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Sirsa News: शिक्षिका संगीता की मेहनत रंग लाई, पढ़ाई छोड़ चुकीं लड़कियों को किया प्रेरित
Wed, 30 Aug 2023 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 30 Aug 2023 11:37 PM IST
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संगीता खुराना, अंग्रेजी प्रवक्ता। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खारियां में अंग्रेजी की शिक्षिका संगीता खुराना ने शिक्षा के साथ सामाजिक कार्यों में पूरी लगन के साथ कार्य कर मान सम्मान बढ़ाया है। शिक्षिका की मेहनत रंग लाई और लड़कियों की जिंदगी में शिक्षा का उजाला किया। उनकी बदौलत स्कूल में शिक्षा का माहौल बदला है। बच्चों की पढ़ाई में दिलचस्पी बढ़ी है। यही कारण है कि इस बार पांच सितंबर को राज्य शिक्षक सम्मान से शिक्षिका संगीता खुराना को राज्यपाल सम्मानित करेंगे।
इस स्कूल की शिक्षिका संगीता खुराना ने शिक्षा के साथ कई सामाजिक कार्य किए हैं। वे पिछले दो दशक से बेटी बचाओ व बेटी पढ़ाओ अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पढ़ाई छोड़ चुकी सैकड़ों लड़कियों को फिर से शिक्षा के साथ जोड़ चुकी हैं। इसके अलावा शिक्षिका मतदाता जागरूकता, स्वच्छता अभियान, पोलियो अभियान, रक्तदान, अक्षय उर्जा जैसे कार्यक्रमों में अच्छा नेतृत्व कर रही हैं। उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें ग्राम पंचायत, जिला प्रशासन की ओर से कई बार सम्मानित किया जा चुका है।
शिक्षिका संगीता खुराना ने बताया कि पहले भी अवाॅर्ड के लिए आवेदन किया था। सफलता नहीं मिली। पहली बार जेबीटी के बेस पर आवेदन किया। परिणाम आने से पहले सामाजिक विज्ञान की शिक्षिका बन गई। दूसरी बार आवेदन किया तो उनका प्रमोशन सामाजिक विज्ञान शिक्षक से अंग्रेजी प्रवक्ता के लिए हो गया। अब तीसरी बार में उनको सफलता मिली है।
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जेबीटी कर गांव धोतड़ में मिली पहली ज्वाइनिंग
संगीता खुराना का जन्म रानियां में हुआ है। संगीता का सपना था कि वह पढ़ लिखकर कुछ कर दिखाए। संगीता ने बताया कि दसवीं पास की तो आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए समस्या आ खड़ी हुई। क्योंकि रानियां में 12वीं का कोई स्कूल नहीं था। लड़कों के स्कूल में पढ़ाई करने के लिए परिवार ने अनुमति नहीं दी। इसी दौरान राजकीय व्यावसायिक संस्थान खुल गया। परिवार ने पढ़ाई के साथ सिलाई सीखने के लिए उनका वहां दाखिला करवा दिया। 12वीं में जिले में टॉप किया। इसके बाद परिवार व अध्यापिकाओं ने उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। संगीता ने जेबीटी के साथ ही किसी अध्यापक की सहायता से बीए भी कर ली। 21 नवंबर 1997 में उनका जेबीटी शिक्षक के तौर पर चयन हुआ। उन्हें रानियां के नजदीकी गांव धोतड़ में पहली ज्वाइनिंग मिली।
25 साल के बाद हासिल हुई कामयाबी
शिक्षिका संगीता खुराना बताती हैं कि 25 साल के बाद उन्हें ये कामयाबी हासिल हुई हैं। इसका पूरा श्रेय प्राइमरी अध्यापिका कमला शर्मा और सास कृष्णा खुराना व ससुर भगवान दास खुराना को जाता है। उनके पति रजनीश खुराना मेडिकल लाइन से जुड़े हुए हैं। संगीता खुराना वर्तमान में एजुकेशन में पीएचडी कर रही हैं। वे हिंदी, अंग्रेजी, समाज शास्त्र व एजुकेशन में एमए कर चुकी हैं। संगीता खुराना की सर्विस के 25 वर्षों में परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा। सह शैक्षणिक कार्यक्रमों में भी संगीता व उसकी विद्यार्थियों ने जिला व राज्यस्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाई।
