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Sirsa News: अपनी सुरीली धुनों से विदेशों में सिरसा का नाम चमका रहे वादक तुलसी अनुपम
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लाइव शो के दौरान पंजाबी सिंगर रणजीत बावा के साथ सिरसा के तुलसी अनुपम।
सिरसा। संगीतकार व वादक तुलसी अनुपम देश और विदेश में जिले का नाम अपनी सुरीली धुनों से रोशन कर रहे हैं। हरियाणवी इंडस्ट्री से लेकर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री व साउथ इंडस्ट्री में भी काम कर चुके हैं। कई वादययंत्रों को बजाने की कला में उन्हें महारत हासिल है। इनमें मुख्यत: हारमोनियम, सितार, की-बोर्ड, गिटार आदि शामिल है। तुलसी अनुपम अनेक इनाम अपने नाम कर चुके हैं।
इन दिनों वे चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के युवा कल्याण निदेशालय में आयोजित थिएटर कार्यशाला में विद्यार्थियों को संगीत व वादययंत्रों का ज्ञान दे रहे हैं। तुलसी अनुपम ने बताया कि संस्कार भारती अवॉर्ड, बेस्ट हरियाणा संगीतकार अवॉर्ड व अन्य अवाॅर्ड मिल चुके हैं। तुलसी अनुपम बताते हैं कि वे पंजाबी संगीतकारों के साथ विदेशों में लाइव शो करते हैं। पंजाबी कलाकार गुरदास मान, हरभजन मान, जसबीर सिंह जस्सा, रणजीत बावा व अन्यों के साथ काम कर चुके हैं। तुलसी अनुपम न्यूजीलैंड, कैनेडा, अमेरिका, यूके, यूरोप, जर्मनी, इटली व अन्य जगहों पर शो कर चुके हैं।
पिता भी सितार वादक, उन्हें देखकर संगीत से हुआ प्यार
तुलसी अनुपम ने बताया कि वे 30 साल से इस लाइन में काम कर रहे हैं। उनके पिता चंद्रभान सितार वादक थे। इसीलिए उनके संस्कारों में ही संगीत है। पिता को जब बचपन में सितार वादन करते हुए देखते थे तो उन्हें उसी समय संगीत से प्यार हो गया था। इसी दौरान उनके मन में मुंबई जाने का सपना जगा। इसलिए 1990 - 95 के बीच वे मुंबई में गए। पिता सितार वादक थे तो उनकी सहायता से उन्हें संगीत निर्देशक अनिल बिसवास से मिलने का मौका मिला। उन्होंने करीब 2 साल तक उनसे संगीत का ज्ञान लिया। उस समय में सुनने में आता था कि अनिल बिसवास ने ही लत्ता मंगेशकर का भी संगीत की दुनिया में सफर शुरू करवाया था।
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जरूरतमंदों को देते हैं निशुल्क में संगीत ज्ञान
तुलसी अनुपम बताते है कि हमेशा से ही संगीत को बचाने का उनका प्रयास रहता है। इसलिए वो जो बच्चा संगीत को सीखना चाहते हैं, लेकिन उनके पास फीस देने के पैसे नहीं है। उनके लिए मेरे घर के दरवाजे हमेशा से ही खुले हैं। अब भी बहुत से ऐसे बच्चे है जो फीस नहीं दे पाते मेरे से संगीत की दीक्षा ले रहे है। घर पर ही मैं उन बच्चों की कक्षाएं लेता हूं।
अपने एक अधूरे सपने को जल्द पूरा करेंगे तुलसी अनुपम
तुलसी अनुपम बताते हैं कि बेशक उनका सपना मुंबई जाकर संगीत सीखने का था। हमेशा से ही उनके मन में रहता था कि जहां उनका जन्म हुआ यानि सिरसा के युवाओं को संगीत में आगे लाउं। इसलिए संगीत निर्देशक अनिल बिसवास के पास दो साल दीक्षा लेने के बाद वे सिरसा वापस आ गए। उन्होंने यहां पर ही अपने संगीत को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
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इन दिनों वे चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के युवा कल्याण निदेशालय में आयोजित थिएटर कार्यशाला में विद्यार्थियों को संगीत व वादययंत्रों का ज्ञान दे रहे हैं। तुलसी अनुपम ने बताया कि संस्कार भारती अवॉर्ड, बेस्ट हरियाणा संगीतकार अवॉर्ड व अन्य अवाॅर्ड मिल चुके हैं। तुलसी अनुपम बताते हैं कि वे पंजाबी संगीतकारों के साथ विदेशों में लाइव शो करते हैं। पंजाबी कलाकार गुरदास मान, हरभजन मान, जसबीर सिंह जस्सा, रणजीत बावा व अन्यों के साथ काम कर चुके हैं। तुलसी अनुपम न्यूजीलैंड, कैनेडा, अमेरिका, यूके, यूरोप, जर्मनी, इटली व अन्य जगहों पर शो कर चुके हैं।
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पिता भी सितार वादक, उन्हें देखकर संगीत से हुआ प्यार
तुलसी अनुपम ने बताया कि वे 30 साल से इस लाइन में काम कर रहे हैं। उनके पिता चंद्रभान सितार वादक थे। इसीलिए उनके संस्कारों में ही संगीत है। पिता को जब बचपन में सितार वादन करते हुए देखते थे तो उन्हें उसी समय संगीत से प्यार हो गया था। इसी दौरान उनके मन में मुंबई जाने का सपना जगा। इसलिए 1990 - 95 के बीच वे मुंबई में गए। पिता सितार वादक थे तो उनकी सहायता से उन्हें संगीत निर्देशक अनिल बिसवास से मिलने का मौका मिला। उन्होंने करीब 2 साल तक उनसे संगीत का ज्ञान लिया। उस समय में सुनने में आता था कि अनिल बिसवास ने ही लत्ता मंगेशकर का भी संगीत की दुनिया में सफर शुरू करवाया था।
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तुलसी अनुपम बताते है कि हमेशा से ही संगीत को बचाने का उनका प्रयास रहता है। इसलिए वो जो बच्चा संगीत को सीखना चाहते हैं, लेकिन उनके पास फीस देने के पैसे नहीं है। उनके लिए मेरे घर के दरवाजे हमेशा से ही खुले हैं। अब भी बहुत से ऐसे बच्चे है जो फीस नहीं दे पाते मेरे से संगीत की दीक्षा ले रहे है। घर पर ही मैं उन बच्चों की कक्षाएं लेता हूं।
अपने एक अधूरे सपने को जल्द पूरा करेंगे तुलसी अनुपम
तुलसी अनुपम बताते हैं कि बेशक उनका सपना मुंबई जाकर संगीत सीखने का था। हमेशा से ही उनके मन में रहता था कि जहां उनका जन्म हुआ यानि सिरसा के युवाओं को संगीत में आगे लाउं। इसलिए संगीत निर्देशक अनिल बिसवास के पास दो साल दीक्षा लेने के बाद वे सिरसा वापस आ गए। उन्होंने यहां पर ही अपने संगीत को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।