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थाई एप्पल बेर की मिठास ज्यादा, स्वाद सेब जैसा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 12 Dec 2021 10:54 PM IST
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Thai apple plum sweetness, tastes like apple
एग्रो पेज: थाई एप्पल बेर दिखाता किसान परसा राम । - फोटो : Sirsa
चोपटा/सिरसा। किसान के पास जमीन थोड़ी मात्रा में हो और पूरे परिवार का पालन पोषण खेती की आमदनी पर निर्भर हो तो परंपरागत खेती से आमदनी कम होने पर काफी मुश्किल उठानी पड़ती हैं। नहरी पानी की कमी, सेम के कारण जमीन का खारा पानी, बारिश समय पर ना होना, फसलों में विभिन्न प्रकार की बीमारियों व अन्य प्राकृतिक आपदाओं के आने से किसानों को परंपरागत खेती से घाटा होने लगा है। इस घाटे को पूरा करने के लिए किसान खेती के साथ-साथ नई तरकीब सोच कर आमदनी बढ़ाने की कोशिश करता है। गांव बरासरी (सिरसा ) के किसान परसाराम ने अपने भाई सुशील कुमार के साथ मिलकर तीन साल पहले अपने खेत में दो एकड़ में थाई एप्पल बेर और दो एकड़ में अमरूद का बाग लगाकर परंपरागत खेती के साथ आमदनी का दूसरा जरिया खोजा। दो साल बाद थाई एप्पल बेर व अमरूद से करीब 4 लाख रुपये प्रतिवर्ष अतिरिक्त कमाई होने लगी।
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थाई एप्पल बेर और अमरूद स्वास्थ्य के लिए है बेहद गुणकारी
मात्र 10वीं कक्षा तक पढ़े किसान परसा राम पुत्र कुरड़ा राम ने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए खेती के साथ-साथ अन्य कमाई का जरिया खोजना शुरू किया। भूना के पास बैजलपुर गांव में एक किसान के खेत में थाई एप्पल बेर का बाग देखा तथा उनसे प्रेरणा लेकर तीन साल पहले 2 एकड़ भूमि में थाई एप्पल बेर का बाग लगाया। उन्होंने बताया कि उकलाना से थाई एप्पल बेर के पौधे लाकर अपने खेत में लगाए। इसके साथ ही बैजलपुर से अमरूद के पौधे लाकर 2 एकड़ जमीन में लगाए। उन्होंने बताया कि इस बाग में खर्चा कम होता है और मेहनत भी कम करनी पड़ती है। पौधे को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है और पैदावार अच्छी हो जाती है। पहली बार बाग से 4 लाख रुपये के बेर व अमरूद बेचकर कमाई की। उन्होंने बताया कि थाई एप्पल बेर में मिठास ज्यादा होती है और खाने में सेब जैसा स्वाद होता है। यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभप्रद है। उन्होंने बताया कि खेती के साथ-साथ बेर व अमरूद के बाग से कमाई होने से उनके घर की आर्थिक हालत काफी अच्छी हो गई। उन्होंने बताया कि थाई एप्पल बेर साल में दो बार लगते हैं, लेकिन गर्मियों के मौसम में इसके फल खराब होने का अंदेशा ज्यादा रहता है। सर्दियों के मौसम में फलों की पैदावार भी ज्यादा होती है। उन्होंने बताया कि बाग के पौधों की लाइन में खाली पड़ी जमीन में वह मौसमी सब्जियां उगाते हैं। जिनसे उनको अतिरिक्त कमाई मिलती है। बेर का बाग लगाने के बाद किसान परसाराम को आसपास के गांव में अच्छी पहचान मिली। आसपास के गांव के लोग थाई एप्पल बेर के बाग को देखकर उनसे जानकारी लेकर अब बाग लगाने लगे हैं। परसाराम का कहना है कि किसान परंपरागत खेती के साथ जमीन की उपजाऊ शक्ति के अनुसार किन्नू, अमरूद, थाई एप्पल बेर, अंगूर इत्यादि का बाग लगाकर कमाई करके पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
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मंडी दूर होने के कारण यातायात खर्च हो जाता है ज्यादा
किसान परसाराम ने बताया कि उनके गांव के आसपास फलों की मंडी या फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट ना होने के कारण उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है। फलों को बेचने के लिए हिसार, जींद, करनाल या पंजाब में लेकर जाना पड़ता है। जिससे यातायात खर्चा ज्यादा हो जाता है। इनकी मांग है कि नाथूसरी चोपटा में फलों की मंडी या फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट विकसित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी। इसके साथ ही सरकार को फलों की खेती करने के लिए अनुदान या लोन का सरलीकरण किया जाना चाहिए।
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