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प्रदूषण विभाग ने जिले में दो फैक्ट्रियों को किया सील
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pollution departmrnt seized two factories
- फोटो : Sirsa
प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने जिले में स्थित दो फैक्टरी संचालकों को नोटिस देने के बाद भी व्यवस्था में सुधार ना होने के कारण विभाग ने फैक्टरियों को सील कर दिया है। प्रदूषण विभाग ने दोनों फैक्टरियों का औचक निरीक्षण किया था, जिस दौरान खामियां पाई गई थी। खामियों का नोटिस फैक्टरी संचालक को देने के बाद विभाग ने जवाब तलब किया था। जवाब से असंतुष्ट होकर विभागीय अधिकारियों ने शुक्रवार को फैक्टरियों को सील कर दिया।
शुक्रवार को प्रदूषण विभाग के वैज्ञानिक डॉ. सुनील कुमार श्योराण अपनी टीम के साथ गांव माधोसिंघाना में स्थित एक फैक्टरी एमडी एग्रोटेक में पहुंचते ही टीम ने फैक्टरी के बिजली पानी का कनेक्शन काट दिया और फैक्टरी में रखा जेनरेटर भी सील कर दिया। माधोसिंघाना में फैक्टरी सील करने के बाद टीम सिरसा के प्रीत नगर गली नंबर 11 में पहुंची और वहां पर चल रही फैक्टरी जय हनुमान फाउंड्री में पहुंची और फैक्टरी को सील कर दिया।
इन खामियों का मिला था नोटिस
बीती 23 दिसंबर को जब प्रदूषण विभाग की टीम ने माधोसिंघाना में स्थित फैक्टरी का निरीक्षण किया तो पाया की लॉगबुक और एपीसीडी में कोई डाटा नहीं डाला गया था। टीम ने देखा कि फैक्टरी में ट्यूबवेल के पानी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है और वहीं फैक्टरी कर्मचारियों के पास पानी के प्रयोग का भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। टीम ने पाया कि फैक्टरी में बिजली के लिए लगाये गए जरनेटर की ऊंचाई भी कम है और साइलेंसर भी कम ऊंचाई के साथ दीवार से लगा हुआ है। टीम ने नोटिस के दौरान बताया कि फैक्टरी में प्लास्टिक का गोदाम पाया गया। टीम ने मौके पर पाया कि फैक्टरी से ट्रांसपोर्ट हो रहे माल के कारण पूरी सड़क पर मिट्टी बिखरी रहती है, जिस कारण आने वालों के लिए परेशानी बनती है। वहीं टीम ने मौके पर देखा कि काम करने वाले कर्मचारियों ने कोई भी सुरक्षा उपकरण नहीं डाला हुआ है, जिससे एक बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं सिरसा के प्रीतनगर के गली नंबर 11 में स्थित एक फैक्टरी संचालित की जा रही थी जो आवासीय कॉलोनी के बीच थी। जिसकी जानकारी प्रदूषण विभाग को मिली तो करीब बीते दो माह पहले फैक्टरी संचालक को नोटिस दिया गया कि वह अपना प्रदूषण स्तर कम करें नहीं तो उन्हें फैक्टरी बंद करनी होगी। जिस पर प्रदूषण विभाग ने फैक्टरी मालिक के नाम एक नोटिस जारी कर दिया। नोटिस का जवाब उचित न पाने पर प्रदूषण विभाग के अधिकारियों ने फैक्टरी को ताला लगाकर सील कर दिया।
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किसान पहले भी कर चुके हैं विरोध
गांव माधोसिंघाना के किसान फैक्टरी उनके खेतों के पास होने के कारण विरोध जताते आए हैं। किसानों ने फैक्टरी का विरोध करते हुए उपायुक्त और कष्ट निवारण समिति में गृह मंत्री अनिल विज के समक्ष भी यह मुद्दा उठाया था। किसानों का कहना था कि फैक्टरी संचालक फैक्टरी का पानी और कैमिकल पास के ही नाले में डाल देते हैं, जिससे पानी होकर किसानों के खेतों में जाता है। जो फसलों को खराब करता है। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने
पहले भी दे चुके हैं नोटिस
वैज्ञानिक डॉ. सुनील कुमार श्योराण ने बताया कि दोनों फैक्टरियों को प्रदूूषण विभाग ने पहले ही नोटिस दे रखा था। जिसका फैक्टरी संचालकों ने संतोषजनक जवाब विभाग को नहीं भेजा था। दोनों फैक्टरी संचालकों ने नोटिस का जवाब भेजते हुए लिखा था कि जो खामियां जांच में पाई गई हैं वह हम ठीक कर रहे हैं। जो जवाब विभाग को पूर्ण रूप से संतोषजनक नहीं लगा। जिसके आधार पर विभाग ने शुक्रवार को दोनों फैक्टरियों को बंद कर दिया।
