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जहां शिव कथा होती है, वहां नकारात्मकता खत्म हो जाती है : अश्विनी शास्त्री
Thu, 27 Aug 2026 10:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Thu, 27 Aug 2026 10:43 PM IST
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श्री शिव महापुराण कथा के दौरान कथा करते कथावचक अश्विनी कुमार शास्त्री
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बेसहारा गो अस्पताल में सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का चौथा दिन
फोटो-- 39
संवाद न्यूज एजेंसी
कालांवाली। नंद बाबा गो सेवा संस्थान की ओर से बेसहारा गो अस्पताल में सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के चौथे दिन वीरवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कथावाचक अश्विनी कुमार शास्त्री ने भगवान शिव की महिमा और श्री शिव महापुराण के महत्व पर प्रकाश डाला।
चौथे दिन कथावाचक अश्विनी कुमार शास्त्री ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का वर्णन किया। उन्होंने भगवान शिव के गृहस्थ जीवन को प्रेम, त्याग और पारिवारिक जीवन का आदर्श बताया। शास्त्री ने कहा कि माता पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे विवाह किया था।
शिव-पार्वती विवाह प्रसंग के दौरान महिलाओं ने मंगल गीत गाए। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उत्सव मनाया। अश्विनी कुमार शास्त्री ने कहा कि जहां शिव कथा होती है, वहां नकारात्मकता समाप्त हो जाती है। शिव नाम का स्मरण मन को शांति देता है। इससे जीवन के कष्टों से जूझने की शक्ति मिलती है।
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कथा का आयोजन और संदेश
अश्विनी कुमार शास्त्री ने मनुष्य को अहंकार त्यागकर भगवान शिव की तरह सरल जीवन जीने का प्रयास करने को कहा। संस्थान में 23 से 30 अगस्त तक प्रतिदिन दोपहर साढ़े तीन बजे से शाम साढ़े छह बजे तक कथा आयोजित की जा रही है। 30 अगस्त को सुबह साढ़े आठ बजे हवन-यज्ञ होगा। इसके बाद सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक कथा होगी। कथा के समापन पर अटूट लंगर बरताया जाएगा।
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कालांवाली। नंद बाबा गो सेवा संस्थान की ओर से बेसहारा गो अस्पताल में सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के चौथे दिन वीरवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कथावाचक अश्विनी कुमार शास्त्री ने भगवान शिव की महिमा और श्री शिव महापुराण के महत्व पर प्रकाश डाला।
चौथे दिन कथावाचक अश्विनी कुमार शास्त्री ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का वर्णन किया। उन्होंने भगवान शिव के गृहस्थ जीवन को प्रेम, त्याग और पारिवारिक जीवन का आदर्श बताया। शास्त्री ने कहा कि माता पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे विवाह किया था।
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शिव-पार्वती विवाह प्रसंग के दौरान महिलाओं ने मंगल गीत गाए। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उत्सव मनाया। अश्विनी कुमार शास्त्री ने कहा कि जहां शिव कथा होती है, वहां नकारात्मकता समाप्त हो जाती है। शिव नाम का स्मरण मन को शांति देता है। इससे जीवन के कष्टों से जूझने की शक्ति मिलती है।
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कथा का आयोजन और संदेश
अश्विनी कुमार शास्त्री ने मनुष्य को अहंकार त्यागकर भगवान शिव की तरह सरल जीवन जीने का प्रयास करने को कहा। संस्थान में 23 से 30 अगस्त तक प्रतिदिन दोपहर साढ़े तीन बजे से शाम साढ़े छह बजे तक कथा आयोजित की जा रही है। 30 अगस्त को सुबह साढ़े आठ बजे हवन-यज्ञ होगा। इसके बाद सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक कथा होगी। कथा के समापन पर अटूट लंगर बरताया जाएगा।