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अच्छी शिक्षा के दावों पर सवाल, विद्यालयों में पढ़ने के लिए पिछले दो साल से नहीं पहुंच रही पुस्तकें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 18 Apr 2022 11:39 PM IST
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Questions on claims of good education, books are not reaching for last two years to study in schools
सिरसा से सरकारी स्कूल से छुट्टी होने पर घर वापिस जाते विद्यार्थी। - फोटो : Sirsa
सिरसा। हरियाणा सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में शिक्षा के दावे धरातल पर कमजोर दिखाई पड़ रहे हैं। आधुनिक सुविधाओं की दौड़ में बच्चों के पास पढ़ने के लिए किताबें नहीं हैं। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पिछले 18 दिन से नए सत्र की पढ़ाई करवाई जा रही है और शिक्षा विभाग की अव्यवस्था के कारण विद्यार्थियों की पुरानी किताबों से काम चला रहे हैं।
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दो साल पहले वर्ष-2020 की किताबों से बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। विद्यार्थियों से प्राप्त किताबें भी बच्चों में पूरी नहीं पड़ रही हैं। जिला में 845 सरकारी स्कूल हैं। जिसमें से 524 प्राइमरी स्कूल है। सभी स्कूलों के शिक्षकों को मुख्यालय का मुंह ताकना पड़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें अपने स्तर पर पुस्तकों की व्यवस्था करनी पड़ रही है। कक्षा पास कर चुके विद्यार्थियों से पुस्तकें मंगवाकर बच्चों को इस समय पढ़ाई करवा रहे हैं। जिससे पुस्तकें भी कम पड़ रही है। जिसके कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
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बेहतर शिक्षा के दावों में पढ़ाई हो रही प्रभावित
सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों की तरह बनाने और निजी स्कूलों की तरफ से बच्चों के अभिभावकों को एक दुकान से किताबें खरीदने के लिए मजबूर करने वाले स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई की बात की जाती है। बावजूद सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे स्कूलों में किताबों के लिए तरस रहे हैं। विभाग के पास अब तक सरकारी स्कूलों में बच्चों को देने के लिए किताबें नहीं पहुंची हैं। इससे जहां अध्यापकों को परेशानी हो रही है। वहीं अभिभावक भी शिक्षा विभाग की कारगुजारी को लेकर परेशान हैं।
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पिछले साल भी नहीं पहुंची थी स्कूलों में किताबें
पिछले शिक्षा सत्र 2020-21 में भी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए किताबें नहीं पहुंची थी। जिसके कारण अब शिक्षकों को पुरानी किताबें जुटाने भी कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पिछले साल पुस्तकों के लिए विद्यार्थियों के खाते में निदेशालय द्वारा 250 रुपये डाले गए थे। लेकिन बाजारों में भी पुस्तकें उपलब्ध नहीं थी जिसके कारण कोई भी विद्यार्थी किताबें खरीद नहीं पाया था।

मजबूरी में निजी दुकानों से ले रहे टेक्स्ट बुक व वर्क बुक
सरकारी स्कूलों में किताबें न मिलने की सूरत में विद्यार्थियों को निजी दुकानों पर मोटी राशि खर्च करनी पड़ रही है। सरकारी स्कूलों में किताबें पहुंचने की व्यवस्था कमजोर हो सकती है। लेकिन निजी दुकानों पर किताबें पहुंच गई हैं और लचर व्यवस्था के चलते विद्यार्थी मोटी राशि खर्च करने को मजबूर हैं। जो विद्यार्थी किताबें नहीं खरीद सकते, उन्हें जो किताबों उपलब्ध हैं उन्ही से पढ़ाई करनी पड़ रही है।
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