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Sirsa News: हल्की बारिश के बाद धान की बिजाई शुरू, नहरी पानी का इंतजार
Sun, 29 Jun 2025 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 29 Jun 2025 11:41 PM IST
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रानियां में धान लगाते मजदूर।
रानियां। रानियां क्षेत्र में कृषि मुख्य रूप से बारिश और घग्गर के पानी पर निर्भर है। रानियां क्षेत्र में भले ही कुछ दिनों में अच्छी बरसात देखने को मिली है। इससे तापमान में गिरावट आई और उमस भरा माहौल बना हुआ है। बारिश और ट्यूबवेल के आधार पर किसान धान की बिजाई और रोपाई करने की कवायद में जुट गए हैं। रानियां के शहर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में ही बारिश देखने को मिली है। उसके अतिरिक्त बारिश नहीं हुई है। ऐसे में ग्रामीण घग्गर के औटू हेड का काम पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। पहाड़ी में भारी बारिश होने के कारण किसान इंतजार कर रहे थे कि जून माह में घग्गर का पानी पर्याप्त मात्रा में मिलेगा। लेकिन औटू हेड के पास काम चलने के कारण अभी तक पानी की कमी बनी हुई है।
किसानों की माने तो घग्गर का पानी धान की फसलों के लिए वरदान होता है। बारिश के साथ आया मटमैला पानी अपने साथ जमीन को ताकत देने की क्षमता लाता है। दो पानी में ही धान की रंगत बदल जाती है। हालांकि यह पानी कपास व नरमे की फसल को भी नया जीवनदान देता है। मौजूदा हालातों को देखकर किसानों की चिंता सताने लगी है कि अगर घग्गर का पानी समय पर नहीं मिला और बारिश भी कम हुई तो धान की फसल की पैदावार पर बुरा असर पड़ेगा। इसके साथ-साथ धान में बीमारियां भी बढ़ जाएगी और ट्यूबवेल का पानी उतना उपयुक्त नहीं है।
जिस कारण धान की कुछ किस्मों का समय निकल चुका है और कुछ अन्य के 15 दिन बाकी है। किसानों का कहना है कि गर्मी के कारण खेतों में पानी का ठहराव नहीं होता तथा पानी गर्म होने से पौधों का फैलाव, बढ़वार तथा पैदावार भी प्रभावित होगी। इसके साथ नमी न होने से धान में गोभ, होकड़, सुंडी व झंडा रोग सहित अन्य बीमारियों का प्रकोप बढ़ने से धान की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान होने की संभावना बनी रहती है।
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बारिश न होने से क्षेत्र का तापमान फिर से बढ़ना शुरू हो गया है। तापमान बढ़ने से धान की रोपाई प्रभावित होती है। इसके साथ खेतों में बार-बार पानी देना पड़ रहा है। नहरी और घग्गर में पानी नहीं होने के कारण ट्यूबवेल का पानी देना पड़ता है। जो धान की फसल के लिए बेहतर नहीं होता है। गर्मी के साथ ही धान की फसल में बीमारियां भी आने लगती हैं।
-- सरबजीत बराड़, किसान नानुआना।
मानसून आने के बाद भी न तो अभी तक घग्गर में बरसाती पानी आया और न ही क्षेत्र में धान रोपाई के लिए उचित मात्रा में बारिश हुई। इस कारण धान की रोपाई में देरी होती जा रही है। समय रहते बरसात और घग्गर में पानी नहीं आता है तो किसानों के लिए परेशानी पैदा हो जाएगी। धान की फसल के लिए उपयुक्त मौसम व पानी होना जरूरी है। यदि दोनों नहीं मिलते हैं तो फसल में नुकसान की आशंका बढ़ जाती है।
-नवदीप सिंह, युवा किसान लहरांवाली ढाणी।
सप्ताह भर पहले हमारे यहां अच्छी बरसात हुई थी। जिससे धान की रोपाई में तेजी आई है। उसके बाद निरंतर गर्मी बढ़ गई है। मौसम उमस भरा बना हुआ है। जिस कारण धान रोपाई में मजदूरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम में ज्यादा गर्मी के चलते मजदूर बीमार हो जाते हैं और धान की फसल भी ज्यादा कामयाब नहीं रहती है। घग्गर में भी बरसात का पानी नहीं आया अगर बरसात का पानी आ जाता तो धान रोपाई आसान तथा पौधों की बढ़वार अच्छी होती।
- हरभगवान, किसान फिरोजाबाद।
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किसानों की माने तो घग्गर का पानी धान की फसलों के लिए वरदान होता है। बारिश के साथ आया मटमैला पानी अपने साथ जमीन को ताकत देने की क्षमता लाता है। दो पानी में ही धान की रंगत बदल जाती है। हालांकि यह पानी कपास व नरमे की फसल को भी नया जीवनदान देता है। मौजूदा हालातों को देखकर किसानों की चिंता सताने लगी है कि अगर घग्गर का पानी समय पर नहीं मिला और बारिश भी कम हुई तो धान की फसल की पैदावार पर बुरा असर पड़ेगा। इसके साथ-साथ धान में बीमारियां भी बढ़ जाएगी और ट्यूबवेल का पानी उतना उपयुक्त नहीं है।
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जिस कारण धान की कुछ किस्मों का समय निकल चुका है और कुछ अन्य के 15 दिन बाकी है। किसानों का कहना है कि गर्मी के कारण खेतों में पानी का ठहराव नहीं होता तथा पानी गर्म होने से पौधों का फैलाव, बढ़वार तथा पैदावार भी प्रभावित होगी। इसके साथ नमी न होने से धान में गोभ, होकड़, सुंडी व झंडा रोग सहित अन्य बीमारियों का प्रकोप बढ़ने से धान की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान होने की संभावना बनी रहती है।
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बारिश न होने से क्षेत्र का तापमान फिर से बढ़ना शुरू हो गया है। तापमान बढ़ने से धान की रोपाई प्रभावित होती है। इसके साथ खेतों में बार-बार पानी देना पड़ रहा है। नहरी और घग्गर में पानी नहीं होने के कारण ट्यूबवेल का पानी देना पड़ता है। जो धान की फसल के लिए बेहतर नहीं होता है। गर्मी के साथ ही धान की फसल में बीमारियां भी आने लगती हैं।
मानसून आने के बाद भी न तो अभी तक घग्गर में बरसाती पानी आया और न ही क्षेत्र में धान रोपाई के लिए उचित मात्रा में बारिश हुई। इस कारण धान की रोपाई में देरी होती जा रही है। समय रहते बरसात और घग्गर में पानी नहीं आता है तो किसानों के लिए परेशानी पैदा हो जाएगी। धान की फसल के लिए उपयुक्त मौसम व पानी होना जरूरी है। यदि दोनों नहीं मिलते हैं तो फसल में नुकसान की आशंका बढ़ जाती है।
-नवदीप सिंह, युवा किसान लहरांवाली ढाणी।
सप्ताह भर पहले हमारे यहां अच्छी बरसात हुई थी। जिससे धान की रोपाई में तेजी आई है। उसके बाद निरंतर गर्मी बढ़ गई है। मौसम उमस भरा बना हुआ है। जिस कारण धान रोपाई में मजदूरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम में ज्यादा गर्मी के चलते मजदूर बीमार हो जाते हैं और धान की फसल भी ज्यादा कामयाब नहीं रहती है। घग्गर में भी बरसात का पानी नहीं आया अगर बरसात का पानी आ जाता तो धान रोपाई आसान तथा पौधों की बढ़वार अच्छी होती।
- हरभगवान, किसान फिरोजाबाद।