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Sirsa News: गांव रोड़ी में शौचालयों की बदहाली से लोग बेहाल, 1 साल 3 महीने में दो बार टूटे सुलभ शौचालय के दरवाजे, फर्श धंसा, पानी और सफाई की व्यवस्था ठप
Wed, 23 Apr 2025 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 23 Apr 2025 11:41 PM IST
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रोड़ी के बस स्टैंड पर टूटा सुलभ शौचालय का दरवाजा। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रोड़ी। देश और प्रदेश सरकार भले ही स्वच्छ भारत अभियान के तहत हर गांव और शहर को स्वच्छ और खुले में शौच से मुक्त बनाने का दावा कर रही हो, लेकिन हकीकत गांव रोड़ी में इससे बिल्कुल उलट है। ग्राम पंचायत और संबंधित विभागों की लापरवाही के चलते यहां स्वच्छता की हालत बद से बदतर होती जा रही है। गांव के बस स्टैंड पर बने सुलभ शौचालय महज 1 साल 3 महीने में दो बार टूट चुके हैं, जिससे आमजन को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बस स्टैंड पर बनाए गए इन सार्वजनिक शौचालयों का उद्घाटन 14 जनवरी 2024 को हुआ था, लेकिन मात्र आठ महीने में ही इनके दरवाजे पहली बार टूट गए थे। 14 अगस्त 2024 को अमर उजाला की ओर से खबर प्रकाशित की तो अधिकारियों ने इस पर संज्ञान लिया और मरम्मत करवाई। इसके बाद इनकी कोई देखभाल नहीं की गई। इसके चलते इन शौचालय के दरवाजे टूट चुके हैं और फर्श भी धंस चुका है। इतना ही नहीं, हाथ धोने के लिए पानी की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।
ग्रामीणों और बस यात्रियों के साथ-साथ अनाज मंडी में फसल लेकर आने वाले किसानों को भी इस बदहाल व्यवस्था का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। गांव में यह शौचालय ही एकमात्र सुविधा है, जिस पर किसान निर्भर थे। लेकिन अब उसकी हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। स्थानीय प्रशासन की उदासीनता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बड़ागुड़ा के बीडीपीओ तरुण सुथार ने कहा कि उन्हें जानकारी ही नहीं है कि ये शौचालय किस विभाग द्वारा बनवाए गए थे, जबकि यह जिम्मेदारी उनके अधिकार क्षेत्र में आती है।
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तीन साल पहले बनाए गए थे छह सुलभ शौचालय
स्थानीय निवासी धर्मपाल जिंदल, रिंकू, काला सिंह, कुलविंदर सिंह, पवन कुमार, विंदर सिंह का कहना है कि सरकार भले ही गांवों को ओडीएफ मुक्त घोषित कर रही हो, लेकिन यहां लोगों के लिए शौच की मूलभूत सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। बस स्टैंड पर करीब तीन साल पहले छह सुलभ शौचालय बनाए गए थे, जिनमें से दो पुरुषों के लिए, दो महिलाओं के लिए, एक विकलांगों के लिए और एक विदेशी सीट वाला था। वर्तमान में अधिकांश पर ताले लगे हैं या वे टूटी अवस्था में हैं। शौचालयों की देखरेख न होने के कारण असामाजिक तत्व इनका सामान उतार कर ले जा रहे हैं। रोजाना सैकड़ों यात्री कालांवाली, डबवाली, सिरसा, सरदूलगढ़, तलवंडी साबो और बठिंडा के लिए इसी बस स्टैंड से आते-जाते हैं, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं के अभाव में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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रोड़ी की मंडी सब यार्ड ऑफिस में किसानों की सहूलियत के लिए शौचालय बने हुए हैं, लेकिन बस बस स्टैंड के नजदीक किसान सुलभ शौचालयों का ही इस्तेमाल करते थे। इनकी हालत खस्ताहाल हो चुकी हैं। -तरसेम सिंह भीमां, मंडी सुपरवाइजर, मार्केट कमेटी रोड़ी।
