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गोशाला में गोसेवा से ग्रामीण करते हैं दिन की शुरुआत
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Mon, 14 Nov 2016 12:15 AM IST
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गाय
- फोटो : अमर उजाला
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बेसहारा घूम रहे गोवंश को आश्रय देने के उद्देश्य से वर्ष 2003 में ओढां खंड के गांव नुहियांवाली में खोली गई श्रीराम भगत हनुमान नामक गोशाला अब मिशाल पेश कर रही है। इस समय में यहां पर 500 से अधिक गोवंशों को आश्रय मिला है। गांव के लोग गो सेवा के लिए हर रोज अलसुबह आते हैं। लोगों का कहना है कि यह अब उनकी रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल हो गया है।
सुचारू रूप से चलाने के लिए जहां गोशाला कमेटी के प्रयास सराहनीय हैं तो वहीं ग्रामीणों की गोसेवा में रुचि भी काबिल-ए तारीफ है। गांव के लोग विवाह-शादी या अन्य अवसरों पर गोसेवा में राशि देना कभी नहीं भूलते। वैसे तो गोशाला के निर्माण में अनेक लोगों का सहयोग है ,लेकिन गांव की बेटी गीता गोदारा का नाम गो भक्तों की उच्च श्रेणी में लिया जाता है। गीता देवी ने गोसेवा में एक बड़ी मिसाल पेश करते हुए अपने हिस्से की करीब छह एकड़ भूमि गोशाला के नाम करते हुए गोसेवा में एक बड़ा उदाहरण पेश किया है। तो वहीं स्व. सतपाल बड़जाति का नाम भी गोसेवा में सम्मान के साथ लिया जाता है जिसने गोसेवा में अपना घर बार तक त्याग दिया था। इसके अलावा गो भगतों में गांव की बेटी इंद्रा देवी, दलीप सोनी, रामस्वरूप सुथार, नत्थाराम बड़जाति, बलराम सांई, हरद्वारी देवी व रोशन लाल आदि गौ भगतों ने इस गोशाला के निर्माण व प्रसार में अपनी अहम भूमिका निभाते हुए लोगों को जगौ सेवा हेतू प्रेरित किया है। इसके अलावा राजनीतिक लोगों ने भी उक्त गोशाला के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है जिसके चलते नुहियांवाली की गोशाला जिलेभर में अपनी एक पहचान कायम किए हुए है।
जिंदगी बदल दी गो सेवा ने
कहावत है कि गो सेवा कभी निषफल नहीं जाती इसका एक बड़ा उदाहरण गोशाला में सेवारत्त कालूराम के रूप में देखा जा सकता है। कभी गलत संगत में पड़ कर नशे का आदि बन चुका कालूराम आज गौसेवा में इस कदर तल्लीन है कि इसके लिए उसने घर बार तक त्याग रखा है। कालूराम के विषय में कभी न सुधरने वाली बात कहने वाले लोग आज उसके द्वारा की जा रही गोसेवा की तारीफ कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त गांव में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो हर अलसुबह गोशाला में समय लगाकर छोटे मोटे नशे छोड़ कर एक सभ्य इंसान बनने की कोशिश में लगे हुए हैं।
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गांव के लोगों का गोसेवा का जज्बा अति सराहनीय है चाहे वो गोवंश के चारे की बात हो या अलसुबह गोसेवा की या फिर सुअवसरों पर गोसेवा में राशि देने की। ग्रामीणों की गोसेवा की बदौलत आज यहां पर करीब 500 गोवंश आश्रय पा रहा है।
बलराम सहारण, प्रधान गोशाला नुहियांवाली
गोसेवा में सिरसा जिला पूरे प्रदेशभर में आगे है क्योंकि यहां पर अब तक 87 गोशालाएं खुल चुकी हैं और अन्य गांवों में भी हमारा प्रयास चल रहा है। नुहियांवाली के ग्रामीणों का गोसेवा में एक बड़ा योगदान है जो काबिल-ए-तारीफ है और उससे भी सराहनीय गांव की बेटियों व गो भगतों की गो सेवा का जज्बा है जो इसके लिए हर समय तैयार रहते हैं।
