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नवरात्र : 200 वर्ष पुराना है मावड़ी माता मंदिर, दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु
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मावड़ी माता मंदिर परिसर में मिट्टी निकालती महिला।
- फोटो : Sirsa
सिरसा। शहर भर में नवरात्र का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। शहर के भादरा बाजार स्थित माता मावड़ी का मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है। देश के अलग-अलग स्थानों से श्रद्धालु मावड़ी माता के मंदिर में मन्नत मांगने आते है। मंदिर की मान्यता है कि कोई भी श्रद्धालु आकर मंदिर में पूजा-अर्चना करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।
200 साल से भी पुराना यह मंदिर ये मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। भादरा बाजार में स्थित मावड़ी मंदिर में काफी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं। कहा जाता है कि माता ने भी किसी को खाली हाथ नहीं लौटाया है। कोलकाता के सेठचंद राम की बेटी अपाहिज थी। उसने मन्नत मांगी थी कि अगर उसकी बेटी सही हो जाएगी तो वह यहां मंदिर बनाएगा। बेटी के ठीक होने पर सेठचंद ने यहां माता मावड़ी का मंदिर बनवा दिया।
माता की मूर्ति जमीन से निकली
मावड़ी माता की मूर्ति जमीन से निकली हुई है। जहां से लोगों को ये मूर्ति मिली मंदिर का गर्भ गृह वहीं पर है। बताया जाता है कि इस मूर्ति को चोरों ने दो बार चुराने की कोशिश की, लेकिन कभी भी इस मंदिर के परिसर से बाहर नहीं ले जा पाए।
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तीन दिन लगता है मेला
मंदिर के पुजारी प्रदीप जोगी ने बताया कि ये मंदिर 200 से भी पुराना है। नवरात्र पर माता के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। दशमी से लेकर तीन दिन तक मंदिर में मेला लगेगा। इसमें देश-विदेश के श्रद्धालु हिस्सा लेंगे। पुजारी प्रदीप जोगी ने बताया कि मावड़ी माता की मूर्ति जमीन से निकली हुई है और इसे यही स्थापित किया गया।
पाकिस्तान के अलावा सिर्फ सिरसा में ही है मावड़ी का मंदिर
मंदिर के पुजारी प्रदीप जोगी का दावा है कि पूरे देश में केवल एक ही मावड़ी माता का मंदिर है। जहां भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। पुजारी का मानना है कि सिरसा के अलावा मावड़ी माता का मंदिर जहां मन्नतेें पूरी होती है वो पाकिस्तान में स्थित है। उन्होंने बताया कि यदि किसी को भी आंख, कान, नाक या अपाहिज जैसी समस्या है तो यहां मन्नत मांगने मात्र से ही बीमारी दूर हो जाती है।
मंदिर परिसर में मिट्टी निकालकर मन्नत मांगने की है परंपरा
मावड़ी माता मंदिर में जो भी श्रद्धालु माता का आशीर्वाद लेने आता है। वो मंदिर परिसर की मिट्टी अवश्य निकालता है। मान्यता है कि मिट्टी निकालने शरीर का हर कष्ट दूर होता है। वहीं मंदिर में जाने वाले हर भक्त को मिट्टी निकालना अवश्य है।
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200 साल से भी पुराना यह मंदिर ये मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। भादरा बाजार में स्थित मावड़ी मंदिर में काफी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं। कहा जाता है कि माता ने भी किसी को खाली हाथ नहीं लौटाया है। कोलकाता के सेठचंद राम की बेटी अपाहिज थी। उसने मन्नत मांगी थी कि अगर उसकी बेटी सही हो जाएगी तो वह यहां मंदिर बनाएगा। बेटी के ठीक होने पर सेठचंद ने यहां माता मावड़ी का मंदिर बनवा दिया।
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माता की मूर्ति जमीन से निकली
मावड़ी माता की मूर्ति जमीन से निकली हुई है। जहां से लोगों को ये मूर्ति मिली मंदिर का गर्भ गृह वहीं पर है। बताया जाता है कि इस मूर्ति को चोरों ने दो बार चुराने की कोशिश की, लेकिन कभी भी इस मंदिर के परिसर से बाहर नहीं ले जा पाए।
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तीन दिन लगता है मेला
मंदिर के पुजारी प्रदीप जोगी ने बताया कि ये मंदिर 200 से भी पुराना है। नवरात्र पर माता के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। दशमी से लेकर तीन दिन तक मंदिर में मेला लगेगा। इसमें देश-विदेश के श्रद्धालु हिस्सा लेंगे। पुजारी प्रदीप जोगी ने बताया कि मावड़ी माता की मूर्ति जमीन से निकली हुई है और इसे यही स्थापित किया गया।
पाकिस्तान के अलावा सिर्फ सिरसा में ही है मावड़ी का मंदिर
मंदिर के पुजारी प्रदीप जोगी का दावा है कि पूरे देश में केवल एक ही मावड़ी माता का मंदिर है। जहां भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। पुजारी का मानना है कि सिरसा के अलावा मावड़ी माता का मंदिर जहां मन्नतेें पूरी होती है वो पाकिस्तान में स्थित है। उन्होंने बताया कि यदि किसी को भी आंख, कान, नाक या अपाहिज जैसी समस्या है तो यहां मन्नत मांगने मात्र से ही बीमारी दूर हो जाती है।
मंदिर परिसर में मिट्टी निकालकर मन्नत मांगने की है परंपरा
मावड़ी माता मंदिर में जो भी श्रद्धालु माता का आशीर्वाद लेने आता है। वो मंदिर परिसर की मिट्टी अवश्य निकालता है। मान्यता है कि मिट्टी निकालने शरीर का हर कष्ट दूर होता है। वहीं मंदिर में जाने वाले हर भक्त को मिट्टी निकालना अवश्य है।

मावड़ी माता मंदिर में स्थापित माता की मूर्ति- फोटो : Sirsa