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विषाणुओं से फैलता है पत्ता मरोड़, सफेद मक्खी सहायक : डॉ. जाखड़
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फसल का निरीक्षण करते अधिकारी। संवाद
नरमा-कपास की फसल में हर सप्ताह ड्रिप से घुलनशील खाद डालें : विक्रम जाखड़
फोटो 19
संवाद न्यूज एजेंसी
ओढां। बारिश के बाद फसल में हरा तेला, सफेद मक्खी के साथ पत्ता मरोड़ व टिंडा गलन रोग आ सकता है। इसकी रोकथाम के लिए किसानों को उचित जानकारी होने व सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
कृषि विभाग के खंड तकनीकी सहायक विक्रम जाखड़ ने बताया कि बारिश का मौसम चल रहा है। ऐसे मेें फसलों पर रोग की संभावना बढ़ना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो किसान अंधाधुंध कीटनाशक का छिड़काव करने से बचें। जिन किसानों ने अभी तक डीएपी नहीं डाली है वे खेत में उपयुक्त समय पर एक बैग डीएपी, एक यूरिया, आधा बैग पोटाश व 10 किलो जिंक सल्फेट (21 प्रतिशत) प्रति एकड़ के हिसाब से डालें। भूमि रेतीली है तो खाद की मात्रा दो बार डालें। रेतीली मिट्टी में मैग्नीशियम की कमी है तो आधा प्रतिशत मैग्नीशियम सल्फेट का छिड़काव अवश्य करें। उन्होंने बताया कि ड्रिप विधि के द्वारा लगाई गई नरमा-कपास की फसल में हर सप्ताह ड्रिप के द्वारा घुलनशील खाद जिसमें 2 पैकेट 12.61.0, 3 पैकेट 13.0.45 व 6 किलो यूरिया तथा 100 ग्राम जिंक प्रति एकड़ के हिसाब से 10 सप्ताह तक डालें। बीटी कपास की फसल में 90 से 120 दिन के बीच दो प्रतिशत यूरिया, जिंक सल्फेट (33 प्रतिशत) का 10 दिन के अंतराल मेें दो बार छिड़कार करें।
इस प्रकार करें कीट प्रबंधन
नरमे-कपास की फसल में रस चूसक कीटों की निगरानी के लिए प्रति एकड़ 20 पौधों की 3 पत्तियों पर सफेद मक्खी, हरा तेला एवं थ्रिप्स (चूरड़ा) की गिनती साप्ताहिक अंतराल पर करें। अगर सफेद मक्खी, हरा तेला एवं थ्रिप्स का आर्थिक कगार क्रमश: 18 से 24 वयस्क 6 शिशु व 30 थ्रिप्स प्रति 3 पत्तियां हैं तो विभाग द्वारा प्रमाणित किए गए कीटनाशकों का इस्तेमाल करें।
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इस माह हरा तेला व सफेद मक्खी बढ़ने की संभावना
बीटीएम विक्रम जाखड़ ने बताया कि इस माह फसलों में हरा तेला व सफेद मक्खी बढ़ने की संभावना है। प्रकोप होने पर रोकथाम के लिए 40 मिली. इमिडाक्लोप्रिड (कॉन्फिडोर) 200 एसएल या 40 ग्राम थायोमेथोक्साम (एकतारा) 25 डब्लयूजी को 150 से 175 लीटर पानी में डालकर छिड़काव करें। सफेद मक्खी की रोकथाम के लिए 300 मिली. डाईमेथोएट (रोगोर) 30 ईसी/ऑक्सीडेमेटान मिथाइल 25 ईसी के साथ एक लीटर नीम आधारित कीटनाशक या 400 लीटर पाइरिप्रोक्सिफेन 10 ईसी या 240 मिलीग्राम पानी में ओबेरॉन 22.9 एससी को 200 से 250 टर पानी में घोलकर छिड़काव करें। वहीं हरा तेला एवं सफेद मक्खी के लिए क्लोनिकामिड 60 ग्राम मात्रा एफिडोपायरोपेन 50 डी.सी की 400 मिलीग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी में डालकर छिड़काव करें। उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह किए गए सर्वे में गुलाबी सुंडी का प्रकोप फूलों व टिंडों में पाया गया है। इसकी रोकथाम के लिए 3 मिलीग्राम प्रोफेनोफोस या 4 मिलीग्राम क्विनल्फॉस 20 एएफ प्रति लीटर मात्रा की दर से 8 से 10 दिनों के अंतराल में छिड़काव करें।
