फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sirsa News ›   sirsa, hindi news, village, sirsa

गांव का कोई भी संगीन मामला नहीं है न्यायालय में

Mon, 03 Oct 2016 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा Updated Mon, 03 Oct 2016 12:38 AM IST
विज्ञापन
sirsa, hindi news, village, sirsa
गांव गाथा - फोटो : bureau
गांव गाथा अभियान के तहत अमर उजाला लोगों को गांवों के इतिहास से रूबरू करवा रहा है। अमर उजाला की टीम जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर और उप तहसील कालांवाली से 13 किलोमीटर दूर बसे छोटे से गांव भादड़ा के 170 वर्ष पूर्व के इतिहास से रूबरू हुई। लगभग दो हजार की आबादी वाले इस गांव का रकबा 1900 एकड़ है। कालांवाली विधानसभा क्षेत्र के अधीनस्थ इस गांव में 1500 मतदाता हैं जो लोकतंत्र में अपनी हिस्सेदारी निभाते हैं। गांव के इतिहास बारे में जब गांव के बड़े बुजुर्गों से चर्चा की गई तो बुजुर्ग गंगाजल सहारण, काशीराम, देवीलाल, भागीरथ सहारण, धर्मवीर, बलविंद्र सिंह, रोहताश आदि ने अतीत में झांकते हुए बताया कि इस गांव को 1845 में भादर राम सहारण ने बसाया था जो इस गांव के जनक माने जाते हैं।
विज्ञापन

 
बुजुर्गों के अनुसार इस गांव का रकबा साथ लगते गांव झोरड़ रोही का था जिसे भादर राम सहारण ने खरीद लिया था, लेकिन झोरड़ रोही के लोगों ने इसका विरोध किया परंतु अंग्रेजी हुकूमत ने फैसला भादरराम ने पक्ष में सुनाया था। इसके बाद हरिजन, धानक, श्योराण व गोदारा बिरादरी के लोग यहां आए और इस तरह धीरे धीरे इस गांव की उत्पत्ति हुई। इस समय गांव में गोदारा, चोयल, कासनियां, श्योराण, भडिय़ा, राड़,डूडी, भांभू, हरिजन, पंडित व धानक बिरादरियों के लोग मिलजुल कर रहते हैं। गांव में तीन पत्तियां सूरजापत्ती, अमरापती व भादरपत्ती का गठन किया गया जो आज भी गांव के राजस्व विभाग में दर्ज है। मौजूदा समय में वहां के ज्यादातर लोग खेतीबाड़ी पर आश्रित है और तकरीबन तीन दर्जन से अधिक लोग सरकारी नौकरियों पर कार्यरत है। गांव में सभी लोग बागड़ीभाषी है। हालांकि कुछ घर पंजाबी बिरादरी के हैं जो झोरडरोही से यहां आकर बसे थे।
विज्ञापन


पहला नंबरदार व सरपंच
गांव बसने के बाद पंचायती राज लागू होने उपरांत करीब 1956 में दौलतपुर खेड़ा के बचित्र सिंह को भादड़ा व सुबाखेड़ा तीनों गांवों का सरपंच नियुक्त किया गया, जिसके कार्यकाल उपरांत करीब 1962 में रामकरण भड़िया को पहली भादड़ा का सरपंच चुना गया तो वहीं रामकिशन सहारण को नंबरदार नियुक्त किया गया। गांव की मौजूदा नंबरदारी कृष्णा सहारण, सतपाल इंसां व बंसीलाल के हाथ में है। जबकि सरपंची बंसीलाल के पास है।
विज्ञापन
विज्ञापन


आज भी चौपाल में निपटाएं जाते हैं मामले
इस गांव की मुख्य विशेषता ये है कि गांव का कोई भी संगीन मामला कोर्ट में लंबित नहीं है तथा आज भी गांव के अधिकांश मामले गांव की चौपाल में निपटाएं जाते हैं, जोकि एक अच्छा उदाहरण हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव में किसी विवाद को लेकर पुलिस बहुत कम ही आती है। पुराने समय में भी लाल चंद नंबरदार ने एक संगीन मामला गांव की चौपाल में ही निपटाया था जो आज भी चर्चा में आता है।  

याद है वो कुदरत का कहर
ये गांव 1982 में एक प्राकृतिक आपदा का सामना कर चुका है। बुजुर्गों के अनुसार उस वक्त रबी की फसल का समय था जब आसमान से बरसात के साथ इस कदर जमकर ओलावृष्टि हुई कि लोगों की फसलें तबाह हो गई। इस आपदा ने गांव की आर्थिक स्थिति को दयनीय बना दिया था। ये कुदरती कहर आज भी बुजुर्गों की जुबान पर आ जाता है।

धार्मिक आस्था
गांव में दादा भोमिया मंदिर लोगों की अटूट आस्था का केन्द्र है। गांव में जब भी लोग अपने शुभ कार्य की शुरुआत करते हैं तो दादा भोमिया के मंदिर में मत्था टेकने जरूर जाते हैं। उक्त मंदिर का निर्माण गांव के जनक भादर राम के पोते ने 1880 में अपने पिता पूर्ण राम की याद में करवाया था। जिसे लोग भोमिया दादा के नाम से पूजते हैं। इसके अलावा गांव में बाबा रामदेव मंदिर का इतिहास भी करीब 45 साल पुराना है जहां दूर-दूर से लोग मन्नत मांगने आते हैं। तो वहीं गांव में हनुमान मंदिर भी आस्था का केन्द्र है जो गांव में सबसे ऊंचा है जिसकी ऊंचाई करीब 90 फीट हैं। इसके अलावा गुरुद्वारा व गोगामेड़ी का मंदिर भी लोगों की आस्था का केन्द्र है। गांव में सभी लोग एक दूसरे के धार्मिक कार्यक्रमों में शिरकत कर भाईचारे का सबूत देते हैं।  


सुविधाएं व परेशानी
गांव में पक्की गलियां, पशु अस्पताल, धर्मशाला, जलघर, आंगनबाड़ी केंद्र, पंचायत घर, बस सुविधा, आठवीं तक स्कूल सहित अनेक सुविधाएं हैं। वहीं गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र, बिजली समस्या, गोशाला, बैंक, पैक्स सोसायटी न होना, गंदे पानी की निकासी न होना, डाकखाना, पटवार भवन, दसवीं तक स्कूल का न  होना आदि समस्याएं व्याप्त है। गांव में स्कूल अपग्रेड न होने के चलते गांव के छात्रों को दूसरे गांव में जाना पड़ता है। जिसके चलते विशेषकर लड़कियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed