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शहादत की महान परंपरा पंजाब के इतिहास की शान : स्वामी विज्ञानानंद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 28 Nov 2025 11:34 PM IST
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The great tradition of martyrdom is the pride of Punjab's history: Swami Vigyanananda
सिरसा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से सुलतानपुरिया में संस्थान की साध्वी बहनें व स्वामी
सिरसा। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से सुलतानपुरिया में गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस को समर्पित सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि शहादत की महान परंपरा पंजाब के इतिहास की शान है। पंजाब की धरती अनगिनत कुर्बानियों और शहादतों की गवाह रही है। इस धरती पर धर्म और सत्य की नींव रखने के लिए महापुरुषों को जंजीरों में जकड़ा गया।
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पीड़ित दबे-कुचले लोगों के आंसू पोंछने के लिए उन्हें चीरा गया, रामबियों से उनकी खोपड़ियां काटी गईं। पंजाब का इतिहास ऐसी अनगिनत गाथाओं को अपने सीने में समेटे हुए है। प्रवचनों के दौरान स्वामी ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी वह महान शक्ति हैं, जिन्होंने मानवता की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया।
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गुरु तेग बहादुर का जीवन साहस, मानवता, धार्मिक समानता और न्याय का प्रतीक है। उन्होंने धर्म की रक्षा और मानवाधिकारों के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उनकी शहादत आज भी हमें प्रेरित करती है और हमें एक न्यायपूर्ण, शांतिपूर्ण और समतामूलक समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करती है। जब गुरु तेग बहादुर गुरु गद्दी पर बैठे, उस समय अत्याचारी शासक औरंगजेब का जुलम सिर चढ़कर बोल रहा था।
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इस अत्याचारी और अज्ञानी बादशाह के जीवन का एकमात्र उद्देश्य भारत के लोगों को अपने पैरों तले रुलाना और उन्हें जबरदस्ती इस्लाम में परिवर्तित करना था। इसलिए उसने हिंदुओं पर अत्याचार शुरू कर दिए और मंदिरों और ठाकुर द्वारों को तोड़ना शुरू कर दिया। दिल्ली में, हिंदुओं को यमुना नदी के किनारे अंतिम संस्कार करने पर रोक लगा दी गई।

हिंदुओं को घोड़े और हाथी की सवारी करने से मना किया गया। यह हिंदुओं के धार्मिक रीति-रिवाजों पर उसका सीधा हमला था। उसने हिंदुओं के आत्म-सम्मान को पूरी तरह से नष्ट करने की कोशिश की। इसके पीछे एकमात्र उद्देश्य यह था कि हिंदू राष्ट्र तंग आकर इस्लाम स्वीकार कर ले। इतिहास बताता है कि उस समय कश्मीरी पंडित गुरु तेग बहादुर महाराज के पास शिकायत लेकर गए थे और श्री गुरु तेग बहादुर महाराज जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपनी जान दे दी। धर्म को बहुत कम लोग जानते हैं। गुरु पातशाह ने मानवता को धर्म का ज्ञान कराया। कार्यक्रम के दौरान साध्वी विष्णु अर्चना भारती और साध्वी नेहा भारती ने गुरबानी शबद कीर्तन का गायन किया।
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