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Sirsa News: सीडीएलयू में बनाया सतगुरु राम सिंह सभागार

Mon, 19 May 2025 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Mon, 19 May 2025 11:20 PM IST
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Satguru Ram Singh Auditorium built in CDLU
सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय (सीडीएलयू) ने सोमवार को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक जागरूकता और स्वदेशी के प्रेरणास्रोत सतगुरु राम सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित दी। इसलिए विवि के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने विवि के बहुउद्देश्यीय सभागार (एमपी हॉल) का नाम ‘सतगुरु राम सिंह सभागार’ के नाम पर रखने की घोषणा की।
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विवि के कार्यकारी अभियंता राकेश गोदारा ने बताया कि विवि में विभिन्न भवनों के नामकरण की प्रक्रिया के तहत यह निर्णय लिया गया है। इससे पहले टीचिंग ब्लॉक-5 का नाम माता अहिल्याबाई होल्कर भवन रखा गया है। अब विवि परिसर में ‘सतगुरु राम सिंह सभागार’ के रूप में एक और प्रेरक स्थल जुड़ गया है।
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कुलपति प्रो. बिश्नोई ने कहा कि सतगुरु राम सिंह 19वीं सदी के महान संत, समाज-सुधारक और स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत थे। उन्होंने नामधारी आंदोलन की शुरुआत कर स्वदेशी, बहिष्कार आंदोलन, नारी सशक्तीकरण, बाल विवाह विरोध, नशामुक्ति और जातिवाद उन्मूलन जैसे अनेक सामाजिक सुधारों का नेतृत्व किया। उनके अनुयायी उन्हें भारत की आजादी की पहली संगठित क्रांति का जनक मानते हैं।
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कुलपति प्रो. बिश्नोई ने कहा कि सतगुरु राम सिंह धार्मिक संत और सामाजिक क्रांति के अग्रदूत भी थे। इसलिए विवि परिसर में उनके नाम पर सभागार स्थापित करना नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, सामाजिक न्याय और आत्मनिर्भरता का संदेश देगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और प्रेरणादायक इतिहास से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसी दिशा में ‘सतगुरु राम सिंह सभागार’ सार्थक पहल है।




देश की आजादी में रहा था अहम योगदान



कुलपति प्रो. बिश्नोई ने बताया कि सतगुरु राम सिंह वसंत पंचमी के दिन तीन फरवरी, 1816 ईस्वी में जिला लुधियाना, पंजाब के गांव राइयां भैणी में एक साधारण कृषक परिवार में जन्मे थे। उन्होंने भारत को ब्रिटिश उपनिवेशवाद से मुक्त कराने के लिए स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया। इसके तहत उन्होंने पंजाब की धरती से रूस तक क्रांतिकारी विचारधारा का प्रसार किया। गुरु राम सिंह ने पंजाबभर में अपने कार्यक्रमों के विस्तार के लिए 22 सूबे नियुक्त किए थे। उनमें से सूबा खुशहाल सिंह गांव थराज, जिला सिरसा के निवासी थे। सूबा सुद्ध सिंह गांव मंढोर, जिला अंबाला के निवासी थे। गांव बड़ोपल, जिला फतेहाबाद निवासी मालवा के अदालती सूबा ज्ञानी रतन सिंह को रायकोट में फांसी दी गई थी। कूका सैनिक प्रशिक्षण के लिए कश्मीर के राजा रणबीर सिंह ने 250 कूकाओं को भर्ती किया था। इनके कमांडर साढौरा जिला यमुनानगर निवासी सरदार हीरा सिंह लंबू थे।
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