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Sirsa News: पहली से पांचवीं के विद्यार्थी करेंगे रामलीला का मंचन
Mon, 02 Oct 2023 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 02 Oct 2023 11:10 PM IST
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सिरसा।
जिले के प्राइमरी स्कूलों में बच्चे अब रामलीला का मंचन करेंगे। मंचन में पहली से पांचवीं के विद्यार्थी रामायण के किरदार निभाएंगे। इसको लेकर शिक्षा विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी है। स्कूल पांच अक्तूबर से 15 अक्तूबर तक विद्यार्थियों को रामलीला मंचन की तैयारी करवाएंगे। 16 अक्तूबर को जिले के प्रत्येक स्कूल में निपुण हरियाणा के तहत इसका मंचन होगा। बच्चे सभी को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों से रूबरू करवाएंगे।
बता दें कि जिले के करीब 500 प्राइमरी स्कूलों में बाल रामलीला का मंचन होगा। बाल रामलीला के लिए शिक्षक छोटे छोटे संवाद तैयार कर रहे हैं, ताकि बच्चे आसानी से उन्हें याद कर सकें। विभाग अधिकारियों के मुताबिक बच्चों को शुद्ध उच्चारण और प्ले के जरिए संवाद दक्षता में निपुण बनाना व रामलीला का महत्व बताने के उद्देश्य से यह मंचन करवाया जा रहा है। इसके जरिये विद्यार्थियों का बौद्धिक स्तर बढ़ेगा।
विभाग की ओर तय की गई है वेशभूषा
- राम और लक्ष्मण : सूती भगवा धोती, रुद्राक्ष माला, धनुष, तीर कमान, तलवार।
- सीता : भगवा सूती साड़ी, रुद्राक्ष माला, हाथों में फूलों के कंगन।
- बाली : पीली चमकीली धोती, सुनहरी बॉर्डर, मोतियों की लंबी माला, सिर पर मुकुट व पूंछ।
- सुग्रीव : पीली चमकीली धोती, सुनहरी बॉर्डर, पूंछ, सिर पर लाल टीका, सिर पर मुकुट।
- हनुमान : लाल चमकीला शॉर्टस, सुनहरी बॉर्डर, पूंछ, मुंह के चारों तरफ लाल रंग गोलाकार, मोतियों की माला, गदा।
तारा : पीली चमकीली साडी, मुकुट, गले में हार, कंगन।
कथावाचक : कुर्ता पजामा।
शिक्षकों की लग्न पर निर्भर होगा मंचन
राजकीय स्कूलों में बाल रामलीला करवाने के लिए विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों को कड़ी मेहनत करनी होगी। शिक्षकों के लिए विद्यार्थियों को डायलॉग याद करवाना और उसके बारे में समझना बड़ी चुनौती रहेगी। जो संवाद विभाग की ओर से दिए गए हैं, वो शुद्ध हिंदी में हैं, लेकिन छोटे बच्चों के लिए उन्हें याद करवाना बड़ी चुनौती होगी। बच्चों में रामलीला को लेकर भाव पैदा करना और जोड़ना बड़ी मेहनत का काम होगा। इतना ही नहीं, कोई भी विद्यालय रामलीला करवाने के लिए मना नहीं कर सकता। यह सभी के लिए अनिवार्य है।
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बाल रामलीला का मंचन करवाने को लेकर विद्यालयों को पत्र जारी कर दिए गए हैं। पांच अक्तूबर से विद्यालयों को रामलीला की रिहर्सल शुरू होगी है, जोकि 15 अक्तूबर तक चलेगी। 16 अक्तूबर को हर स्कूल में निपुण मेला आयोजित होगा। इसमें रामलीला का मंचन होगा।
- डॉ कपिल देव, जिला कोऑडिर्नेटर, एफएलएन सिरसा।
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जिले के प्राइमरी स्कूलों में बच्चे अब रामलीला का मंचन करेंगे। मंचन में पहली से पांचवीं के विद्यार्थी रामायण के किरदार निभाएंगे। इसको लेकर शिक्षा विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी है। स्कूल पांच अक्तूबर से 15 अक्तूबर तक विद्यार्थियों को रामलीला मंचन की तैयारी करवाएंगे। 16 अक्तूबर को जिले के प्रत्येक स्कूल में निपुण हरियाणा के तहत इसका मंचन होगा। बच्चे सभी को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों से रूबरू करवाएंगे।
बता दें कि जिले के करीब 500 प्राइमरी स्कूलों में बाल रामलीला का मंचन होगा। बाल रामलीला के लिए शिक्षक छोटे छोटे संवाद तैयार कर रहे हैं, ताकि बच्चे आसानी से उन्हें याद कर सकें। विभाग अधिकारियों के मुताबिक बच्चों को शुद्ध उच्चारण और प्ले के जरिए संवाद दक्षता में निपुण बनाना व रामलीला का महत्व बताने के उद्देश्य से यह मंचन करवाया जा रहा है। इसके जरिये विद्यार्थियों का बौद्धिक स्तर बढ़ेगा।
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विभाग की ओर तय की गई है वेशभूषा
- राम और लक्ष्मण : सूती भगवा धोती, रुद्राक्ष माला, धनुष, तीर कमान, तलवार।
- सीता : भगवा सूती साड़ी, रुद्राक्ष माला, हाथों में फूलों के कंगन।
- बाली : पीली चमकीली धोती, सुनहरी बॉर्डर, मोतियों की लंबी माला, सिर पर मुकुट व पूंछ।
- सुग्रीव : पीली चमकीली धोती, सुनहरी बॉर्डर, पूंछ, सिर पर लाल टीका, सिर पर मुकुट।
- हनुमान : लाल चमकीला शॉर्टस, सुनहरी बॉर्डर, पूंछ, मुंह के चारों तरफ लाल रंग गोलाकार, मोतियों की माला, गदा।
तारा : पीली चमकीली साडी, मुकुट, गले में हार, कंगन।
कथावाचक : कुर्ता पजामा।
शिक्षकों की लग्न पर निर्भर होगा मंचन
राजकीय स्कूलों में बाल रामलीला करवाने के लिए विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों को कड़ी मेहनत करनी होगी। शिक्षकों के लिए विद्यार्थियों को डायलॉग याद करवाना और उसके बारे में समझना बड़ी चुनौती रहेगी। जो संवाद विभाग की ओर से दिए गए हैं, वो शुद्ध हिंदी में हैं, लेकिन छोटे बच्चों के लिए उन्हें याद करवाना बड़ी चुनौती होगी। बच्चों में रामलीला को लेकर भाव पैदा करना और जोड़ना बड़ी मेहनत का काम होगा। इतना ही नहीं, कोई भी विद्यालय रामलीला करवाने के लिए मना नहीं कर सकता। यह सभी के लिए अनिवार्य है।
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बाल रामलीला का मंचन करवाने को लेकर विद्यालयों को पत्र जारी कर दिए गए हैं। पांच अक्तूबर से विद्यालयों को रामलीला की रिहर्सल शुरू होगी है, जोकि 15 अक्तूबर तक चलेगी। 16 अक्तूबर को हर स्कूल में निपुण मेला आयोजित होगा। इसमें रामलीला का मंचन होगा।
- डॉ कपिल देव, जिला कोऑडिर्नेटर, एफएलएन सिरसा।