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Sirsa News: कविता पर आश्रम से जुड़ने और बेटी को सौंपने का दबाव बना रहे थे ससुराल वाले
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सिरसा। जिला नागरिक अस्पताल में मोर्चरी के बाहर बैठे कविता के मायके पक्ष लोग। संवाद
- मां-बेटी की जलकर मौत का मामला: मायके पक्ष ने लगाया आरोप - कई बार पंचायत के बावजूद कविता को तंग किया जा रहा था
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। गांव शक्कर मंदोरी में मां-बेटी की जलने से मौत मामले में सामने आया है कि ससुराल पक्ष के लोग उसे दहेज के लिए प्रताड़ित तो करते ही थे, उस पर एक आश्रम से जुड़ने और बेटी उन्हें सौंपने का दबाव भी बना रहे थे। पुलिस ने हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली है लेकिन आत्महत्या व हादसे के पहलू से भी जांच कर रही है। सोमवार को गांव में ही मां-बेटी का अलग-अलग अंतिम संस्कार कर दिया गया।
कविता के चचेरे भाई सुनील ने पुलिस को बताया कि उसका भाई सतीश रक्षाबंधन पर कविता से मिलने गया था। इस दौरान उसकी सास ताने देने लगी कि खाली हाथ आ गया है। इसके बाद वह कविता को अपने साथ रावलवास ले आया। बाद में ससुराल पक्ष के लोग अपनी गलती मानते हुए कविता को आगे से तंग न करने का वादा कर अपने साथ ले गए। सुनील ने बताया कि कविता की ननद ज्योति एक आश्रम से जुड़ी है। आरोप है कि ससुराल पक्ष के लोग कविता पर भी उसी आश्रम से जुड़ने का दबाव बनाते थे। वे बेटी सानवी को आश्रम को सौंपने का दबाव भी बना रहे थे। वे कहते थे कि तुम अगले बच्चे का पालन-पोषण कर लेना। इस बात को लेकर कविता का परिवार के साथ झगड़ा होता था। विरोध करने पर दहेज की मांग की जाती थी। इसके चलते दोनों परिवारों में कई बार पंचायतें हुईं। जांच में घटनास्थल से मिले साक्ष्य, एफएसएल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयानों को अहम माना जा रहा है। इन्हीं के आधार पर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मां-बेटी की मौत के पीछे हादसा, हत्या, आत्महत्या है या कोई अन्य कारण।
मां की चिता जली, पास ही बेटी को दफनाया
मायके पक्ष की रजामंदी के बाद पुलिस ने दोनों शव ससुराल पक्ष को सौंप दिए। कविता की चिता के पास ही उसकी बेटी को दफनाया गया। इस घटना के बाद से गांव में शोक का माहौल है। सोमवार को बड़ी संख्या में लोग कविता के घर इकट्ठा हुए और अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
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हत्या या आत्महत्या... उठ रहे सवाल
- कविता और उसकी दो साल की बेटी सानवी आग की चपेट में कैसे आईं?
- कविता ने बेटी के साथ खुद को आग लगाई या फिर दोनों को जलाया गया?
- आग लगने के दौरान किसी ने कविता और उसकी बेटी के चीखने-चिल्लाने की आवाज क्यों नहीं सुनी? यदि सुनी थी तो उन्हें बचाने के प्रयास क्यों नहीं किए गए?
- मौके पर कोई ज्वलनशील पदार्थ नहीं मिला।
- कविता का शव कमरे में पड़ा था जबकि बेटी झुलसी हालत में आंगन तक पहुंच गई। यदि कविता ने बेटी के साथ आत्मदाह किया था तो वह बेटी को छोड़कर कैसे रह गई?
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। गांव शक्कर मंदोरी में मां-बेटी की जलने से मौत मामले में सामने आया है कि ससुराल पक्ष के लोग उसे दहेज के लिए प्रताड़ित तो करते ही थे, उस पर एक आश्रम से जुड़ने और बेटी उन्हें सौंपने का दबाव भी बना रहे थे। पुलिस ने हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली है लेकिन आत्महत्या व हादसे के पहलू से भी जांच कर रही है। सोमवार को गांव में ही मां-बेटी का अलग-अलग अंतिम संस्कार कर दिया गया।
कविता के चचेरे भाई सुनील ने पुलिस को बताया कि उसका भाई सतीश रक्षाबंधन पर कविता से मिलने गया था। इस दौरान उसकी सास ताने देने लगी कि खाली हाथ आ गया है। इसके बाद वह कविता को अपने साथ रावलवास ले आया। बाद में ससुराल पक्ष के लोग अपनी गलती मानते हुए कविता को आगे से तंग न करने का वादा कर अपने साथ ले गए। सुनील ने बताया कि कविता की ननद ज्योति एक आश्रम से जुड़ी है। आरोप है कि ससुराल पक्ष के लोग कविता पर भी उसी आश्रम से जुड़ने का दबाव बनाते थे। वे बेटी सानवी को आश्रम को सौंपने का दबाव भी बना रहे थे। वे कहते थे कि तुम अगले बच्चे का पालन-पोषण कर लेना। इस बात को लेकर कविता का परिवार के साथ झगड़ा होता था। विरोध करने पर दहेज की मांग की जाती थी। इसके चलते दोनों परिवारों में कई बार पंचायतें हुईं। जांच में घटनास्थल से मिले साक्ष्य, एफएसएल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयानों को अहम माना जा रहा है। इन्हीं के आधार पर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मां-बेटी की मौत के पीछे हादसा, हत्या, आत्महत्या है या कोई अन्य कारण।
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मां की चिता जली, पास ही बेटी को दफनाया
मायके पक्ष की रजामंदी के बाद पुलिस ने दोनों शव ससुराल पक्ष को सौंप दिए। कविता की चिता के पास ही उसकी बेटी को दफनाया गया। इस घटना के बाद से गांव में शोक का माहौल है। सोमवार को बड़ी संख्या में लोग कविता के घर इकट्ठा हुए और अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
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हत्या या आत्महत्या... उठ रहे सवाल
- कविता और उसकी दो साल की बेटी सानवी आग की चपेट में कैसे आईं?
- कविता ने बेटी के साथ खुद को आग लगाई या फिर दोनों को जलाया गया?
- आग लगने के दौरान किसी ने कविता और उसकी बेटी के चीखने-चिल्लाने की आवाज क्यों नहीं सुनी? यदि सुनी थी तो उन्हें बचाने के प्रयास क्यों नहीं किए गए?
- मौके पर कोई ज्वलनशील पदार्थ नहीं मिला।
- कविता का शव कमरे में पड़ा था जबकि बेटी झुलसी हालत में आंगन तक पहुंच गई। यदि कविता ने बेटी के साथ आत्मदाह किया था तो वह बेटी को छोड़कर कैसे रह गई?