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अब शादियों में नहीं होगा डीजे, न ले सकेंगे दहेज

Mon, 27 Jun 2016 01:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा Updated Mon, 27 Jun 2016 01:52 AM IST
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Mahapanchayat, No dowri, No DJ, dowri free marriage, sirsa
महापंचायत - फोटो : Bureau

बेटियों की स्वतंत्रता के लिए गोरीवाला उपतहसील के पंद्रह गांव आगे आए हैं। रविवार को गांव गोरीवाला में दहेज प्रथा के साथ-साथ घूंघट के खिलाफ महापंचायत हुई। जिसमें ग्रामीणों ने दहेज लेने तथा देने पर पाबंदी लगाई। इसके साथ-साथ शादी में डीजे की पाबंदी के साथ 11 या 21 लोगों की बारात लाने पर सहमति बनी। इसके साथ-साथ मृत्यु भोज पर भी प्रतिबंध लग गया है। बढ़ती महंगाई के साथ-साथ खुद को वर्तमान परिवेश में ढालते हुए सैकड़ों ग्रामीणों ने यह फैसला लिया है।

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उपतहसील गोरीवाला के पंचायत भवन में आयोजित हुई महापंचायत में करीब पांच सौ से ज्यादा ग्रामीणों ने भाग लिया। खंड डबवाली के गांवों के साथ-साथ राजस्थान से भी लोग महापंचायत में भाग लेने के लिए पहुंचे। सभा के संयोजक आदराम देवरथ ने शादी में डीजे बंद करने, बारात समय पर व कम लाने, गोद भराई में ज्यादा खर्च न करने, घूंघट प्रथा बंद करने की बात कही।
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दहेज नहीं लाने वाले परिवारों को भी सम्मानित किया गया। सभी ने प्रतिबंधों को स्वीकार किया। महापंचायत में अधिकतर बागड़ी बेल्ट के ग्रामीण पहुंचे। जिसमें घूंघट प्रथा सबसे ज्यादा प्रचलित है। ऐसे में उन लोगों ने हाथ ऊंचा करके इस प्रथा का विरोध करने पर सहमति जताई। इसके साथ-साथ यही नतीजा निकला कि बेटियों को शिक्षित किया जाए।
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अधिकतर वक्ताओं ने भी शिक्षा को सभी समस्याओं का समाधान बताया। बारातियों की संख्या 11 या 21 करने के बाद फैसला आया कि अगर इससे अधिक बाराती आए तो उन्हें वर पक्ष खुद ही संभालेगा। महापंचायत में मुख्य वक्ता के रूप में अशोक वर्मा सिरसा, वरिष्ठ अतिथि के रूप में सुरेश कुमार शाखा प्रबंधक एसबीआई कालुआना, प्रो.रामचंद्र लिंबा सिरसा, राजकुमार रोहलीवाल ने भाग लिया। अशोक वर्मा ने कहा की समाज में दहेज प्रथा ने विकराल रूप धारण कर लिया है, हर मां-बाप अपनी बेटी की शादी में अपनी औकात से ज्यादा दहेज देता है।

फिर भी लड़के वालों की मांग बढ़ती जाती है व बेटी ससुराल में सुखी नहीं रहती। इसी कारण समाज में कन्या भ्रूणहत्या बढ़ी व अब बेटियों की कमी हो गई है, इसलिए सभी को न दहेज लेना है और ना ही दहेज देना है। सुरेश कुमार ने कहा की दहेज प्रथा एक प्रतियोगिता बन गई है, हर कोई एक-दूसरे से ज्यादा दहेज लेना व देना चाहता है। अमीर लोगों के इसका कोई फर्क नहीं पड़ता व गरीब व्यक्ति कर्ज उठाकर बेटी की शादी में लगा देता है व सारी उम्र ब्याज ही भरता रहता है।


शिक्षा ही मिटाएगी दहेज प्रथा को
स्वामी विवेकानंद स्कूल गोरीवाला के एमडी सुल्तान सिंह सुथार ने कहा कि समाज में फैल चुकी दहेज प्रथा रूपी बुराई को शिक्षा से ही खत्म किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि हम बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाकर अपने पैरों पर खड़ा करेंगे तो कोई लड़के वाला दहेज नहीं मांगेगा। उन्होंने दहेज मांगने वालों को अपनी बेटी नहीं देने की बात कही। प्रो. लिम्बा ने कहा की दहेज लेना व देना कानून जुर्म है। परंतु हर कार्य कानून से हल नहीं हो सकता, समाज में फैली इस बुराई को समाज में बैठकर ही हल करना होगा। हम सब मिलकर प्रण लें की उढावणी प्रथा व मृत्युभोज की तरह इसे भी समाज से मिटाकर ही दम लेंगे। वहीं युवा पियूष जोशी सिरसा, राजकुमार रोहलीवाल ने कहा की समाज अंधविश्वास व कुरीतियों के कारण कर्जदार हो रहा है।

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