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Sirsa News: आंदोलन की आग में झुलसी किन्नू की फसल
Mon, 04 Mar 2024 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 04 Mar 2024 12:02 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोड़ी (सिरसा) : मौसम की मार से कमजोर हुई किन्नू की फसल आंदोलन की आग में बुरी तरह झुलस गई। रास्ते बंद होने के कारण बाहर के व्यापारी सिरसा नहीं पहुंचे, जिससे फसलों को बाहर नहीं भेजा जा सका। ऐसे में फसलें बिक नहीं सकीं या फिर औने-पौने दाम में बिकीं। मांग कम होने के कारण जिन किसानों ने फल नहीं तोड़े, उनके कई क्विंटल फल खराब होकर बाग में ही गिर गए। ऐसे में अच्छी कमाई का सपना संजोए किन्नू उत्पादक किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
किन्नू उत्पादक कुरंगावाली गांव निवासी किसान अजय सिंह गिल ने बताया कि वे कालांवाली रोड़ी रोड पर अपने गांव में पिछले 12 वर्षों से 10 एकड़ में किन्नू की खेती कर रहे हैं। एक साल में लगभग 1 लाख रुपये प्रति एकड़ की फसल की लागत आती है। इस बार बरसात न होने के कारण किन्नू का फल पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाया। इससे अच्छे दाम नहीं मिले। रही-सही कसर किसानों को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से की गई बैरिकेडिंग ने पूरी कर दी। बैरिकेडिंग कर मुख्य रास्ते बंद किए जाने के कारण बाहर के व्यापारियों के ट्रक सिरसा नहीं पहुंचे। ऐसे में हमारी फसल दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों में नहीं पहुंच सके। सिरसा में किसी तरह किसान किन्नू लेकर पहुंच भी गए तो वे बिके नहीं, या फिर बेहद कम दाम पर बिके।
पिछले साल तीस से 35 रुपये तक बिके फल , इस बार 10 से 15 रुपये में बिके
किसान ने बताया कि बाजार में किन्नू का भाव इस साल 10 से 15 रुपये तक ही मिला। जबकि किन्नू की कटाई और ट्रांसपोर्ट का खर्च 7-8 रुपये प्रति किलो पड़ता है। इस बार किन्नू की फसल में मुनाफा नहीं हो सका। जिनकी फसल थोड़ी कमजोर रही या नहीं बिक सकी, उनको किन्नू सड़कों के किनारे डालना पड़ रहा है।
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रोड़ी (सिरसा) : मौसम की मार से कमजोर हुई किन्नू की फसल आंदोलन की आग में बुरी तरह झुलस गई। रास्ते बंद होने के कारण बाहर के व्यापारी सिरसा नहीं पहुंचे, जिससे फसलों को बाहर नहीं भेजा जा सका। ऐसे में फसलें बिक नहीं सकीं या फिर औने-पौने दाम में बिकीं। मांग कम होने के कारण जिन किसानों ने फल नहीं तोड़े, उनके कई क्विंटल फल खराब होकर बाग में ही गिर गए। ऐसे में अच्छी कमाई का सपना संजोए किन्नू उत्पादक किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
किन्नू उत्पादक कुरंगावाली गांव निवासी किसान अजय सिंह गिल ने बताया कि वे कालांवाली रोड़ी रोड पर अपने गांव में पिछले 12 वर्षों से 10 एकड़ में किन्नू की खेती कर रहे हैं। एक साल में लगभग 1 लाख रुपये प्रति एकड़ की फसल की लागत आती है। इस बार बरसात न होने के कारण किन्नू का फल पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाया। इससे अच्छे दाम नहीं मिले। रही-सही कसर किसानों को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से की गई बैरिकेडिंग ने पूरी कर दी। बैरिकेडिंग कर मुख्य रास्ते बंद किए जाने के कारण बाहर के व्यापारियों के ट्रक सिरसा नहीं पहुंचे। ऐसे में हमारी फसल दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों में नहीं पहुंच सके। सिरसा में किसी तरह किसान किन्नू लेकर पहुंच भी गए तो वे बिके नहीं, या फिर बेहद कम दाम पर बिके।
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पिछले साल तीस से 35 रुपये तक बिके फल , इस बार 10 से 15 रुपये में बिके
किसान ने बताया कि बाजार में किन्नू का भाव इस साल 10 से 15 रुपये तक ही मिला। जबकि किन्नू की कटाई और ट्रांसपोर्ट का खर्च 7-8 रुपये प्रति किलो पड़ता है। इस बार किन्नू की फसल में मुनाफा नहीं हो सका। जिनकी फसल थोड़ी कमजोर रही या नहीं बिक सकी, उनको किन्नू सड़कों के किनारे डालना पड़ रहा है।
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