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शहर में तीन हजार से ज्यादा बेसहारा पशु, प्रशासन के दावे फेल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 29 Sep 2022 11:18 PM IST
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More than three thousand destitute animals in the city, the claims of the administration failed
खजांचियों वाली गली में बीच बैठे बेसहारा पशु। संवाद - फोटो : Sirsa
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। शहर में तीन हजार से ज्यादा बेसहारा पशु लाचार अवस्था में हैं। आसरा देने और पशु चारे की व्यवस्था करने के प्रशासनिक अधिकारियों के करीब सात महीने पहले किए दावे फेल साबित हो रहे हैं। सरकार के आदेश के बावजूद अधिकारी पशु चारे के लिए फंड नहीं दे रहे, जबकि नंदीशाला संचालकों ने बिना एडवांस व्यवस्था के पशु लेने से स्पष्ट इन्कार कर दिया है। तीसरी बड़ी समस्या उस ठेकेदार की है, जिसने लाखों रुपये का पशु पकड़ो अभियान का ठेका ले लिया। शहर की जनता तो पूरी अव्यवस्था से जूझ ही रही है।
बाजार, लिंक रोड, स्टेट हाईवे सहित शहर में किसी भी रास्ते पर निकल जाओ, सड़कों पर लावारिस पशु नजर आते हैं। ये पशु दिन के समय रिहायशी कॉलोनियों में छांव और खाना ढूंढने की जद्दोजहद करते हैं, जबकि रात्रि में सड़कों के बीच आकर बैठ जाते हैं। ऐसे में हादसों का भय रहता है। इस संबंध में प्रशासन कई बार योजनाएं भी बना चुका है लेकिन कामयाब नहीं हो पाई। अब भी स्थिति यथावत ही है। शहर में बेसहारा पशुओं के करण 50 से ज्यादा हादसे तीन वर्ष के दौरान हो चुके हैं। इस अवधि के दौरान करीब 20 लोगों की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में मुख्यमंत्री के स्पष्ट आदेश थे कि शहर को बेसहारा पशु मुक्त किया जाए। इसलिए केलनियां में नंदीशाला का भी निर्माण करवाया गया। यहां करीब 2 हजार पशुओं को रखे जाने की क्षमता भी है। लेकिन इसके बावजूद स्थिति नियंत्रण में नहीं हो पा रही।
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जानिए... कहां हो चुके हादसे
- राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित गांव भावदीन के पास बेसहारा पशुओं के कारण फरवरी के पहले सप्ताह में हादसा हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
- जून में गांव मोरीवाला के पास भी दो पशु आपस में लड़ रहे थे, इनकी चपेट में आने से हादसा हुआ।
- मार्च में डबवाली रोड स्थित साहुवाला के पास भी बेसहारा पशु के कारण वाहन चालक हादसे का शिकार हुए।
- पशुुओं को नंदीशाला ले जाते समय केलनियां रोड पर रास्ते में पशु भागे। इनकी चपेट में आने से एक बाइक सवार घायल हो गया।
- नोहरिया बाजार में भी करीब 6 माह पहले पशु आपस में लड़े, जिस कारण साइकिल सवार राहगीर घायल हो गया था।
शहर में यहां विचरते हैं बेसहारा पशु
-रोड़ी बाजार, भादरा बाजार, नोहरिया बाजार
- सूरतगढ़िया बाजार, रानियां बाजार, गुरुद्वारा रोड
- नागरिक अस्पताल रोड, डबवाली रोड, हिसार रोड
- हुडा सेक्टर, ए,बी,सी,डी, ई-ब्लॉक
- चत्तरगढपट्टी, खैरपुर कॉलोनी, डीसी कॉलोनी, बरनाला रोड
- सब्जी मंडी, अनाज मंडी, जनता भवन रोड, आर्य समाज रोड
फरवरी में हुई थी बैठक, सभी गोशाला संचालकों को किए थे निर्देश
