{"_id":"683f37baa76e3593230cb785","slug":"silk-webthe-script-is-real-the-bride-and-relatives-are-all-fake-sirsa-news-c-21-hsr1038-639828-2025-06-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirsa News: रेशम का जाल...पटकथा असली, दुल्हन-रिश्तेदार सब नकली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirsa News: रेशम का जाल...पटकथा असली, दुल्हन-रिश्तेदार सब नकली
विज्ञापन
आरोपी रेशम सिंह के साथ राजस्थान की कोलायत पुलिस।
डबवाली। फर्जी शादियां कराने वाला रेशम कितना शातिर है, पुलिस जांच में इसका खुलासा हो रहा है। युवाओं को अपने जाल में फंसाने से पहले वह पूरी स्क्रिप्ट तैयार करता था। उसकी पटकथा के सारे किरदार नकली होते थे। अभिनय इतना सटीक कि किसी को शक भी न हो। रेशम खुद भी नाम बदल-बदलकर लोगों से मिलता था। उसने पंजाब, हरियाणा व राजस्थान के कई युवकों को अपना शिकार बनाया था।
रेशम सिंह ने पुलिस को बताया कि वह शादी कराने के नाम पर मोटी रकम वसूलता था। जरूरतमंद, दिव्यांग और ऐसे उम्रदराज लोगों को झांसे में लेता था, जिनकी किसी न किसी वजह से शादी न हो रही हो। ऐसे लोग ज्यादा सवाल-जवाब भी नहीं करते थे। सबकुछ तय हो जाने के बाद रेशम लड़की के नकली माता-पिता व दूर के रिश्तेदारों से मुलाकात कराता था।
मंझे हुए कलाकार की भांति ये सभी अपना रोल निभाते थे। किसी धार्मिक स्थल पर शादी के बाद दुल्हन तीन चार दिन तक ससुराल में रहती थी। इसके बाद मायके जाने की रस्म के दौरान सोने-चांदी के गहने व नकदी लेकर गायब हो जाती थी। कुछ दिन बीतने पर जब लड़के वाले दुल्हन लेने पहुंचते थे, तो वह पता भी फर्जी निकलता था।
विज्ञापन
बखास बात तो यह है कि सामाजिक प्रतिष्ठा बचाने के चक्कर में कई लोग तो ठगी की शिकायत तक पुलिस से भी नहीं करते थे। यही वजह है कि रेशम पहले नहीं पकड़ा गया। राजस्थान में भी उसके खिलाफ महज तीन मामले दर्ज हैं। हालांकि, पुलिस का कहना है कि रेशम की गिरफ्तारी के बाद कुछ और लोग भी सामने आ सकते हैं। डबवाली में फर्जी शादी कराने का यह चौथा मामला उस पर दर्ज हुआ है। पंजाब के मोगा से आया दूल्हा भी दिव्यांग था। फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बावजूद उन्होंने भी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई।
हर बार नया ठिकाना, नया नाम
जांच में यह भी सामने आया है कि डबवाली का रहने वाला रेशम सिंह नए ठिकाने के साथ नाम भी नया रखता था। वह अलग-अलग नामों से लोगों से मिलता था। अब तक उसके तीन नाम रेशम सिंह उर्फ दर्शन सिंह उर्फ लक्ष्मण सिंह सामने आ चुके हैं।
ऐसे हत्थे चढ़ा रेशम सिंह
राजस्थान के कोलायत थाना प्रभारी लखवीर सिंह ने बताया कि 27 मार्च, 2024 को नकली शादी का फर्जीवाड़ा तब सामने आया, जब सुंदरगिरि नामक युवक ने शिकायत दर्ज कराई। उसने कहा कि दर्शन सिंह उर्फ रेशम सिंह ने उससे पैसे लेकर उसकी और उसके भाई की शादी करवाई। उसने धार्मिक रीति-रिवाजों के बाद शादी का पंजीकरण करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। कोर्ट में जब दस्तावेज जमा किए तो पता चला दोनों लड़कियों के कागज फर्जी हैं। बाद में लड़कियों के फर्जी माता-पिता अपने नकली रिश्तेदारों के साथ आए और दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देने लगे। पुलिस ने जब इन सबको गिरफ्तार किया तो रेशम सिंह का नाम सामने आया। पता चला कि रेशम सिंह ही मुख्य साजिशकर्ता था। उसने अपना नाम दर्शन सिंह बताया था। इसके बाद पुलिस रेशम सिंह की सुरागकशी में लग गई। लगभग 14 महीने बाद पता चला कि डबवाली में रेशम सिंह एक दिव्यांग दूल्हे की शादी करा रहा है। राजस्थान पुलिस ने समय रहते उसे यहां आकर दबोच लिया।
सोशल मीडिया का नहीं करता था प्रयोग
