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Sirsa News: यूरिया बांटने के लिए नहीं बनाए नियम किसानों के हाथों पर लिख दिए नंबर
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निजी दुकान पर खाद के लिए लाइन में लगे किसान। संवाद
- फोटो : Sirsa
सिरसा। यूरिया वितरण को लेकर किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। सोमवार को खुली खाद का वितरण किया जाना था लेकिन किसी ने कूपन बांटने की अफवाह फैला दी और नंबर लगा दिए। ऐसे में किसान नंबर लेकर निश्चिंत होकर बैठ गए लेकिन जब अन्य किसान जाने लगे तो बहस शुरू हो गई। बाद में व्यवस्था बनानी पड़ी। सोमवार को 3500 बैग वितरित किए गए।
यूरिया को लेेकर किसान पूर्व में निर्धारित सूचना के अनुसार सोमवार सुबह 6 बजे ही अनाज मंडी स्थित सरकारी खरीद केंद्र पर पहुंच गए। प्रशासन की तरफ से यूरिया खाद वितरण पर किसी प्रकार के नियम नहीं बनाए गए थे परंतु किसी ने किसानों को नंबर के अनुसार खाद देने की सूचना फैला दी। इस दौरान करीब 250 किसानों ने अपने हाथों पर नंबर भी लगवा लिए। अब किसान उसी अनुसार खाद का इंतजार करने लगे, परंतु जब बिना नंबर वाले किसानों को पहले खाद मिलने लगी तो नंबर लगे किसानों ने हल्ला करना शुरू कर दिया। हालांकि खाद पर्याप्त होने के बावजूद किसानों में खाद न मिलने की चिंता बनी रही। करीब डेढ़ बजे तक अनाज मंडी स्थित किसान सुविधा केंद्र व निजी दुकान पर किसानों की भारी भीड़ के चलते खाद वितरण नहीं हो पा रहा था। क्योंकि नंबर वाले व बिना नंबर वाले किसान आपस में बहसबाजी में लगे हुए थे। इस दौरान कृषि विभाग के एडीओ सुनील कुमार किसानों को बार-बार समझाते रहे परंतु किसान नंबर के आधार पर खाद पहले देने की जिद्द में लगे रहे। काफी मशक्कत के बाद किसानों को समझाया गया और शाम तक स्थिति सामान्य हो पाई।
शाम तक 3500 बैग किए गए वितरित
पहले दिन 4 हजार बैग यूरिया खाद का रैक लगाया गया था। सुबह के समय खाद वितरण का कार्य काफी धीमा रहा, क्योंकि किसान व खरीद केंद्रों के कर्मचारियों को बार-बार बहस होती रही। वहीं शाम 4 बजे तक करीब 3500 बैग खाद वितरित की जा चुकी थी।
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विभाग की तरफ से किसानों को खाद वितरण करने के लिए कोई नियम नहीं बनाए गए थे। लेकिन इसके बावजूद किसानों ने अपने हाथों पर नंबर लगवा लिए, जिसके बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। पहले तो किसानों में भ्रम की स्थिति बनी रही लेकिन समझाने के बाद सब सामान्य हो गया।
-सुनील कुमार, एडीओ कृषि विभाग।
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यूरिया को लेेकर किसान पूर्व में निर्धारित सूचना के अनुसार सोमवार सुबह 6 बजे ही अनाज मंडी स्थित सरकारी खरीद केंद्र पर पहुंच गए। प्रशासन की तरफ से यूरिया खाद वितरण पर किसी प्रकार के नियम नहीं बनाए गए थे परंतु किसी ने किसानों को नंबर के अनुसार खाद देने की सूचना फैला दी। इस दौरान करीब 250 किसानों ने अपने हाथों पर नंबर भी लगवा लिए। अब किसान उसी अनुसार खाद का इंतजार करने लगे, परंतु जब बिना नंबर वाले किसानों को पहले खाद मिलने लगी तो नंबर लगे किसानों ने हल्ला करना शुरू कर दिया। हालांकि खाद पर्याप्त होने के बावजूद किसानों में खाद न मिलने की चिंता बनी रही। करीब डेढ़ बजे तक अनाज मंडी स्थित किसान सुविधा केंद्र व निजी दुकान पर किसानों की भारी भीड़ के चलते खाद वितरण नहीं हो पा रहा था। क्योंकि नंबर वाले व बिना नंबर वाले किसान आपस में बहसबाजी में लगे हुए थे। इस दौरान कृषि विभाग के एडीओ सुनील कुमार किसानों को बार-बार समझाते रहे परंतु किसान नंबर के आधार पर खाद पहले देने की जिद्द में लगे रहे। काफी मशक्कत के बाद किसानों को समझाया गया और शाम तक स्थिति सामान्य हो पाई।
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शाम तक 3500 बैग किए गए वितरित
पहले दिन 4 हजार बैग यूरिया खाद का रैक लगाया गया था। सुबह के समय खाद वितरण का कार्य काफी धीमा रहा, क्योंकि किसान व खरीद केंद्रों के कर्मचारियों को बार-बार बहस होती रही। वहीं शाम 4 बजे तक करीब 3500 बैग खाद वितरित की जा चुकी थी।
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विभाग की तरफ से किसानों को खाद वितरण करने के लिए कोई नियम नहीं बनाए गए थे। लेकिन इसके बावजूद किसानों ने अपने हाथों पर नंबर लगवा लिए, जिसके बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। पहले तो किसानों में भ्रम की स्थिति बनी रही लेकिन समझाने के बाद सब सामान्य हो गया।
-सुनील कुमार, एडीओ कृषि विभाग।