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Sirsa News: संतनगर के गुरतेज की कैंसर से माैत, ग्रामीण बोले- दूषित पानी पीने से बढ़ रही है बीमारी
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घर पर शोक व्यक्त करते हुए मौजिज लोग।
रानियां। गांव संतनगर में रविवार को गुरतेज सिंह की कैंसर से मौत हो गई। इसके बाद परिजनों व ग्रामीणों में रोष फैल गया। इस दौरान भारी संख्या में ग्रामीण मृतक के घर पर एकत्रित हो गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्हें स्वच्छ पेयजल नहीं मिल रहा। इस कारण ग्रामीण कैंसर का शिकार हो रहे हैं। मृतक के पुत्र हाकम सिंह व अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में कैंसर के कारण परिवार के तीन लोगों को खोया है।
ग्रामीणों के अनुसार, गंदे पानी पीने से गांव में 10 से 12 कैंसर के मरीज अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वे पिछले छह सालों ने गांव में पीने के लिए भाखड़ा का पानी उपलब्ध करवाने के लिए ग्राम पंचायत, पूर्व कैबिनेट मंत्री चौधरी रणजीत सिंह और जन स्वास्थ्य एवं सिंचाई विभाग के अधिकारियों से मिल चुके हैं। अभी तक उनके घरों तक पीने के लिए भाखड़ा का स्वच्छ पानी नहीं पहुंचा है।
हाकम सिंह ने बताया कि रणजीत सिंह के कैबिनेट मंत्री बनने के बाद पहली बार गांव में पहुंचने पर संतनगर को भाखड़ा का पानी उपलब्ध करवाने की मांग रखी। उनके कार्यकाल के पश्चात जलघर बनकर तैयार हो गया, लेकिन उसे अभी तक चालू नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि संतनगर की पंचायत के गांव दलीप नगर में संतनगर को भाखड़ा का पानी उपलब्ध करवाने के लिए पांच एकड़ में जलघर बनकर तैयार है। दलीप नगर से संतनगर तक तीन किलोमीटर लंबी पाइपलाइन डालकर गांव में एक बूस्टिंग स्टेशन भी बन चुका है। ग्रामीणों की मांग है कि ग्राम पंचायत व प्रशासन जल्द से जल्द जलघर को चालू करवाए और उनके घरों तक भाखड़ा का पानी पहुंचाया जाए। हाकम सिंह ने कहा कि बूस्टिंग स्टेशन के लिए वह अपने खर्चे पर पंचायत व विभाग को जमीन देने के लिए तैयार है।
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हाईकोर्ट में रिट लगाने के बाद रुका बूस्टिंग स्टेशन का कार्य
संतनगर सरपंच दल सिंह ने बताया कि गांव के पास पंचायती जगह कम होने के चलते संतनगर का जलघर दलीप नगर में बनाया गया है। जो गांव से तीन किलोमीटर दूर है। गांव में हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए दो बूस्टिंग स्टेशनों की जरूरत है। एक बूस्टिंग स्टेशन बनकर तैयार है, लेकिन दूसरा पंचायती जगह न होने के चलते ग्राम पंचायत की ओर से गांव के श्मशान भूमि में बनाने का प्रस्ताव डाला गया। इसके बाद जनस्वास्थ्य एवं सिंचाई विभाग से एक्सईएन भानू शर्मा ने लोगों को समझाकर बूस्टिंग स्टेशन बनाने का कार्य शुरू करवाया। अब गांव के एक व्यक्ति ने श्मशान भूमि में बूस्टिंग स्टेशन बनाने को लेकर हाईकोर्ट में रिट लगा दी। इस कारण कार्य रुक गया और पंचायत के पास अन्य कोई जगह उपलब्ध नहीं है। जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आता पंचायत कुछ नहीं कर सकती।
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ग्रामीणों के अनुसार, गंदे पानी पीने से गांव में 10 से 12 कैंसर के मरीज अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वे पिछले छह सालों ने गांव में पीने के लिए भाखड़ा का पानी उपलब्ध करवाने के लिए ग्राम पंचायत, पूर्व कैबिनेट मंत्री चौधरी रणजीत सिंह और जन स्वास्थ्य एवं सिंचाई विभाग के अधिकारियों से मिल चुके हैं। अभी तक उनके घरों तक पीने के लिए भाखड़ा का स्वच्छ पानी नहीं पहुंचा है।
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हाकम सिंह ने बताया कि रणजीत सिंह के कैबिनेट मंत्री बनने के बाद पहली बार गांव में पहुंचने पर संतनगर को भाखड़ा का पानी उपलब्ध करवाने की मांग रखी। उनके कार्यकाल के पश्चात जलघर बनकर तैयार हो गया, लेकिन उसे अभी तक चालू नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि संतनगर की पंचायत के गांव दलीप नगर में संतनगर को भाखड़ा का पानी उपलब्ध करवाने के लिए पांच एकड़ में जलघर बनकर तैयार है। दलीप नगर से संतनगर तक तीन किलोमीटर लंबी पाइपलाइन डालकर गांव में एक बूस्टिंग स्टेशन भी बन चुका है। ग्रामीणों की मांग है कि ग्राम पंचायत व प्रशासन जल्द से जल्द जलघर को चालू करवाए और उनके घरों तक भाखड़ा का पानी पहुंचाया जाए। हाकम सिंह ने कहा कि बूस्टिंग स्टेशन के लिए वह अपने खर्चे पर पंचायत व विभाग को जमीन देने के लिए तैयार है।
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हाईकोर्ट में रिट लगाने के बाद रुका बूस्टिंग स्टेशन का कार्य
संतनगर सरपंच दल सिंह ने बताया कि गांव के पास पंचायती जगह कम होने के चलते संतनगर का जलघर दलीप नगर में बनाया गया है। जो गांव से तीन किलोमीटर दूर है। गांव में हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए दो बूस्टिंग स्टेशनों की जरूरत है। एक बूस्टिंग स्टेशन बनकर तैयार है, लेकिन दूसरा पंचायती जगह न होने के चलते ग्राम पंचायत की ओर से गांव के श्मशान भूमि में बनाने का प्रस्ताव डाला गया। इसके बाद जनस्वास्थ्य एवं सिंचाई विभाग से एक्सईएन भानू शर्मा ने लोगों को समझाकर बूस्टिंग स्टेशन बनाने का कार्य शुरू करवाया। अब गांव के एक व्यक्ति ने श्मशान भूमि में बूस्टिंग स्टेशन बनाने को लेकर हाईकोर्ट में रिट लगा दी। इस कारण कार्य रुक गया और पंचायत के पास अन्य कोई जगह उपलब्ध नहीं है। जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आता पंचायत कुछ नहीं कर सकती।