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कंडम बसों की 15 वर्ष बाद ऑनलाइन बोली, नहीं बढ़ा रेट
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रोडवेज की कंडम बसों को खरीदने के बाद लेजाते हुए।
- फोटो : Sirsa
सिरसा। रोडवेज वर्कशाप में खड़ी कंडम बसों की करीब 15 वर्ष बाद ऑनलाइन बोली करवाने के बाद भी बसों की बोली नहीं बढ़ पाई है। बोली कम लगने कारण रोडवेज को मजबूरन कंडम बसों को बेचना पड़ा। ऑनलाइन बोली प्रक्रिया में औसतन ढाई लाख तक ही बोली लग पाई थी। इस प्रक्रिया में 30 से अधिक कंडम बसों को बेचा गया है।
रोडवेज बसों की समय अवधि पूरी होने के बाद इन बसों को कंडम घोषित कर वर्कशाप में ही खड़ा कर दिया जाता है। जिसके बाद कंडम बसों की ऑफलाइन व ऑनलाइन बोली करवाई जाती है और इच्छुक कबाड़ी और अन्य लोग इन बसों को खरीदते है। रोडवेज मुख्यालय की ओर से करीब पांच वर्ष पहले इन कंडम बसों की ऑफलाइन बोली करवाई गई थी। जिस दौरान दो से ढाई लाख की बोली लग पाई थी। बोली कम लगने के बाद रोडवेज की ओर से बसों को बेचने से इंकार कर दिया गया था। जिसके बाद अब मुख्यालय ने इन बसों की दोबारा ई प्रक्रिया से बोली लगाई थी। पांच वर्ष बाद भी इन बसों की बोली दो से ढाई लाख तक ही लग पाई है। बोली न बढ़ने के कारण रोडवेज की ओर से इन बसों को मजबूरन बेचना पड़ा।
15 वर्षों से वर्कशाप में खड़ी है 60 से अधिक कंडम बसें
कंडम घोषित हो चुकी यह बसें करीब 15 वर्षों से वर्कशाप में ही खड़ी है। जिसकी हालत पहले से भी खस्ता हो गई। डिपो के वर्कशाप में 60 से अधिक बसें खड़ी है जोकि कंडम घोषित हो चुकी थी। ई प्रक्रिया से 30 बसों को बेच दिया गया है जबकि 30 कंडम बसें अभी रोडवेज वर्कशाप में ही खड़ी है। हालांकि रोडवेज के अन्य कई कंडम हुए वाहन भी वर्कशाप में खड़े हैं।
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कर्मचारी नेताओं ने ई प्रक्रिया की किया विरोध
रोडवेज मुख्यालय की ओर से कंडम बसों की ई प्रक्रिया के माध्यम से बोली लगवाने पर कर्मचारी नेताओं ने इसमें गबन होने के आरोप लगाए हैं। सर्व कर्मचारी संघ के प्रधान मदन लाल खोथ, भीम सिंह चक्का, चमनलाल स्वामी, सुरजीत अरोड़ा ने कहा कि पांच वर्ष पहले लोहे का दाम 15 से 20 रुपये थे तब भी कंडम बसों की दो से ढाई लाख की बोली हुई थी तो रोडवेज ने बसों को बेचने से इनकार कर दिया। अब लोहे के दाम दो गुणा बढ़ गए है लेकिन इसके बाद भी रोडवेज की कंडम बसों की बोली ऊपर नहीं बढ़ पाई। ई प्रक्रिया की बजाए उसे कबाड़ के दाम पर भी बेचते तो रोडवेज को इसका मुनाफा अधिक होता।
मुख्यालय ने ऑनलाइन प्रक्रिया से कंडम बसों की बोली करवाई थी। जिसके बाद डिपो में खड़ी करीब 30 कंडम बसों को बेच दिया गया है। करीब ढाई लाख के अनुसार एक बस की बोली लगी थी। 30 बसें ओर रोडवेज की अन्य गाड़ियां अभी बस स्टैंड वर्कशॉप में खड़ी है।
-केआर कौशल, रोडवेज महाप्रबंधक, सिरसा डिपो
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रोडवेज बसों की समय अवधि पूरी होने के बाद इन बसों को कंडम घोषित कर वर्कशाप में ही खड़ा कर दिया जाता है। जिसके बाद कंडम बसों की ऑफलाइन व ऑनलाइन बोली करवाई जाती है और इच्छुक कबाड़ी और अन्य लोग इन बसों को खरीदते है। रोडवेज मुख्यालय की ओर से करीब पांच वर्ष पहले इन कंडम बसों की ऑफलाइन बोली करवाई गई थी। जिस दौरान दो से ढाई लाख की बोली लग पाई थी। बोली कम लगने के बाद रोडवेज की ओर से बसों को बेचने से इंकार कर दिया गया था। जिसके बाद अब मुख्यालय ने इन बसों की दोबारा ई प्रक्रिया से बोली लगाई थी। पांच वर्ष बाद भी इन बसों की बोली दो से ढाई लाख तक ही लग पाई है। बोली न बढ़ने के कारण रोडवेज की ओर से इन बसों को मजबूरन बेचना पड़ा।
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15 वर्षों से वर्कशाप में खड़ी है 60 से अधिक कंडम बसें
कंडम घोषित हो चुकी यह बसें करीब 15 वर्षों से वर्कशाप में ही खड़ी है। जिसकी हालत पहले से भी खस्ता हो गई। डिपो के वर्कशाप में 60 से अधिक बसें खड़ी है जोकि कंडम घोषित हो चुकी थी। ई प्रक्रिया से 30 बसों को बेच दिया गया है जबकि 30 कंडम बसें अभी रोडवेज वर्कशाप में ही खड़ी है। हालांकि रोडवेज के अन्य कई कंडम हुए वाहन भी वर्कशाप में खड़े हैं।
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कर्मचारी नेताओं ने ई प्रक्रिया की किया विरोध
रोडवेज मुख्यालय की ओर से कंडम बसों की ई प्रक्रिया के माध्यम से बोली लगवाने पर कर्मचारी नेताओं ने इसमें गबन होने के आरोप लगाए हैं। सर्व कर्मचारी संघ के प्रधान मदन लाल खोथ, भीम सिंह चक्का, चमनलाल स्वामी, सुरजीत अरोड़ा ने कहा कि पांच वर्ष पहले लोहे का दाम 15 से 20 रुपये थे तब भी कंडम बसों की दो से ढाई लाख की बोली हुई थी तो रोडवेज ने बसों को बेचने से इनकार कर दिया। अब लोहे के दाम दो गुणा बढ़ गए है लेकिन इसके बाद भी रोडवेज की कंडम बसों की बोली ऊपर नहीं बढ़ पाई। ई प्रक्रिया की बजाए उसे कबाड़ के दाम पर भी बेचते तो रोडवेज को इसका मुनाफा अधिक होता।
मुख्यालय ने ऑनलाइन प्रक्रिया से कंडम बसों की बोली करवाई थी। जिसके बाद डिपो में खड़ी करीब 30 कंडम बसों को बेच दिया गया है। करीब ढाई लाख के अनुसार एक बस की बोली लगी थी। 30 बसें ओर रोडवेज की अन्य गाड़ियां अभी बस स्टैंड वर्कशॉप में खड़ी है।
-केआर कौशल, रोडवेज महाप्रबंधक, सिरसा डिपो