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नए कृषि विधेयकों के विरोध में किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग किया जाम

Sun, 20 Sep 2020 11:27 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2020 11:27 PM IST
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national hiway jaam in protest against new agricultural biils
नारेबाजी कर धरना स्‍थल की ओर जाते किसान। - फोटो : Sirsa
कृषि संबंधी नए विधेयकों के विरोध में पंजुआना और जमाल क्षेत्र में किसानों ने तीन घंटे तक जाम लगाया। रोषस्वरूप किसान अपने ट्रैक्टर पर काला झंडा, काला मास्क व काला गमछा भी पहन कर आए। किसानों ने प्रदेश बंद के आयोजन के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग करीब तीन घंटे तक बाधित रखा।
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रोष प्रदर्शन को राजनीतिक व धार्मिक संगठनों के अलावा अनेक समाजसेवी संस्थाओं ने भी समर्थन दिया। किसान नेताओं ने 25 सितंबर को भारत बंद का ऐलान कर किसानों से फिर से सहयोग मांगा। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम न लगे, इसलिए पुलिस ने खैरेकां से पहले हनुमान मंदिर के पास ही रूट को डायवर्ट कर दिया था। राहगीर लिंक रास्तों से होकर डबवाली की ओर जा रहे थे। राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर नौ पर स्थित पंजुआना गांव के पास किसानों ने 11 बजकर 40 मिनट पर धरना लगाकर बैठ गए। इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकालते हुए पास किए गए कृषि संबंधित नए विधेयकों को किसान विरोधी व काला कानून बताते हुए इन्हें वापस लेने की बात कही। किसान करीब तीन घंटे तक हाईवे पर बैठकर सरकार के खिलाफ भड़ास निकालते रहे।
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हरियाणा किसान मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों को खत्म कर उनकी जमीनें हड़पने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने कोरोना की आड़ लेकर बिना किसी से सुझाव लिए पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए किसान विरोधी कानून पास कर दिए। भारूखेड़ा ने कहा कि इस नए विधेयकों से किसान वर्ग न केवल बर्बाद हो जाएगा अपितु किसान इस कदर बेबस हो जाएगा कि व्यापारिक संगठन उसका शोषण करने के लिए स्वतंत्र हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर केन्द्र सरकार वास्तव में किसानों की हितैषी है तो ऐसा कानून बनाए कि किसान की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे न बिके। उन्होंने पिपली में किसानों पर हुए लाठीचार्ज का उदाहरण देते हुए कहा कि ये सरकार किसानों की आवाज को लाठियों के बल पर दबाने की असफल कोशिश कर रही है।
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वहीं किसान नेता जसवीर सिंह भाटी ने कहा कि भाजपा सरकार किसान हितैषी नहीं अपितु किसान व मजदूर विरोधी सरकार है। उन्होंने उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को घेरते हुए कहा कि चौ. देवीलाल ने किसानों की लड़ाई लड़ी थी, लेकिन दुष्यंत ने उनकेे नाम को भी कलंकित कर दिया। अगर दुष्यंत किसान हितैषी होने का दम भरते हैं तो वे किसानों के हक में भाजपा से समर्थन वापस क्यों नहीं ले लेते। इस मौके पर एसजीपीसी सदस्य व संत बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवाला ने कहा कि किसानों की इस लड़ाई में वे उनका हर तरह से समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि किसान हित में फैसले लेतेे हुए नए विधेयकों को वापस ले।
हंगामा करने वाले व्यक्ति की कलाई पर मिला भाजपा का बैंड
किसानों के प्रदर्शन दौरान एक वक्ता भाषण दे रहा था। तभी एक व्यक्ति ने इसका एतराज जताते हुए हंगामा खड़ा कर दिया कि ये कांग्रेस का नाम ले रहा है। हालांकि कुछ लोगों ने कहा कि वक्ता ने पार्टी का नाम नहीं लिया, लेकिन वह व्यक्ति आंदोलन में खलल डालने लग गया। इस पर लोगों ने उसे पकड़कर उसकी जांच की तो उसकी कलाई पर भाजपा का बैंड बंधा हुआ मिला। लोगों ने हंगामा करने वाले व्यक्ति को धरने से बाहर निकाल दिया। प्रदेशाध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने स्थिति संभालते हुए किसानों को शांति बनाए रखते हुए एकजुट रहने की बात कही। भारूखेड़ा ने कहा कि कुछ लोग एक योजना के तहत इस निर्धारित कार्यक्रम को असफल करने की फिराक में है।
किसी भी राजनीतिक को नहीं दिया बोलने का मौका
किसानों के प्रदर्शन का कई राजनीतिक पार्टियों के पदाधिकारी समर्थन करने पहुंचे। जिनमें विधायक शीशपाल केहरवाला, अकाली दल नेता राजेंद्र देसूजोधा, कांग्रेसी नेता होशियारी लाल शर्मा, पूर्व चेयरमैन कुलदीप सिंह गदराना, सुभाष जोधपुरिया, इनेलो नेता कश्मीर सिंह करीवाला, लखविंद्र सिंह, रणधीर सिंह जोधकां, करनैल सिंह ओढां व मलकीत सिंह चोरमार शामिल थे। लेकिन किसी भी राजनीतिक को यह कहकर बोलने का मौका नहीं दिया गया कि ये मंच किसानों का है। गांव जमाल के मेन चौक पर किसानों ने तीन घंटे किया रोष प्रदर्शन

सरकार की ओर से कृषि संबंधित विधेयकों, पिपली लाठीचार्ज और किसानों की समस्याओं को लेकर रविवार को चोपटा क्षेत्र के गांव जमाल चौक पर किसानों ने दोपहर 12 से 3 तक रोष प्रदर्शन कर धरना दिया। प्रदर्शनकारी किसानों ने प्रदेश और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उधर किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल तैनात रही, डीएसपी ऐलनाबाद जगतपाल, एसएचओ सत्यवान, जमाल चौकी प्रभारी सहित पुलिस के जवान मोर्चा संभाले हुए थे। राजस्थान से आने वाले वाहनों के रूट डायवर्ट किए गए। गांव बरासरी बस स्टैंड पर नाका लगाकर वाहनों को डायवर्ट किया। किसानों के धरने को सिरसा से विधानसभा चुनाव लड़ चुके युवा नेता गोकुल सेतिया ने भी अपना समर्थन दिया। किसानों के प्रदर्शन में किसान नेता सुरेश ढाका, संदीप कुमार सिंवर, जगदीश चंद्र, लादूराम पूनिया, राममूर्ति, पूर्व सरपंच बंसीलाल ने संबोधन में सरकार को जमकर कोसा।

राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर धरन पर बैठे किसान।

राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर धरन पर बैठे किसान।- फोटो : Sirsa

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