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पिटते किसान और उजड़ती खेती के लिए मोदी सरकार जिम्मेदार : सुरजीत सिंह
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Sat, 27 Aug 2016 11:50 PM IST
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खेती
- फोटो : ब्यूरो
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पिटते किसान और उजड़ती खेती केंद्र और राज्य सरकार के लिए चिंता का विषय नही है, दोनों ही सरकारों को देश के औद्योगिक घरानों के हितों की चिंता सता रही है। ये शब्द अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान सुरजीत सिंह ने किसान विश्राम गृह में किसान सभा की ओर से आयोजित किसान सम्मेलन में उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए कहे।
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सुरजीत सिंह ने कहा कि किसान निरोधी नीतियों की बजह से देश में कृषि संकट बढ़ रहा है, किसानों में कर्ज बढ़ने की वजह से आत्महत्या का आंकड़ा दिनों दिन बढ़ रहा है। हर आधे घंटे के बाद एक किसान आत्महत्या कर रहा है। किसान नेता ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के राज में किसानों द्वारा की जाने वाली आत्महत्या की घटनाओं की बढ़ोतरी हुई है।
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उन्होंने ने कहा कि मोदी सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू न करके देश के किसानों के साथ न भूलने वाला धोखा किया है। जिला सचिव राजकुमार शेखुपुरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर सिरसा जिला के किसानों के केसीसी एकाउंट से जबरन करोड़ों की राशि निकालकर रिलायंस कंपनी को मालामाल कर दिया गया है।
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उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के एकाउंट से निकाली गई राशि तुरंत वापस करे। किसान नेता ने आरोप लगाया कि इस बीमा योजना में अपनाए गए प्रावधानों के मुताबिक फसल बर्बाद होने की स्थिति में भी किसानों को एक पैसे का मुआवजा नही मिलेगा बल्कि किसान के एकाउंट से प्रतिवर्ष दो बार हजारों रुपये जबरन निकाले जाएंगे।
किसान नेता ने कहा कि सरकार इस तरह की लुटेरी बीमा योजना को रद करें और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट मे सुझाए गए तौर तरीकों के मुताबिक प्रति एकड़ का बीमा सरकार स्वयं करे। सम्मेलन में प्रस्ताव पारित करके सरकार से मांग की गई कि डॉ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाए, फसलों की उत्पादन लागत से डेढ़ गुणा अधिक मूल्यों पर फसलों की खरीद सुनिश्चित की जाए, सभी खेतों को भाखड़ा का पानी उपलब्ध करवाया जाए, सभी किसानो व मजदूरों को कर्ज मुक्त किया जाए व आवारा पशुओं की समस्या का स्थाई समाधान निकाला जाए।
सम्मेलन के आखरी सत्र में 15 सदस्य तहसील कमेटी का चुनाव किया गया। सर्वसम्मति से सतनाम चंद धनूर को प्रधान, रणजीत घोड़ावाली, दानाराम नंबरदार को उपप्रधान, राजेंद्र बालासर को सचिव, मोहर सिंह को सहसचिव, जोहरीलाल को कोषाध्यक्ष चुना गया। मौके पर ओपी सुथार, राजेंद्र बालासर, सतनाम चंद और मास्टर जोहरी राम, राजेंद्र दुसाद, सुलतान ढाका, गंगाजल कस्वां, सुखवीर प्रेमी, विनोद बिरड़ा, विनोद सरपंच, रणजीत घोड़ावाली, महेंद्र सिंह कुस्सर, जसवीर सिंह सुल्तानपुरिया सहित अन्य मौैजूद थे।