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Sirsa News: विकास की रफ्तार पर्यावरण पर पड़ रही भारी, सूखने लगे पेड़

Sun, 14 Apr 2024 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Sun, 14 Apr 2024 11:48 PM IST
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The pace of development is taking a toll on the environment, trees are drying up
सिरसा। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए लोगों द्वारा अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ शहर में विकास कार्य भी युद्ध स्तर पर चल रहे हैं। विकास कार्य के नाम पर सड़क निर्माण के साथ सड़क के दोनों ओर के कच्चे एरिया को प्रशासन ने पक्का करना शुरू कर दिया है। इस पक्का करने के चलन में पर्यावरण को बड़े स्तर पर नुकसान हो रहा है। इस कारण सालों पुराने पेड़ों की जड़ों को सीमेंट व इंटरलॉकिंग से जकड़ दिया जाता है। जिसके कारण अब वे पेड़ सूखने लगे है।
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वहीं इस लापरवाही की तरफ प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोई ध्यान इस ओर नहीं दिया जा रहा है। यदि यही हालात रहे तो शहर में बड़े स्तर पर पेड़ नजर नहीं आएंगे। बता दें कि सी ब्लॉक और सिविल अस्पताल के आसपास लगे 50 से ज्यादा पेड़ों के ऊपर सूखने का खतरा मंडरा रहा है। इस एरिया में सफेदे, नीम आदि के पेड़ सालों पहले लगाए थे। 10 मीटर लंबाई के पेड़ आसपास के स्थानीय निवासियों के अलावा राहगीरों को को छांव दे रहे हैं। लेकिन अब चले कार्यों के दौरान इंटरलॉकिंग और सीमेंट से पूरी तरह से चारों ओर से लॉक कर दिए जाने के कारण पेड़ों को नुकसान पहुंच रहा है। हालत यह है कि सिविल अस्पताल के साथ साथ बनी ग्रीन बेल्ट के साथ हालात यह है कि पेड़ सूखने लग गए हैं। जिसकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। पेड़ की जड़ को कंक्रीट से लॉक किए जाने से उसे पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं।
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यह है नियम
नगर परिषद के नियमानुसार पेड़ की जड़ों के चारों ओर एक से डेढ़ फुट जमीन को कच्चा छोड़ा जाएगा। इतना ही नहीं, शहर में लगे पेड़ पौधों को हरा भरा रखने की जिम्मेदारी भी नगर परिषद प्रशासन की है। लेकिन आज तक किसी भी ग्रीन बेल्ट में नगर परिषद की ओर से पानी डलवाने का कार्य नहीं किया जाता है। हालत यह है लघु सचिवालय को जाने वाले मुख्य रोड के दोनों ओर की ग्रीन बेल्ट में कचरा देखने को मिलता है। इसी प्रकार भूमण शाह चौक से सीडीएलयू की ओर जाते है फुटपाथ के साथ पेड़ कम और कचरा ज्यादा नजर आता है।
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शहर में कहीं भी अगर पेड़ों के चारों ओर इंटरलॉकिंग या सीसी डाली हुई है तो सभी को हटाया जाएगा। पर्यावरण को लेकर कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
-अनिल कुमार, एमई, नगर परिषद
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