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कोटा बढ़ने के बाद भी नहीं आई अभी तक साढे सात मीट्रिक टन ऑक्सीजन
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जिले में ऑक्सीजन को लेकर अभी भी लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि सरकार ने सिरसा में ऑक्सीजन का कोटा साढ़े सात मीट्रिक टन बढ़ा दिया है। कोटा बढ़ाए हुए दो दिन हो गए हैं, लेकिन सिरसा में अभी तक निर्धारित साढ़े सात मीट्रिक टन ऑक्सीजन नहीं आई। सरकार ने एक मई को सिरसा में ऑक्सीजन का कोटा दो टन से बढ़ाकर साढ़े सात मीट्रिक टन कर दिया था। रविवार को सिरसा में ज्वाला एजेंसी के पास करीब साढ़े चार मीट्रिक टन ऑक्सीजन आई थी। जबकि सोमवार को दोपहर दो बजे तक दो मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई आई। एजेंसी संचालक अनिल बांगा का कहना है कि अभी तक साढ़े सात मीट्रिक टन ऑक्सीजन नहीं आई है।
होम आइसोलेटड मरीजों को कम दी जा रही ऑक्सीजन : ऑक्सीजन सिलिंडर का टोटा चल रहा है। हिसार रोड से आए विक्की के पिता को सांस लेने में दिक्कत है। छोटा सिलिंडर लेकर आए। विक्की का कहना है कि उसे खुशी है कि छोटा सिलिंडर में ऑक्सीजन मिल गई। अब दस दिनों तक जरूरत नहीं पड़ेगी। शहीदांवाली गांव के भीमसैन का भाई भी होम आइसोलेटड है। ऑक्सीजन लेने आया है, लेकिन वह दोपहर तक इंतजार कर रहा था। जबकि डिंग से आए विनोद के पिता को कोविड है परंतु स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन्हें अस्पताल द्वारा दी जाने वाली पर्ची लेकर आने के लिए कहा। क्योंकि बिना चिकित्सक की पर्ची के ऑक्सीजन नहीं मिलती।
अस्पताल में दाखिल मरीजों को दी जा रही ऑक्सीजन : निजी और सरकारी अस्पताल में दाखिल मरीजों को ऑक्सीजन देने में पहल की जा रही है। क्योंकि एजेंसी के पास सिलिंडरों का टोटा है। अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर सेंट्रलाइज्ड किए हुए है, जिस कारण एक सिलिंडर से कई मरीजों को ऑक्सीजन दी जा सकती है। दूसरा घरों में एक बार सिलिंडर चला गया तो वह जल्दी वापस नहीं आता। इसलिए अस्पताल में दाखिल मरीजों को ऑक्सीजन देने की पहल की जाती है। साथ ही एजेंसी संचालक अब हर सिलिंडर पर अंकित नंबर और रिकार्ड मेंटेन कर रहे हैं। शाम को पूरे दिन के रिकार्ड को प्रशासनिक टीम द्वारा मिलान किया जाता है।
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रविवार को साढ़े चार मीट्रिक टन ऑक्सीजन सप्लाई आई थी। देर रात तक पता चलेगा कि सोमवार को कितनी सप्लाई आई है। -एनके गोयल, सीनियर ड्रग कंट्रोलर।
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होम आइसोलेटड मरीजों को कम दी जा रही ऑक्सीजन : ऑक्सीजन सिलिंडर का टोटा चल रहा है। हिसार रोड से आए विक्की के पिता को सांस लेने में दिक्कत है। छोटा सिलिंडर लेकर आए। विक्की का कहना है कि उसे खुशी है कि छोटा सिलिंडर में ऑक्सीजन मिल गई। अब दस दिनों तक जरूरत नहीं पड़ेगी। शहीदांवाली गांव के भीमसैन का भाई भी होम आइसोलेटड है। ऑक्सीजन लेने आया है, लेकिन वह दोपहर तक इंतजार कर रहा था। जबकि डिंग से आए विनोद के पिता को कोविड है परंतु स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन्हें अस्पताल द्वारा दी जाने वाली पर्ची लेकर आने के लिए कहा। क्योंकि बिना चिकित्सक की पर्ची के ऑक्सीजन नहीं मिलती।
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अस्पताल में दाखिल मरीजों को दी जा रही ऑक्सीजन : निजी और सरकारी अस्पताल में दाखिल मरीजों को ऑक्सीजन देने में पहल की जा रही है। क्योंकि एजेंसी के पास सिलिंडरों का टोटा है। अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर सेंट्रलाइज्ड किए हुए है, जिस कारण एक सिलिंडर से कई मरीजों को ऑक्सीजन दी जा सकती है। दूसरा घरों में एक बार सिलिंडर चला गया तो वह जल्दी वापस नहीं आता। इसलिए अस्पताल में दाखिल मरीजों को ऑक्सीजन देने की पहल की जाती है। साथ ही एजेंसी संचालक अब हर सिलिंडर पर अंकित नंबर और रिकार्ड मेंटेन कर रहे हैं। शाम को पूरे दिन के रिकार्ड को प्रशासनिक टीम द्वारा मिलान किया जाता है।
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रविवार को साढ़े चार मीट्रिक टन ऑक्सीजन सप्लाई आई थी। देर रात तक पता चलेगा कि सोमवार को कितनी सप्लाई आई है। -एनके गोयल, सीनियर ड्रग कंट्रोलर।