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Sirsa News: शहर में सफाई सफाई व्यवस्था बेपटरी, हटाए गए सफाई कर्मचारी तीन दिनों से धरने पर
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सफाई न होने पर लगे कचरे के ढ़ेर।
डबवाली। नगर परिषद डबवाली की ओर से सफाई एजेंसी का टेंडर होने के बाद एजेंसी ने सफाई कर्मचारियों को हटाया था। उनके समर्थन में आए डोर टू डोर कचरा उठाने वाली गाड़ी के चालकों को भी दूसरी एजेंसी ने हटा दिया। ऐसे में सभी कर्मचारी तीन दिनों से एसडीएम कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। इस कारण शहर में सफाई व्यवस्था बेपटरी हो गई है।
कर्मचारियों ने सरकार, प्रशासन व ठेकेदार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बुधवार को ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन प्रधान व सीटू नेता सोहन लाल भारुखेड़ा व एटक के प्रधान दारा सिंह ने धरने पर पहुंचकर उन्हें समर्थन देने की घोषणा की। इस मामले में चेयरमेन टेकचंद छाबड़ा ने बताया कि नया टेंडर जारी किया गया है। जल्द ही टेंडर अलॉट हो जाएगा।
नई एजेंसी चाहेगी तो कर्मचारियों को फिर से काम पर रख सकती है। वहीं कर्मचारियों का आरोप है कि ठेकेदार की ओर से उन्हें पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा था। इसके अलावा भविष्य निधि का भी भुगतान निरंतर नहीं किया गया। हरियाणा श्रम विभाग की ओर से निर्धारित वेतन 11,300 व ईपीएफ अलग से है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार ने 7,200 रुपये प्रति माह उनके खातों में डाले, लेकिन ईपीएफ नहीं दिया गया था।
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उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें आठ घंटे ड्यूटी से ज्यादा काम करवाया गया। रविवार को भी छुट्टी देने के बजाय काम करवाया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि ठेकेदार ने 25 मार्च 2025 को उन्हें मौखिक तौर पर सफाई कार्य के लिए लगाया था। तीन जून को कोई नोटिस दिए उन्हें हटा दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने स्वयं ही ठेका रद्द करवा है, ताकि नियमानुसार सैलरी मांगने वाले कर्मचारियों को हटा सके। इस मौके पर ठेका प्रथा सफाई कर्मचारी यूनियन प्रधान सपना, उपप्रधान रविंद्र कुमार, टिश्यू पुहाल, रघुवीर चंद, मोनिका, शुभम, चिनू, सुखचैन, आकाश, रविंद्र कुमार, गुरदीप सिंह सहित अन्य कर्मी मौजूद थे।
-- -- -- -- -- -- शहर में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। डबवाली नगर पालिका से नगर परिषद बनने के बाद भी व्यवस्था नहीं सुधरी है। इसका मुख्य कारण है सफाई कर्मचारियों की कमी। सरकार की ओर से सफाई कर्मचारियों की नई भर्ती करनी चाहिए और ठेका प्रथा को बंद करना चाहिए। इसका फायदा होगा कि जरूरतमंद युवाओं व महिलाओं को रोजगार मिल पाएगा।
- आशा वाल्मीकि, पूर्व प्रधान, नगर पालिका
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शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमा गई है। पहले बाजारों में दिन में सुबह शाम दो बार सफाई होने लगी थी। अब दो दिन में एक बार होने लगी है। छुट्टी के दिन भी कच्चे कर्मचारियों से काम लिया जाता था और मुख्य सड़कों पर सफाई करवाई जाती थी। कच्चे कर्मचारियों के हटाए जाने के बाद बुधवार को सरकारी छुट्टी होने पर शहर में जगह-जगह पर गंदगी देखने को मिल रही है। सड़कों पर लगे कचरे की ढेर से प्लास्टिक व अन्य चीजें हवा के साथ उड़कर दुकान में आती रहती हैं।
- रवि मोंगा, समाजसेवी
-- -- -- -- -- -- -शहर की सफाई व्यवस्था फिलहाल बेपटरी है, जिसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। शहर में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर नगर परिषद की कारगुजारियों को बयां कर रहे हैं। नगर परिषद जल्द से जल्द व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाए और एजेंसी को टेंडर दे। इससे आमजन को राहत मिल सके।
- नरेश सेठी, समाजसेवी
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सफाई एजेंसी का टेंडर रद्द कर दिया गया था। अब नया टेंडर लगाया गया है। जल्द ही नई एजेंसी को वर्कऑर्डर दिया जाएगा। तब तक शहरवासियों को कुछ दिन परेशानी का सामना करना पड़ेगा। नई एजेंसी पर निर्भर रहेगा कि वह इन कर्मचारियों को काम पर रखती है या नहीं।
- टेकचंद छाबड़ा, चेयरमैन, नगर परिषद।
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कर्मचारियों ने सरकार, प्रशासन व ठेकेदार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बुधवार को ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन प्रधान व सीटू नेता सोहन लाल भारुखेड़ा व एटक के प्रधान दारा सिंह ने धरने पर पहुंचकर उन्हें समर्थन देने की घोषणा की। इस मामले में चेयरमेन टेकचंद छाबड़ा ने बताया कि नया टेंडर जारी किया गया है। जल्द ही टेंडर अलॉट हो जाएगा।
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नई एजेंसी चाहेगी तो कर्मचारियों को फिर से काम पर रख सकती है। वहीं कर्मचारियों का आरोप है कि ठेकेदार की ओर से उन्हें पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा था। इसके अलावा भविष्य निधि का भी भुगतान निरंतर नहीं किया गया। हरियाणा श्रम विभाग की ओर से निर्धारित वेतन 11,300 व ईपीएफ अलग से है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार ने 7,200 रुपये प्रति माह उनके खातों में डाले, लेकिन ईपीएफ नहीं दिया गया था।
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उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें आठ घंटे ड्यूटी से ज्यादा काम करवाया गया। रविवार को भी छुट्टी देने के बजाय काम करवाया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि ठेकेदार ने 25 मार्च 2025 को उन्हें मौखिक तौर पर सफाई कार्य के लिए लगाया था। तीन जून को कोई नोटिस दिए उन्हें हटा दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने स्वयं ही ठेका रद्द करवा है, ताकि नियमानुसार सैलरी मांगने वाले कर्मचारियों को हटा सके। इस मौके पर ठेका प्रथा सफाई कर्मचारी यूनियन प्रधान सपना, उपप्रधान रविंद्र कुमार, टिश्यू पुहाल, रघुवीर चंद, मोनिका, शुभम, चिनू, सुखचैन, आकाश, रविंद्र कुमार, गुरदीप सिंह सहित अन्य कर्मी मौजूद थे।
- आशा वाल्मीकि, पूर्व प्रधान, नगर पालिका
शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमा गई है। पहले बाजारों में दिन में सुबह शाम दो बार सफाई होने लगी थी। अब दो दिन में एक बार होने लगी है। छुट्टी के दिन भी कच्चे कर्मचारियों से काम लिया जाता था और मुख्य सड़कों पर सफाई करवाई जाती थी। कच्चे कर्मचारियों के हटाए जाने के बाद बुधवार को सरकारी छुट्टी होने पर शहर में जगह-जगह पर गंदगी देखने को मिल रही है। सड़कों पर लगे कचरे की ढेर से प्लास्टिक व अन्य चीजें हवा के साथ उड़कर दुकान में आती रहती हैं।
- रवि मोंगा, समाजसेवी
- नरेश सेठी, समाजसेवी
सफाई एजेंसी का टेंडर रद्द कर दिया गया था। अब नया टेंडर लगाया गया है। जल्द ही नई एजेंसी को वर्कऑर्डर दिया जाएगा। तब तक शहरवासियों को कुछ दिन परेशानी का सामना करना पड़ेगा। नई एजेंसी पर निर्भर रहेगा कि वह इन कर्मचारियों को काम पर रखती है या नहीं।
- टेकचंद छाबड़ा, चेयरमैन, नगर परिषद।