{"_id":"57fa90fb4f1c1b675228e5e9","slug":"sirsa-hindi-news-limca-book-sirsa","type":"story","status":"publish","title_hn":"बोनसाई तकनीक से 25 मिलीमीटर का पौधा उगाया ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बोनसाई तकनीक से 25 मिलीमीटर का पौधा उगाया
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
Updated Mon, 10 Oct 2016 12:18 AM IST
विज्ञापन
लिम्का बुक
- फोटो : bureau
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गांव मिड्डुखेड़ा(पंजाब) निवासी मनी सिंह ने सबसे छोटा पौधा उगाकर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करवाया है। ग्लेडिलयोस के इस पौधे को मिट्टी के एक दीये में उगाया गया है और इसकी लंबाई फूल सहित मात्र 25 मिलीमीटर(एक इंच) है। मनी सिंह ने बताया कि पौधे को बोनसाई तकनीक से उगाया गया। मनी सिंह ने बताया कि उनके पिता फ्लावर सिंह ने ग्वालियर में बोनसाई तकनीकी से छोटे पौधे तैयार करने का प्रशिक्षण लिया था, जिसे उन्होंने परिवार के अन्य सदस्यों को भी सिखाया। मनी सिंह के मुताबिक इसके बाद उनके मन में सबसे छोटा पौधा उगाने का ख्याल आया। आम तौर पर पेड़ों को बोनसाई तकनीक से तैयार किया जाता है, लेकिन विश्व का यह पहला मौसमी पौधा है, जिसे इस तकनीक से इतने छोटे साइज में उगाया गया।
हर 15 दिन बाद उखाड़ कर इसकी जड़ों की सर्जरी की गई और काफी बारीकी से पौधे को छोटा रूप दिया जा सका ताकि विश्व रिकार्ड बनाया जा सके। अमूमन इस पौधे की लंबाई तीन से पांच फुट तक होती है। 15 अगस्त 2014 को पौधा लगाया गया व चार महीने के बाद इस पर फूल खिला। तत्पश्चात इसे लिम्का बुक के अधिकारियों को रिकार्ड में शामिल करने के लिए भेजा गया। गत 29 सितंबर 2016 को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की एडिटर विजय घोष ने उन्हें रिकार्ड होल्डर के रूप में सर्टिफिकेट जारी किया। उल्लेखनीय है कि इससे पहले मनी सिंह की माता सुखजीत कौर ने वर्ष 2015 में मैरी गोल्ड(गेंदा)का 10 फीट 6 इंच का भारत का सबसे लंबा पौधा उगाकर लिम्का बुक में नाम दर्ज करवाया था। वर्ष 2013 में मनी सिंह के पिता स. फ्लावर सिंह ने बिना चेन की साइकिल एक घंटे में 9.6 किलोमीटर तक चलाकर लिम्का बुक में एवं वर्ष 2014 में यूनीक बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्डस में नाम दर्ज करवा चुके हैं।
पिता खोलेंगे नर्सरी
फ्लावर सिंह ने बताया कि अब वह हनुमानगढ़(राजस्थान) के नजदीक भारत की पहली बोनसाई नर्सरी खोलने जा रहे हैं। इसे हर तरह का पौधा छोटे साइज में उपलब्ध करवाया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
हर 15 दिन बाद उखाड़ कर इसकी जड़ों की सर्जरी की गई और काफी बारीकी से पौधे को छोटा रूप दिया जा सका ताकि विश्व रिकार्ड बनाया जा सके। अमूमन इस पौधे की लंबाई तीन से पांच फुट तक होती है। 15 अगस्त 2014 को पौधा लगाया गया व चार महीने के बाद इस पर फूल खिला। तत्पश्चात इसे लिम्का बुक के अधिकारियों को रिकार्ड में शामिल करने के लिए भेजा गया। गत 29 सितंबर 2016 को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की एडिटर विजय घोष ने उन्हें रिकार्ड होल्डर के रूप में सर्टिफिकेट जारी किया। उल्लेखनीय है कि इससे पहले मनी सिंह की माता सुखजीत कौर ने वर्ष 2015 में मैरी गोल्ड(गेंदा)का 10 फीट 6 इंच का भारत का सबसे लंबा पौधा उगाकर लिम्का बुक में नाम दर्ज करवाया था। वर्ष 2013 में मनी सिंह के पिता स. फ्लावर सिंह ने बिना चेन की साइकिल एक घंटे में 9.6 किलोमीटर तक चलाकर लिम्का बुक में एवं वर्ष 2014 में यूनीक बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्डस में नाम दर्ज करवा चुके हैं।
विज्ञापन
पिता खोलेंगे नर्सरी
फ्लावर सिंह ने बताया कि अब वह हनुमानगढ़(राजस्थान) के नजदीक भारत की पहली बोनसाई नर्सरी खोलने जा रहे हैं। इसे हर तरह का पौधा छोटे साइज में उपलब्ध करवाया जाएगा।
विज्ञापन