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एक मार्च से भूख हड़ताल पर बैठेंगे दस किसान
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Mon, 29 Feb 2016 01:33 AM IST
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मुआवजे, बिजली के दामों में कमी और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू
करने की मांगों को लेकर धरने पर बैठे किसानों ने अब अपना रुख कड़ा करते हुए
अब एक मार्च से भूख हड़ताल पर बैठने का निर्णय लिया है। वहीं एक मार्च को
किसानों की लघु सचिवालय में ही महापंचायत होगी, जिसके लिए जिलेभर के किसान
नेता गांवों में अभियान चलाए हुए हैं।
किसानों ने एक स्वर में कहा कि ये लड़ाई किसी एक किसान की नहीं, बल्कि जिलेभर के किसानों की है। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों में एकजुटता नहीं होगी, तब तक उनका हक नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार व प्रशासन की नीतियों से नहीं लगता कि किसानों को खराब हुई फसलों का मुआवजा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि वे किसी भी अधिकारी से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन जब तक लिखित रूप में कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे। किसानों का कहना है कि 15 से 20 दिनों में तो किसी भी मारपीट के मामले में बेल हो जाती है, लेकिन वे पिछले करीब 20 दिनों से यहां बैठे हैं, लेकिन किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने आकर उनकी सुध नहीं ली है। किसानों का कहना है कि किसानों के अनेक दल गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं और महापंचायत के लिए न्यौता दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार किसान हितैषी होने का दिखावा करती है, वहीं अब तक के सरकार के रूख को देखकर ये कतई नहीं कहा जा सकता की सरकार किसान हितैषी हो सकती है। उन्होंने बताया कि लगातार दो फसलें खराब होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।
उनके सामने परिवार के पालन-पोषण की भी समस्या खड़ी हो गई है। इस मौके पर दर्जनों गांवों से आए हुए किसान धनपत राम, प्रकाश सिंह, रामकुमार, धर्मपाल, जगा सिंह, रामस्वरूप, आदराम, सुखदेव सिंह, ख्यालीराम, रणजीत सिंह, मनफूल, गांधीराम, सुदर्शन सिंह, रामप्रताप, प्रहलाद सिंह, राजकुमार, धन्नाराम आदि उपस्थित थे।
किसानों ने एक स्वर में कहा कि ये लड़ाई किसी एक किसान की नहीं, बल्कि जिलेभर के किसानों की है। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों में एकजुटता नहीं होगी, तब तक उनका हक नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार व प्रशासन की नीतियों से नहीं लगता कि किसानों को खराब हुई फसलों का मुआवजा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि वे किसी भी अधिकारी से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन जब तक लिखित रूप में कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे। किसानों का कहना है कि 15 से 20 दिनों में तो किसी भी मारपीट के मामले में बेल हो जाती है, लेकिन वे पिछले करीब 20 दिनों से यहां बैठे हैं, लेकिन किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने आकर उनकी सुध नहीं ली है। किसानों का कहना है कि किसानों के अनेक दल गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं और महापंचायत के लिए न्यौता दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार किसान हितैषी होने का दिखावा करती है, वहीं अब तक के सरकार के रूख को देखकर ये कतई नहीं कहा जा सकता की सरकार किसान हितैषी हो सकती है। उन्होंने बताया कि लगातार दो फसलें खराब होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।
उनके सामने परिवार के पालन-पोषण की भी समस्या खड़ी हो गई है। इस मौके पर दर्जनों गांवों से आए हुए किसान धनपत राम, प्रकाश सिंह, रामकुमार, धर्मपाल, जगा सिंह, रामस्वरूप, आदराम, सुखदेव सिंह, ख्यालीराम, रणजीत सिंह, मनफूल, गांधीराम, सुदर्शन सिंह, रामप्रताप, प्रहलाद सिंह, राजकुमार, धन्नाराम आदि उपस्थित थे।