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फोटो 19
संवाद न्यूज एजेंसी
ओढां। बारिश के बाद फसल में हरा तेला, सफेद मक्खी के साथ पत्ता मरोड़ व टिंडा गलन रोग आ सकता है। इसकी रोकथाम के लिए किसानों को उचित जानकारी होने व सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
कृषि विभाग के खंड तकनीकी सहायक विक्रम जाखड़ ने बताया कि बारिश का मौसम चल रहा है। ऐसे मेें फसलों पर रोग की संभावना बढ़ना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो किसान अंधाधुंध कीटनाशक का छिड़काव करने से बचें। जिन किसानों ने अभी तक डीएपी नहीं डाली है वे खेत में उपयुक्त समय पर एक बैग डीएपी, एक यूरिया, आधा बैग पोटाश व 10 किलो जिंक सल्फेट (21 प्रतिशत) प्रति एकड़ के हिसाब से डालें। भूमि रेतीली है तो खाद की मात्रा दो बार डालें। रेतीली मिट्टी में मैग्नीशियम की कमी है तो आधा प्रतिशत मैग्नीशियम सल्फेट का छिड़काव अवश्य करें। उन्होंने बताया कि ड्रिप विधि के द्वारा लगाई गई नरमा-कपास की फसल में हर सप्ताह ड्रिप के द्वारा घुलनशील खाद जिसमें 2 पैकेट 12.61.0, 3 पैकेट 13.0.45 व 6 किलो यूरिया तथा 100 ग्राम जिंक प्रति एकड़ के हिसाब से 10 सप्ताह तक डालें। बीटी कपास की फसल में 90 से 120 दिन के बीच दो प्रतिशत यूरिया, जिंक सल्फेट (33 प्रतिशत) का 10 दिन के अंतराल मेें दो बार छिड़कार करें।
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इस प्रकार करें कीट प्रबंधन
नरमे-कपास की फसल में रस चूसक कीटों की निगरानी के लिए प्रति एकड़ 20 पौधों की 3 पत्तियों पर सफेद मक्खी, हरा तेला एवं थ्रिप्स (चूरड़ा) की गिनती साप्ताहिक अंतराल पर करें। अगर सफेद मक्खी, हरा तेला एवं थ्रिप्स का आर्थिक कगार क्रमश: 18 से 24 वयस्क 6 शिशु व 30 थ्रिप्स प्रति 3 पत्तियां हैं तो विभाग द्वारा प्रमाणित किए गए कीटनाशकों का इस्तेमाल करें।
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इस माह हरा तेला व सफेद मक्खी बढ़ने की संभावना
बीटीएम विक्रम जाखड़ ने बताया कि इस माह फसलों में हरा तेला व सफेद मक्खी बढ़ने की संभावना है। प्रकोप होने पर रोकथाम के लिए 40 मिली. इमिडाक्लोप्रिड (कॉन्फिडोर) 200 एसएल या 40 ग्राम थायोमेथोक्साम (एकतारा) 25 डब्लयूजी को 150 से 175 लीटर पानी में डालकर छिड़काव करें। सफेद मक्खी की रोकथाम के लिए 300 मिली. डाईमेथोएट (रोगोर) 30 ईसी/ऑक्सीडेमेटान मिथाइल 25 ईसी के साथ एक लीटर नीम आधारित कीटनाशक या 400 लीटर पाइरिप्रोक्सिफेन 10 ईसी या 240 मिलीग्राम पानी में ओबेरॉन 22.9 एससी को 200 से 250 टर पानी में घोलकर छिड़काव करें। वहीं हरा तेला एवं सफेद मक्खी के लिए क्लोनिकामिड 60 ग्राम मात्रा एफिडोपायरोपेन 50 डी.सी की 400 मिलीग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी में डालकर छिड़काव करें। उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह किए गए सर्वे में गुलाबी सुंडी का प्रकोप फूलों व टिंडों में पाया गया है। इसकी रोकथाम के लिए 3 मिलीग्राम प्रोफेनोफोस या 4 मिलीग्राम क्विनल्फॉस 20 एएफ प्रति लीटर मात्रा की दर से 8 से 10 दिनों के अंतराल में छिड़काव करें।