फरवरी में तत्कालीन उपायुक्त ने सभी गोशाला संचालकों और नंदीशालाओं के पदाधिकारियों की बैठक ली। इसमें आदेश दिया गया था कि सभी गोशालाओं और नंदीशालाओं में बराबर अनुपात में पशु सौंपे जाएंगे। इस पर सहमति भी हो गई ताकि एक नंदीशाला या गोशाला पर अनावश्यक बोझ न आए। लेकिन इस योजना पर काम नहीं हो पाया। हालांकि नगर परिषद ने पशु पकड़ो अभियान के लिए ठेका भी जारी किया। लाखों रुपये का ठेका छूटा और ठेकेदार राकेश कुमार का कहना है कि उन्होंने 13 कर्मचारियों के साथ-साथ दो वाहनों की भी व्यवस्था कर दी, लेकिन केवल एक माह तक अभियान चल पाया। इस दौरान केवल 305 पशुओं को पकड़कर नंदीशाला पहुंचा सके। एक बार अब सितंबर में सीएम के दौरे से ठीक एक दिन पहले ठेकेदार को बुलाया गया। पांच पशु पकड़े, लेकिन इन्हें भी नंदीशाला संचालकों ने लेने से इन्कार कर दिया।
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समन्वय का अभाव और खींचतान बनी समस्या का कारण
प्रशासन लावारिस पशुओं को नंदीशालाओं और गोशाला में पहुंचाना चाहता है, लेकिन गोशाला संचालकों ने इन्कार कर दिया। नंदीशाला संचालकों की दो ही समस्या है। वे कहते हैं कि पशुओं के लिए एडवांस पशु चारे की व्यवस्था करो या भुगतान करो। दूसरा लंपी बीमारी वाले पशुओं को नहीं लिया जाए। शहर में घूम रहे अधिकतर बेसहारा पशु इस बीमारी से संक्रमित हैं। हालांकि सरकार की ओर से भी प्रशासन के पास आदेश आया है कि 50 रुपये प्रति पशु, प्रतिदिन के हिसाब से नंदीशाला संचालकों को देना होगा। लेकिन नंदीशाला संचालक एडवांस पशु चारे या भुगतान की मांग करते हैं।
एडवांस मांगते हैं, कैसे दें : मुख्य सफाई निरीक्षक
गोशाला और नंदीशाला संचालक एडवांस की मांग करते हैं। ये समस्या है कि ये व्यवस्था कैसे करें। पशु चारे और लंपी बीमारी का तर्क देकर पशु लेते नहीं और पशु चारे की व्यवस्था की बात कहते हैं। फिर भी हम प्रयासरत हैं कि जल्द से जल्द बेसहारा पशुओं को नंदीशाला में पहुंचा दें। - जयवीर सिंह, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर परिषद, सिरसा।
अभियान चला रहे, उठाना पड़ रहा घाटा : ठेकेदार
देखिए, लाखों रुपये का ठेका तो ले लिया। मुझसे ये कहा गया था कि शहर में तीन हजार बेसहारा पशु हैं, उन्हें नंदीशाला पहुुंचाना है। लेकिन एक माह चलकर अभियान ठप हो गया, क्योंकि गोशाला और नंदीशाला संचालकों ने पशु लेने से इंकार कर दिया। हमारी समस्या कोई सुनने को तैयार नहीं है। जबकि 13 कर्मचारी नियुक्त किए और दो बड़े वाहनों की हमने व्यवस्था की थी। -राकेश कुमार, ठेकेदार, पशु पकड़ो अभियान।
बीमारी फैली है, इसलिए दिक्कत है : पवन कुमार
दो महीने पहले सरकार की ओर से पत्र आया था। इसके अनुसार फैसला लिया था कि प्रति पशु, प्रतिदिन के 50 रुपये देंगे।। अधिकारियों ने वादा भी किया था लेकिन आज तक इस पर अमल नहीं हुआ। दूसरा कारण है कि लंपी बीमारी चल रही है। यदि ऐसे पशु ले लिए तो यहां भी बीमारी फैलेगी। -पवन कुमार, केलनियां नंदीशाला।

पशु चारे की व्यवस्था करे प्रशासन : संजय कुमार
प्रशासन नंदीशाला में पशु चारे की व्यवस्था करवा दें, हमें पशु लेने में कोई दिक्कत नहीं है। इसके अलावा बीमारी भी चल रही है। इसलिए हम परहेज कर रहे हैं। तूड़ी महंगी है, इसलिए यदि पशु ले लिए तो उनके यहां भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। -संजय कुमार, रामनगरिया नंदीशाला, सिरसा।

आर्य समाज रोड स्थित डाकखना के पास एकत्रित बेसहारा पशु। संवाद

आर्य समाज रोड स्थित डाकखना के पास एकत्रित बेसहारा पशु। संवाद- फोटो : Sirsa

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