फर्जी शादी की पूरी प्लानिंग की जाती थी। रेशम सिंह हर चीज को बड़ी बारीकी से करता था, ताकि विवाद होने की सूरत में उसका नाम सामने न आए। शादी के लिए रेट तय होने पर वह दस्तावेज स्कैनिंग करने वाले को ढूंढता था। उसे लालच देकर खुद के, लड़की, उसके माता-पिता और अन्य लोगों के नकली दस्तावेज बनवाता था। सभी को पैसा देकर साथ जोड़ा जाता था। शादी करवाने के लिए वैसे धार्मिक स्थलों को फाइनल करता था, जहां पर दस्तावेज को कोई प्राथमिकता नहीं दी जाती है। धार्मिक रीति रिवाज के बाद परिजन शादी की पार्टी करते थे, जिससे कोई शक नहीं करता था। गौरतलब है कि आधे से ज्यादा लोग शादी होने के बाद शादी प्रमाणपत्र नहीं बनवाते। इसी का फायदा रेशम सिंह को मिलता था।
विज्ञापन
रेशम सिंह ने पुलिस को बताया कि वह शादी कराने के नाम पर मोटी रकम वसूलता था। जरूरतमंद, दिव्यांग और ऐसे उम्रदराज लोगों को झांसे में लेता था, जिनकी किसी न किसी वजह से शादी न हो रही हो। ऐसे लोग ज्यादा सवाल-जवाब भी नहीं करते थे। सबकुछ तय हो जाने के बाद रेशम लड़की के नकली माता-पिता व दूर के रिश्तेदारों से मुलाकात कराता था।
विज्ञापन
मंझे हुए कलाकार की भांति ये सभी अपना रोल निभाते थे। किसी धार्मिक स्थल पर शादी के बाद दुल्हन तीन चार दिन तक ससुराल में रहती थी। इसके बाद मायके जाने की रस्म के दौरान सोने-चांदी के गहने व नकदी लेकर गायब हो जाती थी। कुछ दिन बीतने पर जब लड़के वाले दुल्हन लेने पहुंचते थे, तो वह पता भी फर्जी निकलता था।
विज्ञापन
बखास बात तो यह है कि सामाजिक प्रतिष्ठा बचाने के चक्कर में कई लोग तो ठगी की शिकायत तक पुलिस से भी नहीं करते थे। यही वजह है कि रेशम पहले नहीं पकड़ा गया। राजस्थान में भी उसके खिलाफ महज तीन मामले दर्ज हैं। हालांकि, पुलिस का कहना है कि रेशम की गिरफ्तारी के बाद कुछ और लोग भी सामने आ सकते हैं। डबवाली में फर्जी शादी कराने का यह चौथा मामला उस पर दर्ज हुआ है। पंजाब के मोगा से आया दूल्हा भी दिव्यांग था। फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बावजूद उन्होंने भी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई।
हर बार नया ठिकाना, नया नाम
जांच में यह भी सामने आया है कि डबवाली का रहने वाला रेशम सिंह नए ठिकाने के साथ नाम भी नया रखता था। वह अलग-अलग नामों से लोगों से मिलता था। अब तक उसके तीन नाम रेशम सिंह उर्फ दर्शन सिंह उर्फ लक्ष्मण सिंह सामने आ चुके हैं।
ऐसे हत्थे चढ़ा रेशम सिंह
राजस्थान के कोलायत थाना प्रभारी लखवीर सिंह ने बताया कि 27 मार्च, 2024 को नकली शादी का फर्जीवाड़ा तब सामने आया, जब सुंदरगिरि नामक युवक ने शिकायत दर्ज कराई। उसने कहा कि दर्शन सिंह उर्फ रेशम सिंह ने उससे पैसे लेकर उसकी और उसके भाई की शादी करवाई। उसने धार्मिक रीति-रिवाजों के बाद शादी का पंजीकरण करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। कोर्ट में जब दस्तावेज जमा किए तो पता चला दोनों लड़कियों के कागज फर्जी हैं। बाद में लड़कियों के फर्जी माता-पिता अपने नकली रिश्तेदारों के साथ आए और दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देने लगे। पुलिस ने जब इन सबको गिरफ्तार किया तो रेशम सिंह का नाम सामने आया। पता चला कि रेशम सिंह ही मुख्य साजिशकर्ता था। उसने अपना नाम दर्शन सिंह बताया था। इसके बाद पुलिस रेशम सिंह की सुरागकशी में लग गई। लगभग 14 महीने बाद पता चला कि डबवाली में रेशम सिंह एक दिव्यांग दूल्हे की शादी करा रहा है। राजस्थान पुलिस ने समय रहते उसे यहां आकर दबोच लिया।
सोशल मीडिया का नहीं करता था प्रयोग
फर्जी शादी की पूरी प्लानिंग की जाती थी। रेशम सिंह हर चीज को बड़ी बारीकी से करता था, ताकि विवाद होने की सूरत में उसका नाम सामने न आए। शादी के लिए रेट तय होने पर वह दस्तावेज स्कैनिंग करने वाले को ढूंढता था। उसे लालच देकर खुद के, लड़की, उसके माता-पिता और अन्य लोगों के नकली दस्तावेज बनवाता था। सभी को पैसा देकर साथ जोड़ा जाता था। शादी करवाने के लिए वैसे धार्मिक स्थलों को फाइनल करता था, जहां पर दस्तावेज को कोई प्राथमिकता नहीं दी जाती है। धार्मिक रीति रिवाज के बाद परिजन शादी की पार्टी करते थे, जिससे कोई शक नहीं करता था। गौरतलब है कि आधे से ज्यादा लोग शादी होने के बाद शादी प्रमाणपत्र नहीं बनवाते। इसी का फायदा रेशम सिंह को मिलता था।