प्रदूषण विभाग ने दोनों फैक्टरियों को नोटिस भेजा था। जिसका जवाब फैक्टरी संचालकों ने संतोषजनक नहीं दिया। जिस कारण से विभाग के आदेशानुसार दोनों फैक्टरियों को सील कर दिया गया है। - डॉ. सुनील कुमार श्योराण, वैज्ञानिक प्रदूषण विभाग।
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शुक्रवार को प्रदूषण विभाग के वैज्ञानिक डॉ. सुनील कुमार श्योराण अपनी टीम के साथ गांव माधोसिंघाना में स्थित एक फैक्टरी एमडी एग्रोटेक में पहुंचते ही टीम ने फैक्टरी के बिजली पानी का कनेक्शन काट दिया और फैक्टरी में रखा जेनरेटर भी सील कर दिया। माधोसिंघाना में फैक्टरी सील करने के बाद टीम सिरसा के प्रीत नगर गली नंबर 11 में पहुंची और वहां पर चल रही फैक्टरी जय हनुमान फाउंड्री में पहुंची और फैक्टरी को सील कर दिया।
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इन खामियों का मिला था नोटिस
बीती 23 दिसंबर को जब प्रदूषण विभाग की टीम ने माधोसिंघाना में स्थित फैक्टरी का निरीक्षण किया तो पाया की लॉगबुक और एपीसीडी में कोई डाटा नहीं डाला गया था। टीम ने देखा कि फैक्टरी में ट्यूबवेल के पानी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है और वहीं फैक्टरी कर्मचारियों के पास पानी के प्रयोग का भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। टीम ने पाया कि फैक्टरी में बिजली के लिए लगाये गए जरनेटर की ऊंचाई भी कम है और साइलेंसर भी कम ऊंचाई के साथ दीवार से लगा हुआ है। टीम ने नोटिस के दौरान बताया कि फैक्टरी में प्लास्टिक का गोदाम पाया गया। टीम ने मौके पर पाया कि फैक्टरी से ट्रांसपोर्ट हो रहे माल के कारण पूरी सड़क पर मिट्टी बिखरी रहती है, जिस कारण आने वालों के लिए परेशानी बनती है। वहीं टीम ने मौके पर देखा कि काम करने वाले कर्मचारियों ने कोई भी सुरक्षा उपकरण नहीं डाला हुआ है, जिससे एक बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं सिरसा के प्रीतनगर के गली नंबर 11 में स्थित एक फैक्टरी संचालित की जा रही थी जो आवासीय कॉलोनी के बीच थी। जिसकी जानकारी प्रदूषण विभाग को मिली तो करीब बीते दो माह पहले फैक्टरी संचालक को नोटिस दिया गया कि वह अपना प्रदूषण स्तर कम करें नहीं तो उन्हें फैक्टरी बंद करनी होगी। जिस पर प्रदूषण विभाग ने फैक्टरी मालिक के नाम एक नोटिस जारी कर दिया। नोटिस का जवाब उचित न पाने पर प्रदूषण विभाग के अधिकारियों ने फैक्टरी को ताला लगाकर सील कर दिया।
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किसान पहले भी कर चुके हैं विरोध
गांव माधोसिंघाना के किसान फैक्टरी उनके खेतों के पास होने के कारण विरोध जताते आए हैं। किसानों ने फैक्टरी का विरोध करते हुए उपायुक्त और कष्ट निवारण समिति में गृह मंत्री अनिल विज के समक्ष भी यह मुद्दा उठाया था। किसानों का कहना था कि फैक्टरी संचालक फैक्टरी का पानी और कैमिकल पास के ही नाले में डाल देते हैं, जिससे पानी होकर किसानों के खेतों में जाता है। जो फसलों को खराब करता है। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने
पहले भी दे चुके हैं नोटिस
वैज्ञानिक डॉ. सुनील कुमार श्योराण ने बताया कि दोनों फैक्टरियों को प्रदूूषण विभाग ने पहले ही नोटिस दे रखा था। जिसका फैक्टरी संचालकों ने संतोषजनक जवाब विभाग को नहीं भेजा था। दोनों फैक्टरी संचालकों ने नोटिस का जवाब भेजते हुए लिखा था कि जो खामियां जांच में पाई गई हैं वह हम ठीक कर रहे हैं। जो जवाब विभाग को पूर्ण रूप से संतोषजनक नहीं लगा। जिसके आधार पर विभाग ने शुक्रवार को दोनों फैक्टरियों को बंद कर दिया।
प्रदूषण विभाग ने दोनों फैक्टरियों को नोटिस भेजा था। जिसका जवाब फैक्टरी संचालकों ने संतोषजनक नहीं दिया। जिस कारण से विभाग के आदेशानुसार दोनों फैक्टरियों को सील कर दिया गया है। - डॉ. सुनील कुमार श्योराण, वैज्ञानिक प्रदूषण विभाग।

pollution departmrnt seized two factories- फोटो : Sirsa