{"_id":"689b7c50967655bd5806beb3","slug":"library-is-an-invaluable-source-of-knowledge-education-and-research-dr-jaiprakash-sirsa-news-c-128-1-slko1008-142396-2025-08-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"ज्ञान, शिक्षा और शोध का अमूल्य स्रोत है पुस्तकालय : डॉ. जयप्रकाश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ज्ञान, शिक्षा और शोध का अमूल्य स्रोत है पुस्तकालय : डॉ. जयप्रकाश
विज्ञापन
सिरसा। जेसीडी में भारतीय पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एस.आर. रंगनाथन को श्रद्धांजलि देते हुए जे
सिरसा। जेसीडी विद्यापीठ में भारतीय पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एसआर रंगनाथन का जन्मदिवस मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. रंगनाथन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने और केक काटने से हुई।
बतौर मुख्य अतिथि विद्यापीठ के महानिदेशक डॉ. जयप्रकाश ने कहा कि डॉ. रंगनाथन का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने पुस्तकालयों को केवल पुस्तकों का संग्रहालय न मानकर ज्ञान और सूचना के जीवंत केंद्र के रूप में स्थापित किया। डिजिटल युग में भी उनके सिद्धांत उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। हमें उनकी शिक्षाओं को अपनाकर पुस्तकालय सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाना चाहिए।
पुस्तकालय ज्ञान, शिक्षा, शोध और संस्कृति का अमूल्य स्रोत है। विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थियों की ओर से पुस्तकालय विज्ञान के महत्व पर विचार-विमर्श, पोस्टर प्रेजेंटेशन और स्लोगन लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। प्रतिभागियों ने पुस्तकों के प्रति अपने विचार साझा किए और बताया कि कैसे एक अच्छी पुस्तक जीवन की दिशा बदल सकती है। विजेताओं को स्मृति चिह्न एवं प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
कार्यक्रम में जेसीडी विद्यापीठ के प्राचार्यों और शिक्षकों ने भी विचार सांझा किए और डॉ. रंगनाथन के सिद्धांतों को वर्तमान शैक्षणिक परिवेश में लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने यह भी कहा कि आज के तकनीकी युग में ई-पुस्तकें और डिजिटल लाइब्रेरी का महत्व बढ़ रहा है, लेकिन मुद्रित पुस्तकों की सुगंध और पठन का आनंद आज भी अनुपम है।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके उपरांत उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और पुस्तकालय विज्ञान से जुड़े कर्मियों ने डॉ. रंगनाथन के जीवन, कार्य और योगदान पर अपने विचार रखें। डॉ. रंगनाथन को आधुनिक भारतीय पुस्तकालय प्रणाली का जनक कहा जाता है। संवाद
विज्ञापन
बतौर मुख्य अतिथि विद्यापीठ के महानिदेशक डॉ. जयप्रकाश ने कहा कि डॉ. रंगनाथन का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने पुस्तकालयों को केवल पुस्तकों का संग्रहालय न मानकर ज्ञान और सूचना के जीवंत केंद्र के रूप में स्थापित किया। डिजिटल युग में भी उनके सिद्धांत उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। हमें उनकी शिक्षाओं को अपनाकर पुस्तकालय सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाना चाहिए।
विज्ञापन
पुस्तकालय ज्ञान, शिक्षा, शोध और संस्कृति का अमूल्य स्रोत है। विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थियों की ओर से पुस्तकालय विज्ञान के महत्व पर विचार-विमर्श, पोस्टर प्रेजेंटेशन और स्लोगन लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। प्रतिभागियों ने पुस्तकों के प्रति अपने विचार साझा किए और बताया कि कैसे एक अच्छी पुस्तक जीवन की दिशा बदल सकती है। विजेताओं को स्मृति चिह्न एवं प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
कार्यक्रम में जेसीडी विद्यापीठ के प्राचार्यों और शिक्षकों ने भी विचार सांझा किए और डॉ. रंगनाथन के सिद्धांतों को वर्तमान शैक्षणिक परिवेश में लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने यह भी कहा कि आज के तकनीकी युग में ई-पुस्तकें और डिजिटल लाइब्रेरी का महत्व बढ़ रहा है, लेकिन मुद्रित पुस्तकों की सुगंध और पठन का आनंद आज भी अनुपम है।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके उपरांत उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और पुस्तकालय विज्ञान से जुड़े कर्मियों ने डॉ. रंगनाथन के जीवन, कार्य और योगदान पर अपने विचार रखें। डॉ. रंगनाथन को आधुनिक भारतीय पुस्तकालय प्रणाली का जनक कहा जाता है। संवाद