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सिरसा। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खारियां में अंग्रेजी की शिक्षिका संगीता खुराना ने शिक्षा के साथ सामाजिक कार्यों में पूरी लगन के साथ कार्य कर मान सम्मान बढ़ाया है। शिक्षिका की मेहनत रंग लाई और लड़कियों की जिंदगी में शिक्षा का उजाला किया। उनकी बदौलत स्कूल में शिक्षा का माहौल बदला है। बच्चों की पढ़ाई में दिलचस्पी बढ़ी है। यही कारण है कि इस बार पांच सितंबर को राज्य शिक्षक सम्मान से शिक्षिका संगीता खुराना को राज्यपाल सम्मानित करेंगे।
इस स्कूल की शिक्षिका संगीता खुराना ने शिक्षा के साथ कई सामाजिक कार्य किए हैं। वे पिछले दो दशक से बेटी बचाओ व बेटी पढ़ाओ अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पढ़ाई छोड़ चुकी सैकड़ों लड़कियों को फिर से शिक्षा के साथ जोड़ चुकी हैं। इसके अलावा शिक्षिका मतदाता जागरूकता, स्वच्छता अभियान, पोलियो अभियान, रक्तदान, अक्षय उर्जा जैसे कार्यक्रमों में अच्छा नेतृत्व कर रही हैं। उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें ग्राम पंचायत, जिला प्रशासन की ओर से कई बार सम्मानित किया जा चुका है।
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शिक्षिका संगीता खुराना ने बताया कि पहले भी अवाॅर्ड के लिए आवेदन किया था। सफलता नहीं मिली। पहली बार जेबीटी के बेस पर आवेदन किया। परिणाम आने से पहले सामाजिक विज्ञान की शिक्षिका बन गई। दूसरी बार आवेदन किया तो उनका प्रमोशन सामाजिक विज्ञान शिक्षक से अंग्रेजी प्रवक्ता के लिए हो गया। अब तीसरी बार में उनको सफलता मिली है।
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जेबीटी कर गांव धोतड़ में मिली पहली ज्वाइनिंग
संगीता खुराना का जन्म रानियां में हुआ है। संगीता का सपना था कि वह पढ़ लिखकर कुछ कर दिखाए। संगीता ने बताया कि दसवीं पास की तो आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए समस्या आ खड़ी हुई। क्योंकि रानियां में 12वीं का कोई स्कूल नहीं था। लड़कों के स्कूल में पढ़ाई करने के लिए परिवार ने अनुमति नहीं दी। इसी दौरान राजकीय व्यावसायिक संस्थान खुल गया। परिवार ने पढ़ाई के साथ सिलाई सीखने के लिए उनका वहां दाखिला करवा दिया। 12वीं में जिले में टॉप किया। इसके बाद परिवार व अध्यापिकाओं ने उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। संगीता ने जेबीटी के साथ ही किसी अध्यापक की सहायता से बीए भी कर ली। 21 नवंबर 1997 में उनका जेबीटी शिक्षक के तौर पर चयन हुआ। उन्हें रानियां के नजदीकी गांव धोतड़ में पहली ज्वाइनिंग मिली।
25 साल के बाद हासिल हुई कामयाबी
शिक्षिका संगीता खुराना बताती हैं कि 25 साल के बाद उन्हें ये कामयाबी हासिल हुई हैं। इसका पूरा श्रेय प्राइमरी अध्यापिका कमला शर्मा और सास कृष्णा खुराना व ससुर भगवान दास खुराना को जाता है। उनके पति रजनीश खुराना मेडिकल लाइन से जुड़े हुए हैं। संगीता खुराना वर्तमान में एजुकेशन में पीएचडी कर रही हैं। वे हिंदी, अंग्रेजी, समाज शास्त्र व एजुकेशन में एमए कर चुकी हैं। संगीता खुराना की सर्विस के 25 वर्षों में परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा। सह शैक्षणिक कार्यक्रमों में भी संगीता व उसकी विद्यार्थियों ने जिला व राज्यस्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाई।