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अतिरिक्त आमदनी के लिए लगाया किन्नू, अब हर वर्ष होती है 35 लाख रुपये कमाई
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विकास पूनियां किसान।
- फोटो : Sirsa
चोपटा। नहरी पानी की कमी, बारिश समय पर नहीं होना, फसलों में विभिन्न प्रकार की बीमारियां व अन्य प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को परंपरागत खेती से घाटा होने लगा है। जब परंपरागत खेती से आमदनी कम हुई और आर्थिक स्थिति डगमगाने लगी तो गांव नारायण खेड़ा के किसान विकास पूनियां ने अतिरिक्त कमाई का जरिया खोजा। करीब 12 वर्ष पहले विकास ने 25 एकड़ में किन्नू का बाग लगाया। इससे परंपरागत कृषि के साथ अतिरिक्त आमदन शुरू हो गई। विकास की इसी मेहनत की बदौलत हरियाणा के साथ उसे राजस्थान के आसपास के गांवों में अलग पहचान मिली। वह अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गया।
सरकारी योजनाओं की ली जानकारी
विकास ने बताया कि परंपरागत खेती में अच्छी बारिश होने पर तो बचत हो जाती वरना घाटा ही लगता। 12 वर्ष पूर्व तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने समाचार पत्रों में विज्ञापन दिया कि किसान खेतों में बाग लगाए तो उन्हें कई प्रकार की रियायतें दी जाएगी। समाचार पत्रों से मिली इस योजना के बारे में विभाग से जानकारी लेकर व वहां से प्रेरण लेकर 25 एकड़ जमीन में किन्नू का बाग लगाया। शुरूआत में 7 एकड़ भूमि में किन्नू के पौधे खराब हो गए। अब 18 एकड़ जमीन में किन्नू के बाग से प्रति एकड़ उसे 2 लाख रुपये की कमाई हो रही है।
किन्नू के पौधों में जल्दी सिंचाई की जरूरत नहीं होती।
विकास ने बताया कि अब इस जमीन में किन्नू के पौधौ के साथ साथ मौसमी फसलें गेहूं, सरसों, ग्वार, बाजरा व कपास की खेती भी करता है। किन्नू के बाग से उसे करीब 35 लाख रुपये सालाना अतिरिक्त आमदनी होने लगी है। उसने बताया कि सरकार के सहयोग से उसने खेत में एक पानी की डिग्गी भी बना ली है। उस डिग्गी में पानी एकत्रित करके रखता है। पेड़ों में पानी की जरूरत इसी डिग्गी से पूरी की जाती है। पानी का सही से उपयोग हो इसके ड्रिप सिस्टम अपनाया गया है। जिससे पानी व खाद व दवाई सीधे पौधों को मिल जाती है। आस पड़ोस के किसानों को जब भी सिंचाई के पानी की जरूरत नहीं होती तो वह उन किसानों से किराये पर पानी लेकर डिग्गी भर लेता है।
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आमदनी बढ़ी तो लगाया सौर ऊर्जा आधारित ट्यूबवेल
किन्नू के बाग जब से विकास की आमदनी बढ़ी तो उसने सौर ऊर्जा आधारित ट्यूबवेल भी लगवा लिया है। उसकी इसी मेहनत को देखकर क्षेत्र के कई किसानों ने भी किन्नू के बाग लगाकर अतिरिक्त कमाई शुरू कर दी है। पास लगते गांवों के किसान किन्नू का बाग देखने के लिए आते हैं और परंपरागत खेती के साथ अतिरिक्त कमाई का जरिया देखकर खुश होते हैं। विकास ने बताया कि वह सब्जियां अपने खेत में ही उगाता है कभी भी बाजार से नहीं लाता।
मंडी दूर होने के कारण यातायात खर्च ज्यादा हो जाता है
विकास ने बताया कि उसके गांव से सिरसा मंडी दूर पड़ती है। जिससे फलों को वहां ले जाकर बेचने में यातायात खर्च ज्यादा आता है तथा बचत कम होती है। उसका कहना है कि अगर फलों की मंडी या फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट नाथूसरी चौपटा में विकसित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी। इसके साथ ही सरकार द्वारा शुरू की गई बीमा स्कीमों को सही तरीके से लागू किया जाए।
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सरकारी योजनाओं की ली जानकारी
विकास ने बताया कि परंपरागत खेती में अच्छी बारिश होने पर तो बचत हो जाती वरना घाटा ही लगता। 12 वर्ष पूर्व तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने समाचार पत्रों में विज्ञापन दिया कि किसान खेतों में बाग लगाए तो उन्हें कई प्रकार की रियायतें दी जाएगी। समाचार पत्रों से मिली इस योजना के बारे में विभाग से जानकारी लेकर व वहां से प्रेरण लेकर 25 एकड़ जमीन में किन्नू का बाग लगाया। शुरूआत में 7 एकड़ भूमि में किन्नू के पौधे खराब हो गए। अब 18 एकड़ जमीन में किन्नू के बाग से प्रति एकड़ उसे 2 लाख रुपये की कमाई हो रही है।
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किन्नू के पौधों में जल्दी सिंचाई की जरूरत नहीं होती।
विकास ने बताया कि अब इस जमीन में किन्नू के पौधौ के साथ साथ मौसमी फसलें गेहूं, सरसों, ग्वार, बाजरा व कपास की खेती भी करता है। किन्नू के बाग से उसे करीब 35 लाख रुपये सालाना अतिरिक्त आमदनी होने लगी है। उसने बताया कि सरकार के सहयोग से उसने खेत में एक पानी की डिग्गी भी बना ली है। उस डिग्गी में पानी एकत्रित करके रखता है। पेड़ों में पानी की जरूरत इसी डिग्गी से पूरी की जाती है। पानी का सही से उपयोग हो इसके ड्रिप सिस्टम अपनाया गया है। जिससे पानी व खाद व दवाई सीधे पौधों को मिल जाती है। आस पड़ोस के किसानों को जब भी सिंचाई के पानी की जरूरत नहीं होती तो वह उन किसानों से किराये पर पानी लेकर डिग्गी भर लेता है।
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आमदनी बढ़ी तो लगाया सौर ऊर्जा आधारित ट्यूबवेल
किन्नू के बाग जब से विकास की आमदनी बढ़ी तो उसने सौर ऊर्जा आधारित ट्यूबवेल भी लगवा लिया है। उसकी इसी मेहनत को देखकर क्षेत्र के कई किसानों ने भी किन्नू के बाग लगाकर अतिरिक्त कमाई शुरू कर दी है। पास लगते गांवों के किसान किन्नू का बाग देखने के लिए आते हैं और परंपरागत खेती के साथ अतिरिक्त कमाई का जरिया देखकर खुश होते हैं। विकास ने बताया कि वह सब्जियां अपने खेत में ही उगाता है कभी भी बाजार से नहीं लाता।
मंडी दूर होने के कारण यातायात खर्च ज्यादा हो जाता है
विकास ने बताया कि उसके गांव से सिरसा मंडी दूर पड़ती है। जिससे फलों को वहां ले जाकर बेचने में यातायात खर्च ज्यादा आता है तथा बचत कम होती है। उसका कहना है कि अगर फलों की मंडी या फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट नाथूसरी चौपटा में विकसित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी। इसके साथ ही सरकार द्वारा शुरू की गई बीमा स्कीमों को सही तरीके से लागू किया जाए।