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Sirsa News: रजामंदी बिना रचाया ब्याह...सुरक्षा के लिए खटखटा रहे न्याय का द्वार, सिरसा जिले में बढ़ रहे अपनों की रजामंदी के बिना घर से भागकर शादी के मामले, 2026 में आंकड़ा 200 पार पहुंचा
Fri, 02 Oct 2026 10:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Fri, 02 Oct 2026 10:05 PM IST
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सिरसा। घर की दहलीज लांघकर अपनों की रजामंदी के बिना शादी करने वाले युगलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। परिजनों की नाराजगी और जान का खतरा बताकर प्रेमी युगल अब अदालत से पुलिस सुरक्षा मांग रहे हैं। जिले में पिछले 16 वर्षों में 1825 युगल न्यायालय से पुलिस सुरक्षा ले चुके हैं। वर्ष 2026 में भी ऐसे मामलों का आंकड़ा 200 पार पहुंच चुका है।
सुरक्षा की मांग करने वाले प्रेमी युगलों को जरूरत के अनुसार पुलिस लाइन स्थित सेफ हाउस में ठहराया जाता है। वर्ष 2010 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जिला एवं सत्र न्यायालयों को पुलिस सुरक्षा देने की शक्ति प्रदान की थी। इसके बाद सिरसा प्रदेश का पहला जिला बना जहां न्यायालय के आदेश पर प्रेमी युगलों को पुलिस सुरक्षा दी गई। शुरुआत में युगलों के लिए पुलिस गार्ड उपलब्ध करवाए जाते थे। बाद में पुलिस लाइन में सेफ हाउस स्थापित किया गया।
फर्जी विवाह प्रमाणपत्र पर सख्ती
वर्ष 2010 से 2016 के बीच ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हुई। इसी दौरान एक गिरोह भी सक्रिय हो गया जो धार्मिक स्थलों पर शादी करवाकर फर्जी विवाह प्रमाण पत्र तैयार करता था। इसका खुलासा होने के बाद वर्ष 2017 में जिला एवं सत्र न्यायालय ने प्रक्रिया सख्त कर दी। इसके बाद केवल पंजीकृत धार्मिक स्थलों के विवाह प्रमाण पत्र के आधार पर ही पुलिस सुरक्षा देने की व्यवस्था शुरू की गई।
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वर्ष 2025 में 303 युगलों ने मांगी सुरक्षा
कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 में 61 युगलों ने घर वालों की मर्जी बिना शादी की और पुलिस प्रोटेक्शन ली। जुलाई 2021 के बाद ऐसे मामलों में तेजी आई। वर्ष 2025 में 303 युगलों ने शादी के बाद परिजनों से जान का खतरा बताकर सुरक्षा मांगी। वर्ष 2026 में अब तक यह संख्या 200 से अधिक हो चुकी है।
खतरे की आशंका पर सेफ हाउस
महिला अधिवक्ता ज्योति बत्रा ने बताया कि काफी संख्या में युगल धार्मिक स्थलों पर शादी करने के बाद पुलिस प्रोटेक्शन के लिए न्यायालय पहुंच रहे हैं। न्यायालय उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था करता है। जरूरत पड़ने पर युगलों को सेफ हाउस में भी ठहराया जाता है।
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परिजनों की मर्जी के खिलाफ शादी करने के मामले बढ़ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि काफी मामलों में शादी का रिश्ता लंबे समय तक नहीं टिक पाता। युवाओं को विवाह जैसे महत्वपूर्ण निर्णय से पहले परिवार और भविष्य से जुड़े पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने के लिए जागरूक करने की जरूरत है। - केवल कंबोज, अधिवक्ता, पूर्व उप प्रधान, सिरसा बार एसोसिएशन।
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सुरक्षा की मांग करने वाले प्रेमी युगलों को जरूरत के अनुसार पुलिस लाइन स्थित सेफ हाउस में ठहराया जाता है। वर्ष 2010 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जिला एवं सत्र न्यायालयों को पुलिस सुरक्षा देने की शक्ति प्रदान की थी। इसके बाद सिरसा प्रदेश का पहला जिला बना जहां न्यायालय के आदेश पर प्रेमी युगलों को पुलिस सुरक्षा दी गई। शुरुआत में युगलों के लिए पुलिस गार्ड उपलब्ध करवाए जाते थे। बाद में पुलिस लाइन में सेफ हाउस स्थापित किया गया।
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फर्जी विवाह प्रमाणपत्र पर सख्ती
वर्ष 2010 से 2016 के बीच ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हुई। इसी दौरान एक गिरोह भी सक्रिय हो गया जो धार्मिक स्थलों पर शादी करवाकर फर्जी विवाह प्रमाण पत्र तैयार करता था। इसका खुलासा होने के बाद वर्ष 2017 में जिला एवं सत्र न्यायालय ने प्रक्रिया सख्त कर दी। इसके बाद केवल पंजीकृत धार्मिक स्थलों के विवाह प्रमाण पत्र के आधार पर ही पुलिस सुरक्षा देने की व्यवस्था शुरू की गई।
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वर्ष 2025 में 303 युगलों ने मांगी सुरक्षा
कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 में 61 युगलों ने घर वालों की मर्जी बिना शादी की और पुलिस प्रोटेक्शन ली। जुलाई 2021 के बाद ऐसे मामलों में तेजी आई। वर्ष 2025 में 303 युगलों ने शादी के बाद परिजनों से जान का खतरा बताकर सुरक्षा मांगी। वर्ष 2026 में अब तक यह संख्या 200 से अधिक हो चुकी है।
खतरे की आशंका पर सेफ हाउस
महिला अधिवक्ता ज्योति बत्रा ने बताया कि काफी संख्या में युगल धार्मिक स्थलों पर शादी करने के बाद पुलिस प्रोटेक्शन के लिए न्यायालय पहुंच रहे हैं। न्यायालय उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था करता है। जरूरत पड़ने पर युगलों को सेफ हाउस में भी ठहराया जाता है।
परिजनों की मर्जी के खिलाफ शादी करने के मामले बढ़ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि काफी मामलों में शादी का रिश्ता लंबे समय तक नहीं टिक पाता। युवाओं को विवाह जैसे महत्वपूर्ण निर्णय से पहले परिवार और भविष्य से जुड़े पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने के लिए जागरूक करने की जरूरत है। - केवल कंबोज, अधिवक्ता, पूर्व उप प्रधान, सिरसा बार एसोसिएशन।