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राजनीतिक उबाल : कृषि बिल के खिलाफ आज महापंचायत करेगा गांव ढूकड़ा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 09 Oct 2021 11:21 PM IST
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Political boil: Village Dhukda will conduct Mahapanchayat against agriculture bill today
गांव ढूकड़ा का ग्राम सचिवालय। - फोटो : dhukada
सिरसा। ऐलनाबाद उपचुनाव को लेकर नामांकन होने के बाद अब सरगर्मियां भी तेज होने लगी है। जहां एक ओर पहले गांव स्तर पर जन समस्या को लेकर फैसले लिए जाते थे लेकिन इस बार कृषि बिल ही मुख्य मुद्दा है। इसी मुद्दे को लेकर गांव ढूकड़ा रविवार को मंथन के बाद फैसला लेगा। गांव के मौजिज लोगों ने रविवार को महापंचायत बुलाई है, इसमें चर्चा के बाद चुनाव बहिष्कार, राजनीतिक पार्टियों की ओर से चुनाव प्रचार के लिए प्रवेश देने या ना देने पर फैसला लिया जाएगा।
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केंद्र की ओर से लाए गए कृषि कानून को लेकर नाराजगी है। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर अब गांव ढूकड़ा के ग्रामीण एकजुट हो गए हैं। उपचुनाव में भाग लेने, बहिष्कार करने या अन्य विकल्पों पर फैसला लेने के लिए रविवार को महापंचायत बुलाई गई है। इसमें गांव के मौजिज लोग आपसी विचार-विमर्श के बाद अंतिम फैसला लेंगे। ग्रामीण सुरेश ढाका ने बजाया कि रविवार को प्रस्तावित महापंचायत की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसमें गांव के लोग जिसमें सरपंच, पूर्व सरपंच सहित अन्य बुजुर्ग लोग भाग लेंगे। इसके अलावा गांव के सभी वर्गों के लोग इसमें उपस्थिति दर्ज करवाएंगे।
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वोटिंग के बहिष्कार का लिया जा सकता है फैसला
गांव ढूकड़ा पूरी तरह कृषि कानूनों के खिलाफ है और संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर काम कर रहा है। कृषि कानूनों को लेकर चले आंदोलन में इस गांव में पहले भी भाग लिया है। अब एक बार फिर गांव में महापंचायत बुलाई है। पंचायत का एजेंडा भी निर्धारित कर दिया गया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने आह्वान किया है कि वे वोटिंग का बहिष्कार करें और सत्तादल के खिलाफ मतदान करें। इस पर फैसला पंचायत में चर्चा के बाद होगा। ग्रामीणों का कहना है कि इस दौरान ये फैसला लिया जा सकता है कि भाजपा-जजपा के खिलाफ मतदान किया जाए या पूर्ण मतदान का बहिष्कार कर दिया जाए। इसके अलावा ये भी फैसला लिया जा सकता है कि सत्तारूढ़ गठबंधन पार्टी के नेताओं को प्रचार के लिए गांव में ही ना घुसने दिया जाए।
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3400 वोट वाला गांव पहले भी ले चुका पूर्ण बहिष्कार का फैसला
सुरेश ढाका ने बताया कि गांव ढूकड़ा में 3400 वोट हैं। इसलिए मतदान संख्या के हिसाब से महत्वपूर्ण है। ये गांव ऐसा फैसला पहली बार नहीं ले रहा है। बल्कि इससे पहले भी वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी पूर्ण बहिष्कार का फैसला लिया था। उस दौरान एक भी वोट नहीं डाला गया था। उस समय गांव सेम की समस्या से ग्रसित था। इतना ही नहीं गांव की जमीन सरकार ले रही थी, जिसका भी विरोध हो गया था। ग्रामीण एकजुट हुए और उस समय सरकार को वापस लौटना पड़ा।
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