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सीडीएलयू में लाठीचार्ज पर बवाल
sirsa
Updated Tue, 22 Apr 2014 12:11 AM IST
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चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में रविवार रात को हंगामे के बाद सोमवार को सभी विद्यार्थियों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर अनशन पर बैठे विधि विभाग के छात्र विकास का समर्थन किया। विद्यार्थियों के आक्रोश को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से विकास का प्रोविजनल दाखिला करते हुए आगामी कार्रवाई को 26 अप्रैल तक सुरक्षित रखा गया है।
इसके बाद यूनिवर्सिटी के डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो. एसके गहलावत ने विकास को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। दाखिला मिलने के बाद विकास पूर्णतया संतुष्ट है। उधर, विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने रविवार रात को उन पर लाठीचार्ज किया है।
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साथ ही रीडिंग रूम तक बंद कर दिया गया। पुलिस ने लाठीचार्ज से इंकार किया है। चार दिन से अनशन पर बैठे विधि विभाग के छात्र का स्वास्थ्य तेजी से गिर रहा था। सीडीएलयू स्वास्थ्य टीम समय-समय पर उसकी जांच कर रही थी। सेहत बिगड़ने के बावजूद छात्र अपनी मांग पर अडिग था।
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विश्वविद्यालय में उसका समर्थन धीरे-धीरे बढ़ रहा था। विकास ने बताया कि परीक्षाओं के कारण रात को लाइब्रेरी में पढ़ने आने वाले विद्यार्थी उसके पास आकर उसका हौसला बढ़ाते रहे हैं। रविवार रात को भी 30 से 40 विद्यार्थी उसके पास बैठे हुए थे, वह पानी के लिए बाहर गया था तो अचानक हंगामा होने लगा, भारी पुलिस बल ने उन्हें घेर लिया था।
वे बाहर की ओर भागने लगे तो पुलिस उन्हें दबोचकर गाड़ी में बैठाकर ले गई। रविवार रात को ही उसे हिसार रोड पर छोड़ दिया गया, उसके पास न तो फोन था और न ही पानी। वहीं, नजदीक से उसने पानी पीया। कुछ दूर चलने के बाद वह थक गया और वहीं, एक दुकान में सो गया।
सोमवार सुबह छह बजे विश्वविद्यालय पहुंचा तो पता चला कि रात को विद्यार्थियों के साथ मारपीट की गई है। विद्यार्थियों के साथ किए गए दुर्व्यवहार के कारण सभी ने कक्षाओं का बहिष्कार किया है।
रविवार रात को मौके पर मौजूद छात्र अजय पाल ने बताया कि वे लगभग 40 विद्यार्थी वहां बैठे हुए थे। रात 12 बजकर 10 मिनट पर काफी संख्या में पुलिसकर्मियों ने उन्हें गालियां देना शुरू कर दी और उन्हें छात्रावास से भाग जाने को कहने लगे।
इनमें से अधिकतर पुलिसकर्मी सिविल वर्दी में थे तो कुछ ने वर्दियां पहन रखी थी। विद्यार्थियों को भगाने के लिए पुलिस ने लाठियां भी भांजी। चार लोगों को चोटें आईं हैं, उसमें गौरव, नरेंद्र सिंह, दलजीत, अमरीक घायल हैं। उनका आरोप है कि पुलिसकर्र्मियों ने शराब पी रखी थी।
अनशन स्थल पर लगे भूख हड़ताल के पोस्टर को फाड़ने की कोशिश में वीसी कार्यालय के बाहर का शीशा भी तोड़ दिया गया। घटना के बाद रविवार रात को चार बजे तक छात्रावास में रहने वाले सौ से अधिक विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रार और कुलपति की कोठी के बाहर रोष प्रदर्शन किया, मगर कोई उनकी बात सुनने नहीं आया। पुलिस की गाड़ियां व पीसीआर रातभर विश्वविद्यालय में घूमती रही।
छात्र यूनिस ने बताया कि रात 12 बजे के बाद 70 से 80 पुलिसकर्मियों ने उन्हें घेरकर लाठीचार्ज किया है। पुलिस की गाड़ियां तो पहले से वहां घूम रही थी, मगर मौका देखकर पूरी घटना का अंजाम दिया गया।
कुछ विद्यार्थी दूसरी मंजिल पर रीडिंग रूम में पढ़ रहे थे, उन्हें भी वहां से भगाकर ताला लगा दिया गया। सीडीएलयू प्रशासन ने जान बूझकर मिलीभगत से विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज कर उनका शोषण किया है।
जो भी हुआ बहुत गलत था, उन लोगों को पढ़ने तक नहीं दिया गया, जबकि परीक्षाएं नजदीक है। यही कारण है कि विद्यार्थियों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया है। सब लोग शांति से विकास का समर्थन कर रहे थे।
यूनिस, छात्र
रजिस्ट्रार ने नायब तहसीलदार को सूचना दी थी कि विद्यार्थी इकट्ठे हो रहे हैं। पुलिस सुचना मिलने के बाद नायब तहसीलदार के साथ अनशन स्थल पर पहुंची पर विकास उन्हें वहां नहीं मिला।
वे तो लड़के की सेहत के बारे में जानने आए थे। पुलिस ने किसी प्रकार का लाठीचार्ज नहीं किया। रीडिंग रूम बंद करने का दोष भी बेबुनियाद है, भला वे विद्यार्थियों की पढ़ाई में खलल क्यों डालेंगे।
मौके पर तैनात सुरक्षा गार्ड रमेश मेहरा ने कहा कि 70 की संख्या में रात 12 बजे पुलिसकर्मी आए थे। उन्होंने विद्यार्थियों को गालियां भी दी और लाठियों से पीटा भी। इसका सबूत टूटा हुआ शीशा और नीचे पड़े हंगर स्ट्राइक के पोस्टर हैं।
विद्यार्थियों का सबसे ज्यादा गुस्सा रीडिंग रूम बंद करने के बाद आया, अगले दिन उनका टेस्ट था पर उन्हें तैयारी नहीं करने दी गई। उन्होंने इसके बाद कुलपति व रजिस्ट्रार कोठी के बाहर प्रदर्शन भी किया पर किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। सबसे बड़ी बात है कि बिना लिखित सूचना के पुलिस प्रशासन ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया, जो सरासर अन्याय है।
सोमवार को कक्षाओं का बहिष्कार करने के बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थी कुलपति कार्यालय के बाहर विकास के साथ अनशन पर बैठे रहे। सोमवार सुबह से ही सीडीएलयू प्रशासन ने दाखिला प्रक्रिया के लिए बैठकें शुरू कर दी। सुबह 11 बजकर तीस मिनट पर रजिस्ट्रार एसके गहलोत विद्यार्थियों और विकास से बातचीत कर उन्हें मनाते रहे कि दाखिला कर दिया जाएगा, आप अनशन समाप्त कर दो।
इसके बावजूद विद्यार्थी वहां डटे रहे, उनका कहना था कि हमें पूर्ण लिखित आश्वासन दिया जाए। उसके उपरांत बार-बार कहासुनी का दौर चलता रहा। आखिरकार फाइन व दसवें सेमेस्टर की फीस मिलाकर 13830 रुपये भरवाए गए, उसके बाद रजिस्ट्रार की ओर से दाखिले का प्रशासनिक ऑर्डर दिखाने के बाद विद्यार्थी शांत हुए। सोमवार दोपहर बाद विकास को वीसी कार्यालय में ले जाकर जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया गया।
सीडीएलयू के कुलपति राधेश्याम शर्माने कहा कि विश्वविद्यालय का अनुशासन सर्वोपरि है। विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए। न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए विकास को प्रोविजनल दाखिला दिया गया है। 26 अप्रैल को कोर्ट का फैसला आने के बाद अगली कार्रवाई होगी।
अपील करने का अधिकार दोनों पक्षों के पास सुरक्षित है। जिसे भी लगेगा उसके साथ गलत हुआ है, वह अपील कर सकता है। विश्वविद्यालय उसके अच्छे स्वास्थ्य व भविष्य की कामना करता है। वह नियमित कक्षाएं लगाएं तथा मन लगाकर पढ़ाई करे। पुलिस ने पूर्णतया कानूनी मर्यादा का पालन किया है।
सीडीएलयू की ओर से लगातार अनशनधारी विद्यार्थी की स्वास्थ्य रिपोर्ट प्रशासन को दी जा रही थी। नायब तहसीलदार के कहने पर पुलिस केवल विद्यार्थी को सिविल अस्पताल ले जाने आई थी पर विद्यार्थी उन्हें मिला नहीं। पुलिस ने कोई गलत कदम नहीं उठाया।