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तीन गांवों में जलघर स्वीकृत करके बजट जारी करना भूली सरकार
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
Updated Tue, 05 Jul 2016 12:01 AM IST
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क्षेत्र के तीन गांवों में साढ़े छह करोड़ रुपये की लागत से जलघरों का निर्माण करने की स्वीकृति प्रदान करके सरकार बजट देना भूल गई। एक माह से अधिक समय बीतने के बावजूद ग्रामीणों की आस टूटती हुई प्रतीत हो रही है। सरकार बजट कब जारी होगा, यह सवाल बना हुआ है? 29 मई 2016 को सीएम मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में हुई स्टेट सीनेटरी बोर्ड की बैठक में इसे स्वीकृति दी गई थी। आज तक बजट जारी नहीं हुआ है। जिससे आगामी प्रक्रिया लटकी हुई है। अगर बजट जारी होता है, उसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। तीनों गांव दूसरे गांवों में बने जलघरों पर निर्भर हैं। ऐसे में सरकार द्वारा ग्रामीण अंचल में तय प्रति ग्रामीण 70 लीटर पानी भी उन्हें नहीं मिल पाता है।
यहां तक कि कई किलोमीटर का रास्ता तय कर पहुंचने वाली पाइपों से एक गांव की प्यास बुझाने जितना पानी बर्बाद हो जाता है।
गांव अहमदपुर दारेवाला को चार किलोमीटर दूर स्थित गांव गोदीकां से पेयजल की आपूर्ति होती है। गांव की अबादी 3675 है। जबकि गांव रामगढ़ की आबादी 1974 है। इसे निकटवर्ती गांव चकजालू में बने जलघर से पेयजल की आपूर्ति होती है। नहर से करीब 500 मी. की दूरी पर बसा गांव गिदड़खेड़ा भी प्यास बुझाने के लिए गांव लंबी पर निर्भर है। गांव की जनसंख्या 1635 है। तीनों गांवों के ग्रामीणों की मांग को सरकार के नियमों ने ही परवान चढ़ाया। अन्यथा राजनेताओं का भरोसा ग्रामीणों का हक खाए जा रहा था। इस बार भी लेटलतीफी ने ग्रामीणों के दिलों की धड़कनें तेज की हुई हैं। चूंकि उपरोक्त गांवों में जलघर मंजूर हुए करीब एक माह से ज्यादा का समय बीत चुका है।
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यहां तक कि कई किलोमीटर का रास्ता तय कर पहुंचने वाली पाइपों से एक गांव की प्यास बुझाने जितना पानी बर्बाद हो जाता है।
गांव अहमदपुर दारेवाला को चार किलोमीटर दूर स्थित गांव गोदीकां से पेयजल की आपूर्ति होती है। गांव की अबादी 3675 है। जबकि गांव रामगढ़ की आबादी 1974 है। इसे निकटवर्ती गांव चकजालू में बने जलघर से पेयजल की आपूर्ति होती है। नहर से करीब 500 मी. की दूरी पर बसा गांव गिदड़खेड़ा भी प्यास बुझाने के लिए गांव लंबी पर निर्भर है। गांव की जनसंख्या 1635 है। तीनों गांवों के ग्रामीणों की मांग को सरकार के नियमों ने ही परवान चढ़ाया। अन्यथा राजनेताओं का भरोसा ग्रामीणों का हक खाए जा रहा था। इस बार भी लेटलतीफी ने ग्रामीणों के दिलों की धड़कनें तेज की हुई हैं। चूंकि उपरोक्त गांवों में जलघर मंजूर हुए करीब एक माह से ज्यादा का समय बीत चुका है।
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