जगतपाल सहारण, प्रदेश उपाध्यक्ष, गोशाला संघ हरियाणा
गोशाला में हम बीमार गायों के उपचार के लिए अति संवेदनशील हैं। गऊओं के उपचार व समय समय पर बीमारी रोधी टीकाकरण प्राथमिकता के रूप में किया जाता है। गौशाला के लिए वीएलडीए गांव के अस्पताल में मौजूद है।
डॉ. धर्मवीर पोटलिया, वैटनरी सर्जन, ओढां
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सुचारू रूप से चलाने के लिए जहां गोशाला कमेटी के प्रयास सराहनीय हैं तो वहीं ग्रामीणों की गोसेवा में रुचि भी काबिल-ए तारीफ है। गांव के लोग विवाह-शादी या अन्य अवसरों पर गोसेवा में राशि देना कभी नहीं भूलते। वैसे तो गोशाला के निर्माण में अनेक लोगों का सहयोग है ,लेकिन गांव की बेटी गीता गोदारा का नाम गो भक्तों की उच्च श्रेणी में लिया जाता है। गीता देवी ने गोसेवा में एक बड़ी मिसाल पेश करते हुए अपने हिस्से की करीब छह एकड़ भूमि गोशाला के नाम करते हुए गोसेवा में एक बड़ा उदाहरण पेश किया है। तो वहीं स्व. सतपाल बड़जाति का नाम भी गोसेवा में सम्मान के साथ लिया जाता है जिसने गोसेवा में अपना घर बार तक त्याग दिया था। इसके अलावा गो भगतों में गांव की बेटी इंद्रा देवी, दलीप सोनी, रामस्वरूप सुथार, नत्थाराम बड़जाति, बलराम सांई, हरद्वारी देवी व रोशन लाल आदि गौ भगतों ने इस गोशाला के निर्माण व प्रसार में अपनी अहम भूमिका निभाते हुए लोगों को जगौ सेवा हेतू प्रेरित किया है। इसके अलावा राजनीतिक लोगों ने भी उक्त गोशाला के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है जिसके चलते नुहियांवाली की गोशाला जिलेभर में अपनी एक पहचान कायम किए हुए है।
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जिंदगी बदल दी गो सेवा ने
कहावत है कि गो सेवा कभी निषफल नहीं जाती इसका एक बड़ा उदाहरण गोशाला में सेवारत्त कालूराम के रूप में देखा जा सकता है। कभी गलत संगत में पड़ कर नशे का आदि बन चुका कालूराम आज गौसेवा में इस कदर तल्लीन है कि इसके लिए उसने घर बार तक त्याग रखा है। कालूराम के विषय में कभी न सुधरने वाली बात कहने वाले लोग आज उसके द्वारा की जा रही गोसेवा की तारीफ कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त गांव में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो हर अलसुबह गोशाला में समय लगाकर छोटे मोटे नशे छोड़ कर एक सभ्य इंसान बनने की कोशिश में लगे हुए हैं।
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गांव के लोगों का गोसेवा का जज्बा अति सराहनीय है चाहे वो गोवंश के चारे की बात हो या अलसुबह गोसेवा की या फिर सुअवसरों पर गोसेवा में राशि देने की। ग्रामीणों की गोसेवा की बदौलत आज यहां पर करीब 500 गोवंश आश्रय पा रहा है।
बलराम सहारण, प्रधान गोशाला नुहियांवाली
गोसेवा में सिरसा जिला पूरे प्रदेशभर में आगे है क्योंकि यहां पर अब तक 87 गोशालाएं खुल चुकी हैं और अन्य गांवों में भी हमारा प्रयास चल रहा है। नुहियांवाली के ग्रामीणों का गोसेवा में एक बड़ा योगदान है जो काबिल-ए-तारीफ है और उससे भी सराहनीय गांव की बेटियों व गो भगतों की गो सेवा का जज्बा है जो इसके लिए हर समय तैयार रहते हैं।
जगतपाल सहारण, प्रदेश उपाध्यक्ष, गोशाला संघ हरियाणा
गोशाला में हम बीमार गायों के उपचार के लिए अति संवेदनशील हैं। गऊओं के उपचार व समय समय पर बीमारी रोधी टीकाकरण प्राथमिकता के रूप में किया जाता है। गौशाला के लिए वीएलडीए गांव के अस्पताल में मौजूद है।
डॉ. धर्मवीर पोटलिया, वैटनरी सर्जन, ओढां