में शौचालय तक की सुविधा नहीं है। जिसके कारण बच्चों को खुले में शौच जाना पड़ता है। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनके लिए भी काफी समस्या आती है। शौच के लिए आस पड़ोस में स्थित घरवालों से मिन्नत करनी पड़ती है। उसके बाद भी विभाग की ओर से कोई सुनवाई नहीं की जा रही है।

कंडम घोषित इमारतों पर भी लग रही कक्षाएं
शहर के खंड शिक्षा अधिकारी में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र को पिछले 3 साल से कंडम घोषित किया गया है। लेकिन फिर भी इस इमारत कक्षाएं लगती हैं। भावदीन में 8 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिसमें से 2 की इमारत ही नहीं है। 3 केंद्रों की हालत खस्ता हो चुकी है, जो कभी भी गिर सकती है। वहीं जिसमें से 2 प्ले स्कूल हैं जिनकी हालत ठीक नहीं है। इमारत खस्ताहाल होने के चलते इनके गिरने का डर बना रहता है।

198 प्ले स्कूलों के लिए दो साल से आए आरओ बने कबाड़
जिले में 198 आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूल बनाया गया है। जिनके लिए दो साल पहले 10 लाख रुपये खर्च कर आरओ सिस्टम लाए गए थे। ये आरओ सिस्टम इन 198 प्ले स्कूलों में लगाए गए। इन केंद्रों पर आरओ सिस्टम पहुंच तो गए लेकिन अधिकांश केंद्रों पर बिजली के कनेक्शन न होने के कारण ये उपयोग में ही नहीं आ पाए। वहीं आधे से ज्यादा केंद्रों पर पानी की टंकियां भी नहीं है। जिन केंद्रों पर टंकियों को इंस्टॉल करवा दिया गया है वो बिना उपयोग के अब कबाड़ बन चुकी हैं।
वर्जन
जिले में 1326 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, इनमें से 198 को प्ले स्कूल बना दिया है। इन प्ले स्कूलों को छोड़कर किसी भी आंगनबाड़ी केंद्र में बिजली की सुविधा नहीं है। वहीं पानी व शौचालयों की सुविधा भी आंगनबाड़ी केंद्रों पर नहीं है। रसोईघर न होने के कारण कक्षाओं के अंदर ही बच्चों के लिए खाना बनाना पड़ता है। जिसके कारण गर्मी और अधिक बढ़ जाती है।

-प्रोमिला रानी, जिला प्रधान, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व हेल्पर्स सिरसा।
जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत बहुत खस्ता है। अक्सर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपनी समस्याएं बताती हैं, जिन्हें हम उच्च अधिकारियों को बताते हैं लेकिन कोई समाधान नहीं होता है। जिले में प्ले स्कूलों को छोड़कर किसी भी केंद्र पर बिजली व शौचालय की सुविधा नहीं है। वहीं गांव भावदीन के सभी केंद्र कंडम हो चुके हैं। जिन्हें जल्द नहीं बदला गया तो कोई भी दुर्घटना हो सकती है।
- मनप्रीत कौर, जिला प्रधान, संयुक्त कर्मचारी संघ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व हेल्पर सिरसा।
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