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एक माह पूर्व इन शौचालयों की सफाई करवा कर मरम्मत करवाई गई थी, लेकिन गांव के असामाजिक तत्व बार-बार इन्हें नुकसान पहुंचा रहे हैं। - आजाद हर्षवाल, पंचायत सचिव, बडागुढ़ा।
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रोड़ी। देश और प्रदेश सरकार भले ही स्वच्छ भारत अभियान के तहत हर गांव और शहर को स्वच्छ और खुले में शौच से मुक्त बनाने का दावा कर रही हो, लेकिन हकीकत गांव रोड़ी में इससे बिल्कुल उलट है। ग्राम पंचायत और संबंधित विभागों की लापरवाही के चलते यहां स्वच्छता की हालत बद से बदतर होती जा रही है। गांव के बस स्टैंड पर बने सुलभ शौचालय महज 1 साल 3 महीने में दो बार टूट चुके हैं, जिससे आमजन को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बस स्टैंड पर बनाए गए इन सार्वजनिक शौचालयों का उद्घाटन 14 जनवरी 2024 को हुआ था, लेकिन मात्र आठ महीने में ही इनके दरवाजे पहली बार टूट गए थे। 14 अगस्त 2024 को अमर उजाला की ओर से खबर प्रकाशित की तो अधिकारियों ने इस पर संज्ञान लिया और मरम्मत करवाई। इसके बाद इनकी कोई देखभाल नहीं की गई। इसके चलते इन शौचालय के दरवाजे टूट चुके हैं और फर्श भी धंस चुका है। इतना ही नहीं, हाथ धोने के लिए पानी की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।
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ग्रामीणों और बस यात्रियों के साथ-साथ अनाज मंडी में फसल लेकर आने वाले किसानों को भी इस बदहाल व्यवस्था का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। गांव में यह शौचालय ही एकमात्र सुविधा है, जिस पर किसान निर्भर थे। लेकिन अब उसकी हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। स्थानीय प्रशासन की उदासीनता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बड़ागुड़ा के बीडीपीओ तरुण सुथार ने कहा कि उन्हें जानकारी ही नहीं है कि ये शौचालय किस विभाग द्वारा बनवाए गए थे, जबकि यह जिम्मेदारी उनके अधिकार क्षेत्र में आती है।
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तीन साल पहले बनाए गए थे छह सुलभ शौचालय
स्थानीय निवासी धर्मपाल जिंदल, रिंकू, काला सिंह, कुलविंदर सिंह, पवन कुमार, विंदर सिंह का कहना है कि सरकार भले ही गांवों को ओडीएफ मुक्त घोषित कर रही हो, लेकिन यहां लोगों के लिए शौच की मूलभूत सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। बस स्टैंड पर करीब तीन साल पहले छह सुलभ शौचालय बनाए गए थे, जिनमें से दो पुरुषों के लिए, दो महिलाओं के लिए, एक विकलांगों के लिए और एक विदेशी सीट वाला था। वर्तमान में अधिकांश पर ताले लगे हैं या वे टूटी अवस्था में हैं। शौचालयों की देखरेख न होने के कारण असामाजिक तत्व इनका सामान उतार कर ले जा रहे हैं। रोजाना सैकड़ों यात्री कालांवाली, डबवाली, सिरसा, सरदूलगढ़, तलवंडी साबो और बठिंडा के लिए इसी बस स्टैंड से आते-जाते हैं, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं के अभाव में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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रोड़ी की मंडी सब यार्ड ऑफिस में किसानों की सहूलियत के लिए शौचालय बने हुए हैं, लेकिन बस बस स्टैंड के नजदीक किसान सुलभ शौचालयों का ही इस्तेमाल करते थे। इनकी हालत खस्ताहाल हो चुकी हैं। -तरसेम सिंह भीमां, मंडी सुपरवाइजर, मार्केट कमेटी रोड़ी।
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एक माह पूर्व इन शौचालयों की सफाई करवा कर मरम्मत करवाई गई थी, लेकिन गांव के असामाजिक तत्व बार-बार इन्हें नुकसान पहुंचा रहे हैं। - आजाद हर्षवाल, पंचायत सचिव, बडागुढ़ा।