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Sirsa News: जिले में बने आठ राजीव गांधी खेल स्टेडियम के हालात खराब, बजट नहीं मिला
Sat, 16 Dec 2023 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 16 Dec 2023 11:21 PM IST
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राजीव गांधी खेल स्टेडियम।
सिरसा। प्रदेश सरकार की अनदेखी के कारण जिले के आठ राजीव गांधी खेल स्टेडियम बदहाली के कगार पर पहुंच चुके हैं। लंबे समय से इन स्टेडियमों की मरम्मत नहीं हो सकी है। जिला खेल विभाग ने जुलाई 2022 में आठ राजीव गांधी खेल स्टेडियमों की मरम्मत एवं रखरखाव के लिए 1.11 करोड़ रुपये का आगणन तैयार कर मुख्यालय भेजा था। बिजली मंत्री रणजीत सिंह ने इनके लिए बजट दिलाने की सिफारिश की थी। इस कारण खेल विभाग के अधिकारी करीब डेढ़ साल से बजट आने का इंतजार कर रहे हैं।
जिले में गांव जमाल, कंवरपुरा, धोलपालियां, सुखचैन, गंगा, नुहियांवाली, गोदिकां और बालासर में बने स्टेडियमों की स्थिति खराब है। खेल नर्सरी चलने के कारण चार खेल स्टेडियम में कुछ व्यवस्था है, जबकि चार में बुरे हालात है। नशे के आदी लोग इन स्टेडियम की खिड़की, दरवाजे, ग्रिल आदि तक उतारकर ले जाते है। जिला खेल अधिकारी कई बार इनका निरीक्षण कर चुके हैं लेकिन कोच और चौकीदार के बिना इनके हालात बदतर होते जा रहे हैं।
15 से 18 साल पहले बने थे स्टेडियम
गांव के युवाओं में खेलों को बढ़ावा देने के लिए स्टेडियम बनाए गए थे। वर्ष 2004 से लेकर 2008 तक हर स्टेडियम 6.5 एकड़ क्षेत्र में बनाया गया है। शुरुआत में इन खेल स्टेडियम का लाभ युवाओं को मिला लेकिन धीरे-धीरे इन खेल स्टेडियम के लिए प्रशासनिक रवैया निराशाजनक रहा है। खासकर, खेल विभाग के मुख्यालय स्तर पर इस ओर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया। कुछ खेलों में शुरू से ही सिरसा जिले का दबदबा रहा है। जिले के गांव संतनगर को हॉकी खिलाड़ियों की नर्सरी कहा जाता है। गांव जोधकां ने भारतीय महिला हॉकी टीम को गोलकीपर के रूप में सविता पूनिया और नेशनल स्तर की फुटबाल खिलाड़ी रेखा दी है। वॉलीबाल में चौटाला, पन्नीवाला मोटा, तरकांवाली ने कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं। भावदीन और डबवाली ने फुटबाल में नेशनल स्तर के कई महिला और पुरुष खिलाड़ी दिए हैं। जूडो, कराटे, तीरंदाजी, हैंडबाल, बैडमिंटन, क्रिकेट में अनेक राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं।
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राजीव गांधी खेल स्टेडियम सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। चार स्टेडियमों में खेल नर्सरी चलने के कारण हालात कुछ ठीक हैं जबकि चार के हालात बेहद खराब हैं। सरकार को 1.11 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाकर भेजा गया था। डेढ़ साल बाद भी बजट नहीं मिल सका है। - शमशेर सिंह, जिला खेल अधिकारी, सिरसा।
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जिले में गांव जमाल, कंवरपुरा, धोलपालियां, सुखचैन, गंगा, नुहियांवाली, गोदिकां और बालासर में बने स्टेडियमों की स्थिति खराब है। खेल नर्सरी चलने के कारण चार खेल स्टेडियम में कुछ व्यवस्था है, जबकि चार में बुरे हालात है। नशे के आदी लोग इन स्टेडियम की खिड़की, दरवाजे, ग्रिल आदि तक उतारकर ले जाते है। जिला खेल अधिकारी कई बार इनका निरीक्षण कर चुके हैं लेकिन कोच और चौकीदार के बिना इनके हालात बदतर होते जा रहे हैं।
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15 से 18 साल पहले बने थे स्टेडियम
गांव के युवाओं में खेलों को बढ़ावा देने के लिए स्टेडियम बनाए गए थे। वर्ष 2004 से लेकर 2008 तक हर स्टेडियम 6.5 एकड़ क्षेत्र में बनाया गया है। शुरुआत में इन खेल स्टेडियम का लाभ युवाओं को मिला लेकिन धीरे-धीरे इन खेल स्टेडियम के लिए प्रशासनिक रवैया निराशाजनक रहा है। खासकर, खेल विभाग के मुख्यालय स्तर पर इस ओर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया। कुछ खेलों में शुरू से ही सिरसा जिले का दबदबा रहा है। जिले के गांव संतनगर को हॉकी खिलाड़ियों की नर्सरी कहा जाता है। गांव जोधकां ने भारतीय महिला हॉकी टीम को गोलकीपर के रूप में सविता पूनिया और नेशनल स्तर की फुटबाल खिलाड़ी रेखा दी है। वॉलीबाल में चौटाला, पन्नीवाला मोटा, तरकांवाली ने कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं। भावदीन और डबवाली ने फुटबाल में नेशनल स्तर के कई महिला और पुरुष खिलाड़ी दिए हैं। जूडो, कराटे, तीरंदाजी, हैंडबाल, बैडमिंटन, क्रिकेट में अनेक राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं।
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राजीव गांधी खेल स्टेडियम सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। चार स्टेडियमों में खेल नर्सरी चलने के कारण हालात कुछ ठीक हैं जबकि चार के हालात बेहद खराब हैं। सरकार को 1.11 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाकर भेजा गया था। डेढ़ साल बाद भी बजट नहीं मिल सका है। - शमशेर सिंह, जिला खेल अधिकारी, सिरसा।