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Sirsa News: साइकिल मेले में नाखुश नजर आए अभिभावक, बोले- जितने रुपये निर्धारित उतने की एक भी साइकिल नहीं

Fri, 18 Aug 2023 10:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Fri, 18 Aug 2023 10:58 PM IST
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Parents were unhappy at the cycle fair, said - there is not a single bicycle worth the amount fixed
शहीद भगत सिंह स्टेडियम में लगे साइकिल मेले में साइकिल पसंद करतीं छात्राएं।
सिरसा। जिला शिक्षा विभाग की ओर से शहीद भगत सिंह स्टेडियम में दो दिवसीय साइकिल मेले का आयोजन किया गया। मेले के दूसरे दिन बड़ी संख्या में अभिभावक व बच्चे साइकिल मेले में पहुंचे। साइकिलों की कीमत उम्मीद से ज्यादा होने पर अभिभावक नाखुश नजर आए। सरकार की ओर से साइकिल की कीमत 2800 से 3000 हजार रुपये तय की गई है। वहीं मेले में आई कंपनियों की साइकिलों का न्यूनतम मूल्य ही 3500 रुपये था। ऐसे में अभिभावकों को अपनी जेब से पैसे देने पड़ेंगे।
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बता दें कि दो दिवसीय मेले में छठी कक्षा के विद्याथियों ने साइकिलें पसंद कीं। इस दौरान मेले में जिले के सात खंडों से आए 9 दुकानदारों ने अपनी स्टॉल लगाई। मेले में 3500 से लेकर सात हजार तक की साइकिलें प्रदर्शित की गईं। छात्रों ने सबसे ज्यादा चार हजार रुपये से लेकर 5500 रुपये तक की साइकिलों को पसंद किया। निदेशालय द्वारा 28 इंची साइकिल के 2800 रुपये और 22 इंची साइकिल के 3000 रुपये तय किए गए हैं। अभिभावक सुंदर, राजेश व रवि ने कहा कि विभाग की ओर साइकिलों की राशि बहुत कम तय की गई है। इसे बढ़ाने की जरूरत है।
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एक साल तक नहीं आता साइकिल का पैसा, तब तक महंगी हो जाती हैं साइकिलें
साइकिल मेले में लगाई गई स्टाॅल में करीब 400 से ज्यादा ऑर्डर एक दिन में आए। लेकिन स्टाॅल संचालक महावीर ने बताया कि जितने ऑर्डर आए हैं। उतने विद्यार्थी खरीदने के लिए नहीं आते है। वहीं संचालक व अभिभावक निर्मल सिंह, मनदीप कौर ने बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा पैसा एक - एक साल तक विद्यार्थियों के खातों में नहीं आता। इसके कारण साइकिलें ओर भी ज्यादा महंगी हो जाती हैं और अभिभावक महंगी साइकिलों को खरीद पाने में सक्षम नहीं होते।
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अभिभावकों ने की खंडों में मेला लगाने की मांग

हर साल साइकिल मेला शहीद भगत सिंह स्टेडियम में लगाया जाता है। लेकिन साइकिल पसंद करने के लिए अभिभावक दूर - दूर के खंडों से आते हैं। अभिभावकों ने कहा कि विभाग को चाहिए कि वह उनके खंडों में ही मेला लगाए। वहीं कई अभिभावकों का कहना है कि मेला लगाकर खानापूर्ति न की जाए अगर सरकार को गरीब बच्चों को साइकिलें देनी ही हैं तो जिन स्कूलों में विद्यार्थी पढ़ रहे हैं उन्हीं स्कूलों में साइकिलें पहुंचा दे।
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